सोनिया बोलीं- सरकार नेहरू को इतिहास से मिटाना चाहती है: उन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा; बीजेपी बोली- अनुच्छेद 370 नेहरू की गलती

सोनिया गांधी ने दिल्ली स्थित जवाहर भवन में नेहरू सेंटर इंडिया के लॉन्च समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ बयानबाजी को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की।

सोनिया गांधी ने कहा- इसमें कोई शक नहीं है कि जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना आज की सत्ता का मुख्य मकसद है। वह उन्हें (नेहरू को) सिर्फ इतिहास से मिटाना नहीं चाहती, बल्कि उनकी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक आधारों भी को कमजोर करना चाहती है, जिन पर देश खड़ा हुआ।

सोनिया ने कहा- इतने बड़े व्यक्तित्व (नेहरू) के जीवन और काम का एनालिसिस और समीक्षा होना स्वाभाविक है और ऐसा होना चाहिए भी। लेकिन उन्हें बदनाम करने, कमजोर दिखाने और उनकी बातें तोड़ने-मरोड़ने की संगठित कोशिश अस्वीकार्य है।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा- नेहरू का व्यक्तित्व छोटा करने की कोशिश जारी है। उनका ऐतिहासिक बैकग्राउंड अलग रखकर उनके काम का आकलन करना अब आम होता जा रहा है। उनकी बहुमुखी विरासत खत्म करके दोबारा इतिहास लिखने की कोशिश हो रही है।

इसके बाद बीजेपी ने भी पलटवार किया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 नेहरू लाए लेकिन वो इसे आगे संशोधित नहीं कर पाए। मगर पीएम मोदी की सरकार ने इसे संशोधित किया।

उन्होंने आगे कहा कि सोनिया गांधी नेहरू की लेगेसी की बात करती हैं तो ये किस तरह की लेगेसी है। हिंदी चीनी भाई भाई का नारा नेहरू ने दिया था लेकिन नेहरू ने UN सिक्योरिटी काउंसिल की सीट चीन को दी थी।
 
मुझे लगता है कि पूरे मामले में कुछ ऐसा चल रहा है जिसे लोग समझ नहीं पा रहे हैं। तो सोनिया गांधी और भाजपा सरकार दोनों एक ही बात कहने की कोशिश कर रहे हैं कि नेहरू को बदनाम करना जरूरी है। लेकिन मुझे लगता है कि यह जंग का बहुत बड़ा हिस्सा है। नेहरू को कमजोर करने की कोशिश तो एक तरफ, दूसरी तरफ उनकी विरासत को नकारने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह सब थोड़ा जटिल है और कुछ ऐसा नहीं है जिस पर हम आसानी से समझ सकें।
 
नहीं तो यह वाह! यह बातबाजी बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है 🤯। जवाहरलाल नेहरू एक महान नेता थे जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी विरासत को कमजोर करने की कोशिश करना न केवल अनुचित है, बल्कि इतिहास के खिलाफ भी है। 🚫

आज के समय में हमें अपने देश की स्वतंत्रता और समृद्धि को बनाए रखने के लिए अपने महान नेताओं की विरासत को समझना और सम्मान करना चाहिए। नेहरू जी की बहुमुखी विरासत और उनके द्वारा किए गए योगदान को स्वीकार करना हमें अपने देश को आगे बढ़ने में मदद करेगा। 💪

यह भी दिलचस्प है कि बीजेपी नेताओं ने नेहरू की लेगेसी पर हमला करने के अलावा उनके ऐतिहासिक बैकग्राउंड को भी जोरदार तरीके से उठाया है। लेकिन इससे हमें लगता है कि वे नेहरू जी की विरासत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे अपने सरकार को समर्थन देने वालों को खिलवाड़ कर सकें। 🤥
 
नेहरू जी की विरासत को कमजोर करने की कोशिश सोनिया गांधी की बात है तो ठीक है, लेकिन उन्हें यह भी समझना चाहिए कि उनके खिलाफ बयानबाजी की जाए तो उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि वो गलत थे। इसके बाद उन्हें अपने देश को दोबारा बनाने की सोच लेनी चाहिए न कि फिर से उसी पथ पर चलना। और इतना तो समझ में आता है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को संशोधित करना एक अच्छा फैसला था, लेकिन इसके पीछे कुछ ठीक-असली वजहें नहीं हैं। 🤔
 
😂 भाई, मैंने तो पढ़ा है कि सोनिया गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ बयानबाजी को लेकर आलोचना की, लेकिन भाई हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि देश में इतिहास को बदनाम करने से बहुत बड़ा गलत होता है। 🙅‍♂️ और पूरा सवाल यह है कि नेहरू जी की विरासत को कमजोर करने की कोशिश क्यों? भाई, इतिहास को बदनाम करने से हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी खतरा होता है। 💔
 
