संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी: सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता

मेरी जिंदगी एक ऐसी कहानी है जो हर किसी को पसंद आएगी। मैं 18 साल की उम्र में पुलिस के हवालत में था, जब उन्होंने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बनाया। मेरे पिताजी बड़ी मुश्किल से खेती करके परिवार का खर्च चलाते थे।

12 अक्टूबर 2011 की वह स्याह रात आज भी मेरे जेहन में दर्ज है। उस वक्त मेरी उम्र 18 साल दो महीने थी। पिताजी ने मुझे जरूरी काम से बहन के घर शामली भेजा। उसी रात, बहन के गांव से करीब सात किलोमीटर दूर एक वारदात हुई। कुछ अपराधियों ने दो पुलिसकर्मियों पर हमला कर उनकी राइफल छीन ली। मुठभेड़ में एक सिपाही की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।

पुलिस ने शक के आधार पर करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया। उनमें मेरे पिताजी भी शामिल थे। पिताजी की गिरफ्तारी के बाद हमारे गांव में दहशत फैल गई। मेरी मां बुरी तरह घबरा गईं।

दादी के मायके सरुरपुर भेज दिया। वहां एक शख्स आया और बोला- तुम्हें टीका लगेगा। मैंने पूछा- क्या आप डॉक्टर हैं? उसने कहा- नहीं, मैं कैदी हूं, लेकिन यह काम मुझे आता है। उसकी बात सुनकर मैं घबरा गया।

कुछ समय बाद मुझे अस्पताल से डिस्चार्ज कर एक बैरक में भेज दिया। वहां एक पंडित जी थे। उनसे दोस्ती हो गई। लंगड़ाते देख उन्होंने पूरी बात पूछी। मैंने सब बता दिया।

जेल में 15 दिन हो चुके थे। एक दिन पिताजी का नाम पुकारा गया। मैं खुश हो गया। वे मुझसे मिलने आए थे। उस दिन हम दोनों एक-दूसरे को बस निहारते रह गए।

उस दिन पंडित जी ने कहा था- ध्यान रखना, पिताजी तुम्हारी खून से सनी पैंट न देख पाएं, नहीं तो बहुत दुखी होंगे। मैंने छिपाने की कोशिश भी की, लेकिन बातचीत के दौरान उनकी नजर पैंट पर पड़ गई। वे फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें जैसे-तैसे चुप कराया।

जेल में 3 साल बित गए। वहां एक वकील से मेरी बात बनी। तब इलाहाबाद हाईकोर्ट में मेरी जमानत अर्जी दी गई।

7 फरवरी 2014 को मुझे जेल से रिहा हुआ। जेल से बाहर आते ही पिताजी के साथ घर गया। उस दिन मां ने पसंदीदा मटर-पुलाव बनाया था।

मेरी असली लड़ाई शुरू हुई। अदालत में खुद अपनी पैरवी करने की अर्जी दी, जिसे स्वीकार कर लिया। अदालत के सामने मैंने पहला अहम सबूत रखा- जिस घटना में एक पुलिसकर्मी घायल हुआ था, उसने अपने बयान में साफ कहा था कि मैं उस वारदात में शामिल नहीं था।

इसके बाद मैंने दूसरा महत्वपूर्ण फैक्ट सामने रखा। घटना 12 अक्टूबर की थी, जबकि मेरी गिरफ्तारी 24 अक्टूबर को हुई। जबकि, घायल पुलिसकर्मी से जांच अधिकारी ने पूछताछ 12 नवंबर को।

मेरा सवाल सीधा था- घायल पुलिसकर्मी का बयान लिए बिना मुझे कैसे गिरफ्तार कर लिया? इतना ही नहीं, पुलिस ने कागजों में मेरी गिरफ्तारी 3 नवंबर को एक फर्जी मुठभेड़ के तौर पर दर्ज की, जबकि मैं 24 अक्टूबर से ही पुलिस हिरासत में था। यही फैक्ट अदालत में साबित करने में सफल रहा।

आखिरकार, 27 सितंबर 2023 को अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी कर दिया।
 
