स्कैन कर बांग्लादेशी बताने वाली मशीन का सच क्या: SHO बोले- मजाक था, लोगों ने कहा- बिहार से हैं, पुलिस बार-बार कागज मांग रही

कौशाम्बी थाना की इस घटना में 52 साल के मोहम्मद कैसर आलम को पुलिस ने बांग्लादेशी बताकर पूछताछ की, लेकिन बाद में उनकी बात हुई कि वे बिहारी हैं।
 
यह घटना बहुत दुखद है 🤕, पुलिस से पूछताछ करते समय मुस्लिम को पहले बांग्लादेशी बताकर और फिर बिहारी कहकर उनकी पहचान तय करना एक बड़ा भ्रष्टाचार है। यहाँ पर क्या थोड़े चिंतित लोगों का दिल खुश करेंगे? 🙄

हमारे देश में हमेशा से अलग-अलग धर्म और जाति वाले लोग एक-दूसरे के साथ अच्छाई से बातें करते हुए रहते आ रहे हैं। लेकिन आजकल ऐसी घटनाएँ हो रही हैं जहाँ लोग अपने आप को दूसरों की पहचान पर आधा देखते हुए अलग कर रहे हैं। यह हमारे समाज के लिए बहुत हानिकारक है। 🚫

हमें ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और अपने अधिकारों को बचाने के लिए संघर्ष करना चाहिए। हमें एक दूसरे के प्रति सहानुभूति और समझ वाले समाज का निर्माण करना चाहिए। 🌈
 
अगर 52 साल का मोहम्मद कैसर आलम ने अपने दोस्तों या परिवार के किसी से कहा होगा कि वे बांग्लादेशी तो उन्हें कोई प्रश्न नहीं पता होगा। लेकिन पुलिस के सामने मिलकर उन्होंने बताया कि वे बिहारी हैं और उनके पास भी यह जानकारी है। तो फिर इतनी बड़ी गलती कैसे हुई? ना तो पुलिस को पता था, ना तो कोई अन्य को।
 
क्या हुआ था, यह तो बहुत दुखद है 🤕। कैसे ऐसा हो सकता है, एक व्यक्ति को गलत पहचान कर पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन बाद में उनकी खोज में पता चल गया कि वे बिहारी हैं! यह तो बहुत बड़ा डरावना है। क्या इतनी गलतियां हो सकती हैं कि एक व्यक्ति को अपने खुद के गृह क्षेत्र से दूर ले जाया जाता है और उसका परिवार भी इसके लिए पीड़ित होता है? यह तो बहुत बड़ी दुर्भावना है।
 
मुझे ये घटना बहुत दुखद लगी 🤕। तो वाह, पुलिस ने पहले तो उन्हें बांग्लादेशी बताया, लेकिन फिर सोचकर बिहारी बता दिया। यह तो एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि दोस्तों को लगता है कि वो बंगाल से आ गए हैं, लेकिन कुछ और भी जानने की जरूरत है। मुझे लगता है कि पुलिस को थोड़ा अधिक शिक्षित करने की जरूरत है, ताकि वे ऐसे मामलों में सावधानी बरत सकें।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ी गड़बड़ी है! पुलिस ने उनका राष्ट्रीयता पूछकर पहले से ही मामला खोल दिया था, फिर बाद में वो कह देते कि वे बिहारी हैं... यह तो बहुत अजीब है! कैसे इतनी गलतफहमी? 🤔

मुझे लगता है कि सरकार को अपने अधिकारियों को फिर से ट्रेनिंग देनी चाहिए, और उन्हें हमेशा सच्ची जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए। इससे हमारे देश में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है। 🙏

और सबसे बड़ी बात, यह घटना निकलने से पहले तो मैं सोचता था कि यह एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा। लेकिन लगता है कि हमारे देश में ऐसी चीजें होती रहती हैं, और हमें उनसे निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। 💪
 
भाई, यह तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है 🤯। मुझे लगता है कि पुलिस ने शायद गलती से पहचान दी, या फिर थोड़ी भ्रष्टाचार हुई। 52 साल के बापू आलम जी को बांग्लादेशी बताकर पूछताछ करना तो बहुत ही शर्मनाक है। क्या नहीं पता थे उनकी पहचान, उनके परिवार के बारे, उनकी कहानी? 🤔

मुझे लगता है कि इस देश में हमें अपने लोगों की सुरक्षा और सम्मान को सबसे पहले समझना चाहिए। पुलिस और सरकार को हमारे नागरिकों के बारे में जानने की जरूरत है, उनकी समस्याओं को समझने की जरूरत है। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है और हमें इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। 👮‍♂️
 
क्या ऐसा लगता है की इंसान की पहचान कभी भी सिर्फ नाम से नहीं होती... 🤔 पुलिस की तो कुछ गलत ही, जैसे ही वो दिखाई दिए और उनकी बात मिली, तो उन्हें बिहारी बताकर चालू कर दिया... लेकिन क्या सोचा था कि यह एक पुराना नाम है, जिसमें कोई पहचान नहीं है। और वे 52 साल के हैं... यार, उम्र से भी ऐसा पता चलता है की तो उनकी पहचान बिल्कुल सही नहीं हुई।
 
यह तो बहुत दुर्भाग्य की बात है 🤕। ये जैसे हमारे शिक्षा सिस्टम और पुलिसी तंत्र में फिसलावट आ गई है। पहले तो उन्हें बांग्लादेशी बताया, लेकिन फिर वे बिहारी होने का दावा करते हैं... यह तो बहुत भ्रमपूर्ण है। शायद उनके पास पहचान पत्र या कोई सबूत नहीं था जिससे उन्हें उनकी पहचान साबित हो सके।

मुझे लगता है कि हमारे देश में शिक्षा और नागरिकता के बारे में लोगों को पता नहीं है। पहले तो मैंने सोचा था कि यह एक छोटी घटना है, लेकिन जब मैंने और पढ़ा... तो समझ गया कि यह हमारे देश की गहरी समस्याओं का हिस्सा है। हमें अपने शिक्षा सिस्टम को बेहतर बनाने और लोगों को पहचान पत्र देने की जरूरत है ताकि जैसे ही कोई भी पुलिस में जाता है उसकी पहचान साबित हो सके।
 
यह तो बहुत बड़ा संकट है! ऐसा लगता है कि पुलिस ने गंभीरता से समझने की कोशिश नहीं की। बांग्लादेशी बताकर उन्हें पूछताछ करना क्यों? यह तो एक बड़ा मूर्खतापूर्ण फैसला है और हमारे देश की छवि को भी खराब कर रहा है। कौशाम्बी थाना की घटना को लेकर इतनी जांच नहीं की गई। मुझे लगता है कि पुलिस ने तो अपने आप से गलती कह दी होगी। बिहार के लोग भारतीय हैं और हमें यह नहीं माना जा सकता।
 
ये तो सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका और पुलिस की गड़बड़ी का एक और उदाहरण है। कैसे पुलिस ने पहले बांग्लादेशी बताकर उसे पूछताछ की, और फिर बातें हुईं, यह तो समझना मुश्किल है कि उनके मन में क्या विचार थे।

लेकिन जैसे ही सच्चाई निकली, तो यह साबित हुआ कि पुलिस और जांच एजेंसियों को अपने काम में खुद को जागरूक रखना चाहिए। देश के लोगों को भी इस तरह की घटनाओं की सख्त निंदा करनी चाहिए, ताकि ऐसी गड़बड़ी न हो।
 
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