संभल में 2 मस्जिदें, एक मदरसा तोड़ा गया: एक मस्जिद को रातभर में लोगों ने खुद ढहाया, दूसरे पर चला बुलडोजर - Sambhal News

बुलडोजर के साथ मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम ने प्रशासन के मुखियों को बताया कि मस्जिद का अवैध निर्माण पहले ही तोड़ दिया गया था।
 
मस्जिद के बारे में यह बात तो बहुत अजीब है। जैसे कोई फिल्म देखकर लगता है कि सच हो तो यह भी सच? प्रशासन मुखियों को ये बताने के लिए क्यों काम कर रहे हैं कि मस्जिद का निर्माण पहले ही हुआ था। क्या यह सब एक बड़ा धमकी है? और अगर मस्जिद का निर्माण पहले ही हुआ था तो फिर कौन सी टीम इसे ढहाने आई? यह सारी बात तो बहुत अजीब लग रही है।
 
मुझे लगता है 🤔 कि यह बात सच होनी चाहिए, लेकिन फिर भी मैं संदेह करता हूँ। मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम ने कहा है, परन्तु मुझे लगता है कि उनकी जानकारी पूरी नहीं होगी। अगर सच है तो क्यों नहीं बताया गया था पहले? लेकिन फिर भी, यह बात बहुत संभव है। मस्जिद के निर्माण में सरकार की जानकारी कैसे आई, यह सवाल अभी तक जवाब नहीं दिया गया है। 🤷‍♂️ मुझे लगता है कि सच्चाई जानने के लिए और सबको पता चलने के लिए पूरी जांच करनी चाहिए।
 
मैंने कुछ दिन पहले ग्वालियर में जाकर विशेष रूप से बनाए गए प्राकृतिक इतिहास उद्यान को देखा, वहाँ बहुत सारी बातें हुईं। मुझे लगा कि ऐसी बातें भी निकल सकती हैं जैसा आप बता रहे हैं। लेकिन लगता है कि यहां तो हमें सबकुछ सही स्थिति में रखना चाहिए, क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं होगा। यह तो एक अच्छा अवसर भी हो सकता है कि इस जगह पर कुछ ऐसा बनाएं जिससे लोगों को आनंद मिले।
 
मैं समझ नहीं पाऊंगा क्यों परिसर में इतने सारे खिलौने खरीदने के बाद मस्जिद को ढहाकर हटाने की बात हो रही है 🤔। अगर ऐसा तो पहले ही मिल गया था कि मस्जिद का निर्माण अवैध था। तो फिर तो लोगों को जरूर पता चला था कि वहां कुछ गलत है। लेकिन सरकार से तो कभी कोई जवाब नहीं मिलता। यह तो एक बड़ा मुद्दा है, हमें अपने देश की बात करनी चाहिए, न कि अन्य देशों की बात।
 
बड़ी बड़ी बातें हुई हैं यहाँ 🤔, टीम ने कहा कि मस्जिद का निर्माण अवैध था, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा सवाल है। अगर मस्जिद का निर्माण अवैध था तो क्यों नहीं बताया गया था? यहाँ पर सरकारी अधिकारियों और प्रशासन के मुखियों को शांति से बात करने की जरूरत थी, लेकिन निकला है कि टीम ने अपने डिजिटल फोन्स वाले राज्य में मस्जिद को तोड़ दिया 😔.

अब प्रशासन के मुखियों को यह कहना होगा कि हमने जिस मस्जिद को ढहाया था, उसका निर्माण पहले से ही नहीं था। लेकिन अगर यह सच है तो फिर क्या मस्जिद का निर्माण किया गया था? और अगर ऐसा हुआ था तो क्यों नहीं बताया गया था? ये सवाल शायद प्रशासन को जवाब देने पर मजबूर करेंगे।
 
😒 यह तो बहुत अजीब है, भाई, खुद को बुलडोजर से परेशान कराने का मौका मिलता है और फिर बोलते हैं कि मस्जिद का निर्माण पहले से ही गलत था। 🤦‍♂️
मुझे लगता है कि यह तो एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन शायद यह सच ही नहीं है। अगर सच है, तो यह कैसे संभव है? और फिर भी खुद को इतना परेशान कराने का क्यों कारण बनता है? 🤔
लेकिन, यह तो एक बड़ा सवाल है कि मस्जिद को नष्ट करने का मौका मिला, और फिर भी ऐसा नहीं हुआ। तो शायद इसमें और कुछ भी छुपा है। 🤑
यह तो एक बड़ा रहस्य है, लेकिन मुझे लगता है कि यह जानने का मौका मिलेगा। 🤞
 
मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम की बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई 🤩। यह साबित करता है कि उन्होंने मस्जिद को ढहने के लिए स्थानीय लोगों की शिकायतों पर ध्यान दिया। और यह जानकारी भी अच्छी लगी कि मस्जिद का अवैध निर्माण पहले ही तोड़ दिया गया था, इससे यह पता चलता है कि वास्तव में उन्होंने अपनी गलती सुधारने की कोशिश की। बुलडोजर की मदद से मस्जिद को हटाने की बात पर लोगों की राय अलग-अलग होगी, लेकिन यह तो तय है कि उन्होंने अपनी गलती सुधारने की कोशिश की।
 
बुलडोजर की बात करने पर तो तो बहुत ज्यादा चिंता होती है। लेकिन यह भी सच है कि मस्जिद के निर्माण में अवैधताएं थीं। दिल्ली में प्राचीन इतिहास की बात करने पर तो तो बहुत सारी गलतियां हुए होंगे।

लेकिन इस तरह से मस्जिद को ढहाकर हटाना एक बड़ी समस्या है। मस्जिद के निर्माण में पहले से ही अवैधताएं थीं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उसे पूरी तरह से तोड़ देना चाहिए। शायद समझौता करना बेहतर होता।

तो क्या प्रशासन के मुखियों ने ऐसा ही सोचा? या फिर यह कोई बड़ा घोटाला था जिसमें मस्जिद के निर्माण को दिखाया गया ताकि उन्हें पैसे मिल सकें।
 
बुरा हुआ, तो फिर क्यों ढहाकर हटाया गया? क्या उनकी बात मान लें और पुनर्निर्माण करें, या फिर से मस्जिद बनाने का रास्ता ढूंढ लें। सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
 
तो यह बिल्कुल सही है कि मस्जिद का निर्माण पहले ही गलत तरीके से किया गया था, लेकिन इसके साथ ही हमें याद रखना चाहिए कि देश की एक-चौथाई आबादी इस्लाम धर्म को अपनतनाती है। यह देखकर मुझे खेद होती है कि ताकत के कारण अल्पसंख्यक समुदाय पर कैसे दबाव डाला जाता है।

लेकिन अगर मस्जिद का निर्माण अवैध था तो फिर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पक्षों को एक-दूसरे की बात मानकर समझौता किया जाए। हमें देशभर में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों की आवाज़ सुनने की जरूरत है।
 
मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम की बात सुनकर मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास और संस्कृति को समझना चाहिए। ये मस्जिद कितनी पुरानी है, और इसका निर्माण कैसे हुआ, यह समझना जरूरी है। मुझे लगता है कि हमें अपने भविष्य को बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान को महत्व देना चाहिए।

तो, क्या हमें अपने खिलाफ कोई आदेश है या नियम हैं जिनके बाद किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं होना चाहिए? मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को स्वीकार करना चाहिए और उसे आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए, न कि इसे भूल जाना और फिर इसके खिलाफ लड़ना शुरू करना। 🤔
 
बिल्कुल सही हुआ 🤝, मस्जिद के अवैध निर्माण के बारे में पता चलना बहुत अच्छी बात है! 💡 प्रशासन को यह जानना भी जरूरी है कि मस्जिद का निर्माण पहले से तोड़ दिया गया था, तो अब मस्जिद के निर्माण में शुरू करने वाले लोगों को पता चल जाएगा कि उन्हें पहले से ही अपनी बात समझनी है 🤔। #वास्तविकता_सही #मस्जिदकेमुद्दा #प्रशासनिक_दिनरात
 
क्या सुनकर में मन में डर का माहौल बन जाता है 🤕। यह बात सुनकर लगता है कि हमारे देश में अभी भी कई ऐसे मामले हैं जहां न्याय की सोच नहीं की जाती। मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम की यह बात सुनकर लगता है कि तो उन्होंने पहले ही मजिस्ट्रेट को भेज दिया था। लेकिन यह तो सरकारी प्रशासन के मुखियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी, जैसे कि कोई इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिकेंड हो। 🤔। इससे लगता है कि हमारे देश में अभी भी बहुत सारे ऐसे मामले हैं जहां न्याय की सोच नहीं की जाती। यह तो एक बड़ा सवाल है कि अगर मस्जिद का अवैध निर्माण पहले ही तोड़ दिया गया था, तो फिर यह सब क्यों हुआ? 🤷‍♂️
 
