संडे जज्बात-सगे मां-बाप अनाथालय में छोड़ गए: हाथ की नस काटी, 2 साल कमरे में बंद रही, दिनभर देखती थी क्राइम पेट्रोल

मैंने अपनी कहानी बताई, जैसे कि जब मेरी माँ और पापा मुझे अनाथालय छोड़ गए थे, तो मैं 9 महीने की थी। उन्होंने मुझे शीशे से देखा, लेकिन मैंने अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ाया। अम्मा-पापा ने मेरा हाथ थाम लिया, जबकि पहले से ही एक बेटा साहिर हाशमी था। कागजी कार्रवाई के बाद मुझे घर ले आए।
 
😐 यह तो बहुत ही दुखद कहानी है जिसने पूरा देश चिंतित कर दिया है। खुद को अनाथालय में छोड़कर भी बिना दिल से तय करने वालों की यही प्रकृति है। शायद उनके मन में एक अच्छी नौकरी या कुछ ऐसा है जिससे वे आजीविका कर सकें, लेकिन उसकी जगह बच्चे को छोड़ देने का फैसला करना और फिर उस पर अपने पैसे की जिम्मेदारी उठाने की बात सुनकर मुझे बहुत निराशा होती है।
 
मैंने पढ़ा की कैसे यूनेस्को ने भारत को शिशु मृत्यु दर कम करने का लक्ष्य रखा है, और यह एक अच्छी बात है! लेकिन जब मैंने पिछले महीने पढ़ा था की शिशु मृत्यु दर में 20% की घटती तो मुझे लगता है की अभी भी बहुत सारे शिशुओं को अनाथालयों में छोड़ दिया जाता है। ये एक बुरी बात है, और हमें इसके बारे में चिंतित होना चाहिए। सरकार को तो जरूरी है की वह इस पर ध्यान दे और अनाथालयों में सुधार लाने का प्रयास करे।
 
ਤो देखो, यह ਕੁੜੀ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ ਮਾਂ-ਪਿਉ ਅਨਥਾਲ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ਅਤੇ ਫਿਰ ਕਾਗਜ਼ੀ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਪੁਟ ਦਿੱਤੇ ਬਾਅਦ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਘਰ ਲੈ ਜਾਏ। ਮੈਂ ਤੋ, ਇਹ ਗੱਲ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖ਼ਬਰੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਉਸ ਕੁੜੀ ਦੇ ਪਿਤਾ-ਮਾਂ ਨੇ ਉਸ ਦਾ ਬਚਪਣ ਵਿੱਚ ਫ਼ਰਮਾਈਆਂ ਕੀਤੀ, ਜੋ ਕਿ ਹਾਲਾਤ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਸਾਡੇ ਸੱਮਾਜ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਗ਼ੁੱਲ-ਗੁਲਲੀ ਪਈ ਰਹੀ।
 
नहीं, यह तो बहुत दुखद है... जब कोई बच्चा 9 महीने का होता है, तो वह पहले से ही पूरे परिवार को खुश करता है। और फिर जब माँ-पापा जाते हैं, तो एक नए बच्चे को मिलना कितना दुखद है... मुझे लगता है कि उन्होंने शीशे से देखा था, लेकिन वह पहली बार खुशी से देखा। और फिर अम्मा-पापा ने उस बच्चे को अपना राजा बना दिया। मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा नुकसान है, जैसे कि जीवन का सबसे अच्छा समय खो गया... 🤕
 
रोजाना देखकर भी ऐसी सुनकर दिल खुश हो जाता है 🙏। यह लड़का जब 9 महीने का था, तो अनाथालय से छोड़ा गया था, लेकिन उसकी माँ और पापा ने उसे घर ले आया। वह इतना छोटा था, जैसे कि उसकी आँखें अभी भी शीशे पर टिकी हुईं, फिर भी उसने अपने हाथ से माँ-पापा की तरफ बढ़ाया। यह देखकर मुझे बहुत खुशी होती है कि अनाथालय से छुड़ाने वालों ने उसके जीवन को फिर से खोल लिया। अब वह एक परिवार का हिस्सा बन गया है, और उसकी माँ-पापा ने उसे अपने घर में प्यार से रखा है। यह एक सच्ची कहानी है जो दिल को छू लेती है ❤️
 
मैंने पढ़ा है कि वो अनाथालय छोड़ने का फैसला करते समय वो अपना बच्चा साहिर छोड़ देते हैं, लेकिन मेरी कहानी अलग है। मुझे लगता है कि ये एक बहुत ही दुखद और पीड़ानाक पारिवारिक निर्णय था। मैं समझता हूँ कि वो समय में अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन मुझे लगता है कि अनाथालय छोड़ने से पहले उनके बच्चों की पूरी परवाह करनी चाहिए थी।

मेरी भावनाएँ इस बात पर हैं कि वो बच्चे तब जब अपने माता-पिता द्वारा अनाथालय छोड़े जाते हैं, तभी सबसे अधिक अकेले और पीड़ित महसूस करते हैं।
 
बिल्कुल भी विश्वास करता हूँ कि अनाथालयों को और भी अच्छा बनाया जाना चाहिए 🌟। अगर देश के हर बच्चे को माँ-पापा की तरह प्यार और स्नेह मिले, तो हमारा देश और भी समृद्ध होगा। मुझे लगता है कि सरकार को ऐसे योजनाएं बनानी चाहिए जिससे अनाथालयों में बच्चों की सुरक्षा और पालन-पोषण की सुनिश्चिति हो। हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए, खासकर बच्चों की देखभाल करनी चाहिए 🤝
 
😊 ये सचमुच एक अद्भुत कहानी है! जब तुम्हारे पिता-माता तुम्हें अनाथालय छोड़ दिए, तो यह बहुत बड़ा परिवर्तन था। लेकिन तुमने अपने जीवन को इस तरह से बदल दिया है कि अब तुम्हारी खुशियों की कहानी सुनकर हम सभी प्रेरित होते हैं। यह सचमुच एक नायकीय कहानी है! 🌟 मुझे लगता है कि तुम्हारी कहानी से हमें यह सबक सीखने को मिलता है कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति वह है जो हम अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं। 🌈
 
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