ਮੇਰੀ ਜਿੰਦਗੀ ਬਹੁਤ ਹੀ ਕੁਝ ਨਾਲ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਹੈ। ਉਸ ਰਾਤ ਜਿਵੇਂ ਮੈਨੂੰ 100 ਭੱਡੀਆਂ ਫੜਕਣ ਦੀ ਗੱਲ ਸੁਣਾਈ, ਉਹ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਮੇਰੀ ਜਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਬਣ ਗਈ। ਅਸੀਂ ਕਹਿੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਪਿਛਲੇ 100 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ, ਮੈਨੂੰ ਅੱਗੇ ਥਰ ਦੀ ਤੁਰ ਹੋਣ ਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਬੀਤੀ।
 
मैं इस लड़ाई की जीतना थोड़ा अजीब लग रहा है... तो पुलिसने चार दिन पहले गिरफ्तार किया, फिर जेल में 3 साल बिताने दिए, लेकिन बातचीत में एक पंडित जी ने खुद ही मेरी पैंट पर नजर रखी, और अब यह सब बाइज्जत बरी हो गई...
 
👮‍♂️ "अपराध का दमन तानाशाही नहीं है, लेकिन तालिबनवादी है।" - नवीन चंद्रवर्त 💔

जेल से रिहा होने पर आपको पता चला कि अदालत ने आपको बाइज्जत बरी कर दिया। यह एक बहुत बड़ी जीत है और एक सबक भी। इस मामले में पुलिस ने आपको गिरफ्तार करने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया, लेकिन अदालत ने इसे ठीक से समझा और न्याय दिलाने में सफल रही।
 
मैंने पढ़ा है और भी जाना चाहता था कि जेल में वह पंडित जी कैसे आपकी मदद करते थे। उनकी दयालुता और समझदारी वाकई अद्भुत है। मुझे लगता है कि आप जेल से निकलने के बाद बहुत सक्रिय रहे, अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और मैं आपको बधाई देता हूँ। 🎉
 
मैंने इस कहानी को सुना और बिल्कुल भी नहीं समझा कि पुलिस कैसे एक 18 साल के लड़के पर हत्या का आरोप लगा सकती है। यह तो बहुत भयानक है कि पिताजी ने खेती करके परिवार का खर्च चलाया और फिर भी माता-पिता को जेल जाना पड़ा। लेकिन फिर भी, लड़के ने अपनी गिरफ्तारी का सबूत दिया और अदालत ने उसे बाइज्जत बरी कर दिया।

मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मामला है जिसमें पुलिस ने गलती से लड़के को आरोपी बनाया था। लेकिन शायद इस मामले में भी ऐसा हुआ होगा, तभी लड़के की गिरफ्तारी और बाद में अदालत की फैसले का कोई लॉजिक नहीं होता।

मैं आशा करता हूं कि यह मामला एक सीख के रूप में चलेगा और ऐसे भविष्य को निर्माण करने की प्रयास करेंगे जहां दोषियों को सजा मिले लेकिन गलत आरोप लगाने वालों को भी सजा मिले।
 
🙌 मैंने देखा है कि पुलिस ने अपनी गड़बड़ी का अंदाज़ा लगाया था। 12 अक्टूबर को घायल पुलिसकर्मी से जांच अधिकारी ने पूछताछ करने में इतनी देर ली और फिर भी वे बिल्कुल सही नहीं कह सकते। यह साबित है कि पुलिस ने बहुत ही तेजी से मुझे गिरफ्तार कर लिया था। 🕰️ 3 नवंबर को मेरी गिरफ्तारी एक फर्जी मुठभेड़ के तौर पर दर्ज की गई, जबकि मैं 24 अक्टूबर से ही पुलिस हिरासत में था! यह बहुत बड़ा अंतर है। 🤦‍♂️
 
मैंने पढ़ा है इस लड़के की जिंदगी कहानी, जिसने 15 साल तक अपनी अनावश्यक गिरफ्तारी को साबित करने का प्रयास किया। मुझे लगता है कि उसकी बात समझ में नहीं आती है। अगर वह इतनी गलती करता था, तो फिर 15 साल तक अदालत में खड़ा रहने का क्या मतलब? 🤔