सोनिया जी को लगता है कि जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना सत्ता का मकसद है? यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤦‍♂️। हमें इतिहास और सच्चाई की ओर बढ़ने की जरूरत है, न कि व्यक्तित्व को कमजोर करने की। सोनिया जी ने बिल्कुल सही कहा है कि एनालिसिस और समीक्षा करना स्वाभाविक है, लेकिन बदनाम करने की कोशिश अस्वीकार्य है। हमें नेहरू की बहुमुखी विरासत को पहचानने की जरूरत है और उसका आकलन करना चाहिए। 📚👏
 
मुझे लगता है कि यह एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन शायद नहीं... 😕 मेरा मतलब तो यह है कि नेहरू जी की विरासत पर ऐसे बयानबाजी करना उचित नहीं है। लेकिन दूसरी ओर, अगर उनकी विरासत को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह एक बड़ा खतरा है... 🚨 और फिर से, मेरा मतलब यह है कि यह खतरा नहीं है। 😐
 
🙄 यह तो बात है ही कि भाजपा सरकार खुद को इतिहास के सबसे बड़े विरोधियों में से एक बनाने की कोशिश कर रही है। 😂 सोनिया गांधी ने जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ बयानबाजी को लेकर आलोचना की, लेकिन क्या यही सच्चाई है? 🤔

नेहरू जी की विरासत तो बहुत ही समृद्ध और विविध है, लेकिन लगता है कि भाजपा सरकार खुद को उसके ऐतिहासिक पृष्ठ पर मिटाने की कोशिश कर रही है। 😒

और यह बात तो सच है कि नेहरू जी का व्यक्तित्व छोटा करने की कोशिश जारी है, लेकिन देश के लोगों को यह नहीं समझने देना चाहिए। 🙅‍♂️

क्या हमें इतिहास को बदलने की जरूरत है? 🤔 मुझे लगता है कि नहीं। हमें इसके साथ सहज होना चाहिए और इसका आनंद लेना चाहिए। 😊
 
🤦‍♂️ यह तो बहुत ही अजीब बात है कि जवाहरलाल नेहरू की पीढ़ी के लोग अब उसकी विरासत पर हमला कर रहे हैं। उनकी बहुमुखी विरासत क्यों कमजोर करना चाहते हैं? और इतने बड़े व्यक्तित्व को बदनाम करने की कोशिश करते समय, वे अपनी सरकार की बारीकियों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। 🙄
 
मुझे लगता है कि तो यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है। लेकिन फिर भी, जब हम इतिहास को देखते हैं तो यह बहुत ही जटिल होता है। जवाहरलाल नेहरू एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में पेश आते हैं जिनके खिलाफ बयानबाजी करना आसान नहीं है। लेकिन फिर भी, हमें उनकी बात सुननी चाहिए और उनके काम को समझना चाहिए। और फिर, यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब देश में ऐसे समय हैं जब लोग एक-दूसरे को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। 😔

और जो बात हुई कि सोनिया गांधी नेहरू की लेगेसी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, तो यह बहुत ही चिंताजनक है। हमें अपने इतिहास को समझना चाहिए और उसे सुधारना चाहिए, न कि उसको बदनाम करने की। हमें देश के प्रत्येक व्यक्तित्व को सम्मान देना चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए। 💡

कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बात तो बहुत ही जटिल है। लेकिन फिर भी, यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम इसे समझने की कोशिश करें। और यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएम मोदी ने इसका संशोधन किया। 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास को समझने की कोशिश करनी चाहिए और उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन फिर भी, यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हम एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाएं और उनकी बात सुनें। ❤️
 
मुझे लगता है कि यह पूरा मामला बहुत जटिल है 🤔। तो नहीं सोनिया गांधी नेहरू के खिलाफ बयानबाजी करना सही है? 🙅‍♀️ लेकिन फिर भी, उनकी बातों में वास्तविकता नहीं है। और फिर, क्या तो एनएचआई के लॉन्च समारोह का नाम सोनिया गांधी पर लगाना उचित था? 🤔। मुझे लगता है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रखते हैं, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि देश को फिर से नेहरू या गांधी पर भरोसा करना चाहिए या नहीं? 🤷‍♂️

और फिर, क्या हमें पलटवार करने में रुचि रखना चाहिए? 🤔 यह तो सिर्फ एक तरीका है निंदा करने का। मुझे लगता है कि हमें यह सोचना चाहिए कि नेहरू या गांधी की लेगेसी क्या है, और कैसे हम उनकी याद में एक नई दिशा बना सकते हैं। 🌟

लेकिन, फिर भी, मुझे लगता है कि यह सब बहुत जटिल हो गया है। मैं तो बस एक बात कहूंगा, और वह है कि हमें अपनी राय रखनी चाहिए, लेकिन साथ ही वास्तविकता को भी समझने की जरूरत है। 🤔
 
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