अरे यह तो बहुत अजीब बात है कि प्रशासन के मुखियों को अभी भी यह जानकारी नहीं थी कि मस्जिद का निर्माण पहले से ही गलत जगह पर हुआ था। और अब तो मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम ने खुद तो बताया है कि यह मस्जिद क्यों नहीं बनाई गई थी। लगता है कि यह तय करने में समय लेने वाले लोग अभी भी समस्या को समझने में असमर्थ हैं। और फिर भी इस तरह की गड़बड़ी को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाते। यह तो देखकर खेद होता है कि इतनी बड़ी समस्या को हल करने में समय लग रहा है। 🤔😕
 
मुझे बहुत दुःख हुआ क्या बुलडोजर के साथ मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम ने असल में मस्जिद का अवैध निर्माण पहले ही तोड़ दिया गया था। यह जानकारी मुझे बहुत आश्चर्यजनक लगी। मुझे लगता है कि हमें अपने पुराने संस्कृति और इतिहास को समझने की जरूरत है। मस्जिद को ढहाकर हटाने वाली टीम ने कई सवाल उठाए, जैसे कि मस्जिद का अवैध निर्माण कैसे हुआ, और प्रशासन के मुखियों को तीन साल तक देने क्यों दिया गया। यह सब एक बड़ा रहस्य है। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की जरूरत है, और हमारे पुराने संस्कृति को बनाए रखने की जरूरत है। 🤔💡
 
Wow 🤯, yeh log kaun hai? Team ki baat hai masjid ko pahle hi tod diya gaya tha, toh logon ke liye kya fayda hai? Yeh sab kuch government ki samasya hai, aur unki hal karne mein logon ki madad chahiye. Interesting 🤔, yeh team kaafi bada jashn mana rahi hogi, jab tak ve apni baat sunaein na. Logon ko lagta hai ki masjid ek bahut hi purana aur mahatvapoorn sthan hai, toh kaise iska dhyan nahin rakha? 🤷‍♂️
 
बिल्कुल सोच रहा था कि यह तो मस्जिद को हटाने वाली टीम को मुश्किलें आ जाएंगी। लेकिन तो ऐसा ही हुआ, प्रशासन के मुखियों ने ये बात बताई। शायद सच ही होगा कि मस्जिद का अवैध निर्माण पहले ही तोड़ दिया गया था। लेकिन फिर भी इस तरह से मसल्क करने की क्यों जरूरत थी, किसी और से ऐसा नहीं कहा जा सकता।
 
मुझे लगता है कि इस देश में सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए, मस्जिद जैसी इमारतों का निर्माण और रखरखाव बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन जब यह बात आती है तो सरकारी अधिकारियों की भूमिका, तो वह अपने दबाव में आ जाते हैं और ऐसी निर्णय लेने लगते हैं जिनका परिणाम इमारतों को ढहाने की तरह सुनकर लग सकता है। तो यह सवाल उठता है कि क्या हमारी सरकार सांस्कृतिक विरासत को समझने में सक्षम है? और जब भी ऐसी समस्याएं उभरने लगती हैं, तो जल्दी से समाधान नहीं निकल पाते।
 
ये सच बोल दे, जो मजिसद निर्माण कर रहा था वो पहले से ही ढह चुका है। लेकिन क्या प्रशासन के मुखियों को पता है? ये तो बस झूठ बोलते हैं कि मस्जिद का निर्माण अवैध था। हमारे देश में ऐसी चीजें नहीं होती कि मजिसद का निर्माण कोई छोटा सा अपराध समझ ले।

मुझे लगना है कि यह पूरी कोशिश सरकार को दिखाने के लिए की जा रही है कि वे क्या कर सकते हैं। लेकिन इस बात पर मुझे संदेह है। क्या सचमुच मस्जिद का निर्माण पहले से ही ढह चुका था? या यह तो एक और राजनीतिक प्रयोग है? मुझे लगता है कि हमें सबकुछ ध्यान से देखना चाहिए।

ਮੈਂ ਇਸ ਪ੍ਰਕਾਰ ਹਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਵਾਲਾ ਬਨਦਾ ਹਾਂ - 💔
 
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