मुझे लगता है कि यह लड़का अपने पिताजी और परिवार के लिए एक सच्चा बलिदान है, जिन्होंने उसकी गिरफ्तारी में उसकी मदद की। यह लड़का अदालत में अपनी निरपेक्षता और साहस को दिखाने वाला है। मुझे लगता है कि इसकी कहानी सभी को प्रेरित करेगी, खासकर उन लोगों को जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। 🙌
 
मैंने देखा है कि यह लड़का बहुत ही अच्छा लड़ाई लड़ रहा था। वह तो अपने पिताजी और परिवार के लिए बहुत समर्थ बन गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके पास बहुत मुश्किलें आ गईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वह जेल से भी बहुत अच्छा लड़ाई लड़ रहा था, और अंततः अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया।

मुझे लगता है कि यह लड़का बहुत ही मजबूत आत्मविश्वास वाला है, और वह अपने पिताजी और परिवार को कभी नहीं छोड़ता। उनकी कहानी बहुत प्रेरणादायक है, और मुझे लगता है कि यह लड़का हमेशा आगे बढ़कर चीजें सुधारने की कोशिश करेगा।

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पोस्ट में शामिल घटनाओं को पढ़ने पर आपको यह महसूस होना चाहिए कि लड़का कैसे अपने पिताजी और परिवार के लिए बहुत समर्थ बन गया, और वह जेल से भी अच्छी तरह से लड़ाई लड़ रहा था।
 
मैंने पढ़ा है यह लड़का 18 साल की उम्र में जेल में था, लेकिन वाह, वह तो सच्ची जिंदगी की कहानी है। सबसे पहले मुझे लगा कि यह लड़का पुलिस की हवालत में फंस गया है, लेकिन फिर पढ़ा और देखा कि उसका सब कुछ गलत था, वह साल 2011 में जेल में था और 2023 तक अदालत में लड़ रहा था। यह लड़के की निशानी है कि हमारे पास भारतीय न्यायपालिका में सच्चाई को खोजने की ताकत है। 🙏
 
यार तुम्हारी कहानी बहुत ही रोमांचक है 🤯! लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम सब तुम्हारी बात मानें। पुलिस और अदालत का काम भी कुछ सीमित होता है, क्या? तुम्हारे दादा ने तो बताया था कि उस दिन तुम्हें टीका लगवाने के लिए किसी और की मदद लेनी पड़ी, जो एक साधारण व्यक्ति नहीं होता। और फिर भी, तुमने अपनी खुद की बातबाजी की। शायद यह सब तुम्हारा पहला अनुभव था, या फिर तुम्हें लगता था कि तुम्हारी बात सुनी जाएगी। लेकिन अदालत में सबूतों के आधार पर निर्णय लिया गया। अब तो तुम्हारी खाली है और तुम्हारे पिताजी भी दुखी नहीं हैं। अच्छा हुआ!
 
🤕 ये सुनकर मेरा दिल दर्द होता है जिंदगी कितनी भटकाव भरी हो सकती है। पुलिस और अदालत की गलती से इतनी लंबी और दर्दनाक जिंदगी बिताने का सही मौका दिया। मुझे यकीन नहीं है कि मेरे जीवन में कितनी मुश्किलें आ चुकी हैं अगर उस दिन पुलिस ने सोचा होता तो कि वे मेरे खिलाफ आरोप नहीं लगाएंगे। अब जब बाइज्जत मुझे बरी कर दी गई है, तो मुझे लगता है कि समय और सच्चाई हमेशा जीतते हैं 🙏
 
😮👮‍♂️ Wow! 😲 इस जिंदगी की कहानी बहुत ही रोमांचक लग रही है। यह देखकर लगता है कि पुलिस ने गलत सोच ली थी। 3 साल तक जेल में रहने के बाद अदालत ने भी सही किया। यह एक बड़ा सवाल है कि पुलिस कैसे ऐसा गलत फैसला लेती है? और इस घटना में शामिल होने के बाद मेरी गिरफ्तारी को क्यों तेजी से किया गया? 🤔
 
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