संडे जज्बात-लोग भैंस, बुलडोजर आंटी कहते थे: 30 की उम्र में 92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया

आभा, वजन बढ़ने के बाद उनकी कहानी की जो लोग पहले कहते थे कि आभा शुक्ला भैंस और मोटी हैं, उसी तरह से उन्होंने 92 किलोग्राम वजन कम कर लिया।
 
😂 बिल्कुल यह तो सुनकर हैरान हो गया आभा शुक्ला की जस्ती देखें। वह पहले तो हरकत में थोड़ी हिचकिचाहट की बात कर रही थी, लेकिन अब वजन कम करने की उनकी कहानी सुनकर लगता है कि वह एक मिसाल हैं। 92 किलोग्राम वजन कम करने की खासियत तो यह है कि वह अपने पूर्व जीवन की तस्वीरें देख रही थीं, इसलिए अब उनकी आंखों में बदलाव हुआ। मुझे लगता है कि ऐसी कहानियां लोगों को प्रेरित करती हैं और उन्हें स्वयं अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। आभा शुक्ला की यह कहानी मुझे बहुत प्यारी लग रही है।
 
आभा शुक्ला की कहानी तो हमें बहुत प्रेरित करती है 😊, जैसे देखिए उन्होंने वजन बढ़ने के बाद से खुद को बदल लिया है। पहले लोग उनकी तरह मोटी और भैंस की तरह देखते थे, लेकिन अब देखिए 92 किलोग्राम वजन कम कर लिया है! यह तो एक बहुत बड़ा प्रयास है और उन्हें बहुत बधाई देनी चाहिए। मुझे लगता है कि हमारे समाज में ऐसे कई लोग हैं जो खुद को बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी-कभी हम उनका समर्थन नहीं करते देखते हैं। आभा शुक्ला की कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर हम सही रास्ते पर चलेंगे तो हम अपने सपनों को भी पूरा कर सकते हैं। 🙏
 
આ ઘણી જ સંતोषाम છે! આભા શુક્લા બહુ ખૂબ પ્રોગ્રેસ કરી ને 92 કિલોમાંથી વધુ ઓછી થઈ જાય છે. તેઓ બહુ ભલે ખરેખર કમ આવ્યા છે, ને મને બધા પ્રેમીઓ તેમનો ઉદઘાટન કરવાનું આશા છે. જે લોકોએ પહેલાં તેમને 'ભીન' ગણ્યું હતું, આજે સરેરાશ પ્રતિભાવ છે.
 
मुझे लगा की यह तो सच नहीं हो सकता, 92 किलोग्राम से वजन कम करना बहुत ही आसान है, और अगर आभा शुक्ला ने ऐसा किया है तो वह बहुत ही मेहनती और साहसी होगी। लेकिन अगर वो सच नहीं कह रही है तो फिर यह तो एक बड़ा झूठ है। मुझे लगता है कि लोगों को अपने आप को नियंत्रित करने की क्षमता के बारे में ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए, और अगर वो ऐसा कर रहे हैं तो फिर उनकी कहानी को ध्यान से देखना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह सच है कि अभा, आभा शुक्ला ने अपना वजन बहुत कम कर लिया है, मगर मैं नहीं समझ पाया कि ये संभव था, मेरी बात तो वही है, शायद वजन कम करने का तरीका भी बदल गया है मुझे लगता है कि यह एक अच्छा सबक है कि हमें अपने शरीर को और खुद पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन फिर भी, मैं सोचता हूँ कि वजन कम करना बहुत आसान नहीं है, और यह भी तो एक अच्छी बात है कि वह अब पहले ऐसी बातें नहीं कह रही है।
 
अरे, ये तो ज्यादा बड़ी बात नहीं 🤔 आभा शुक्ला की कहानी जैसे ही, हर कोई अपने जीवन में बदलाव देखना चाहता है, खासकर वजन कम करने की। लेकिन क्या यह सच्चाई है? आभा शुक्ला ने खुद तो बताया है कि उन्होंने बहुत सी चोट लगी और फिर भी उन्हें वजन कम करना पड़ा। तो ये कैसे संभव था? 🤷‍♀️

ज़रूर, 92 किलोग्राम वजन कम करना एक बड़ी बात है, लेकिन यहाँ ज़रूरत है कि हम उनकी पूरी कहानी समझें और उनकी मेहनत को भी समझें। सिर्फ वजन कम करने पर ध्यान देना चाहिए तो अच्छा नहीं होगा।
 
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