सीट ब्लॉकिंग स्कैम में ED की बड़ी कार्रवाई, BMS एजुकेशनल ट्रस्ट की 19 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच

बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम: ईडी ने 19 करोड़ की संपत्ति अटैच की, BMS एजुकेशनल ट्रस्ट पर हाथों फसले

ईडी ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले से जुड़े सीट ब्लॉकिंग स्कैम मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने BMS एजुकेशनल ट्रस्ट से जुड़ी 3 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, जिसकी कुल बाजार कीमत करीब 19.46 करोड़ बताई गई है.

बेंगलुरु थानों में शिकायत पर हुई यह कार्रवाई ED ने इस मामले की जांच बेंगलुरु के मल्लेश्वरम और हनुमंतनगर पुलिस थानों में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. आरोप है कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) के जरिए इंजीनियरिंग सीटों में दाखिले के दौरान तय फीस से कहीं ज्यादा नकद रकम वसूली जा रही थी, जिसे ही सीट ब्लॉकिंग स्कैम कहा जा रहा है.

जांच में सामने आया है कि BMS एजुकेशनल ट्रस्ट के नियंत्रण वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें कॉलेज मैनेजमेंट द्वारा दलालों और एजेंटों के जरिए बेची जा रही थी. ED ने मई-जून 2025 में कई जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें 1.86 करोड़ नकद जब्त किया गया था.

करीब 20.20 करोड़ की बेहिसाबी नकदी वसूली से जुड़े सबूत मिले. ED ने डायरी नोटिंग, व्हाट्सएप चैट्स और दस्तावेज बरामद किए गए. एजेंसी का कहना है कि इन सबूतों की पुष्टि कॉलेज स्टाफ, मैनेजमेंट और एजेंटों ने भी की है.

जांच में यह भी सामने आया है कि इंजीनियरिंग सीटों की बिक्री से जो काला धन इकट्ठा हुआ, उसका इस्तेमाल BMS एजुकेशनल ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने अपने निजी फायदे के लिए किया. ED के मुताबिक मामले की जांच अभी भी जारी है.
 
बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम का यह मामला बहुत बड़ा हुआ है.. इसके पीछे कुछ ऐसा हुआ था जो हम सभी को शिकायत पर हुआ है। ED ने अचल संपत्तियों को अटैच किया है, जो बेमुश्किल हुआ होगा। लेकिन अगर इसके पीछे कुछ गड़बड़ी थी, तो यह अच्छी थी कि ED ने इसकी जांच शुरू की।

जानिए, क्या हुआ था बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम में? इसके पीछे एक बड़ा आरोप था कि इंजीनियरिंग सीटों में दाखिले के लिए फीस ज्यादा वसूली जा रही थी। यह तो न केवल गलत है, बल्कि इससे छात्रों को भारी बोझ उठाना पड़ा। इसके अलावा, इस स्कैम में ऐसे दलाल और एजेंट शामिल थे, जिन्होंने सीटें बेचकर काला धन इकट्ठा किया था।

ED ने इससे जुड़ी 19 करोड़ की संपत्ति अटैच कर दी है। इसके अलावा, ED ने कई जगहों पर छापेमारी की और 1.86 करोड़ नकद जब्त किया है। यह सबूत तो बहुत मजबूत हैं। इस मामले की जांच अभी भी जारी है, लेकिन अगर सच्चाई सामने आती है, तो इसके परिणामस्वरूप न्याय होना चाहिए।
 
क्या ईडी सिर्फ सीट ब्लॉकिंग स्कैम को ही पकड़ रही थी, या फिर यह बड़ा खेल देखकर थक गई? 1.86 करोड़ नकद जब्त करने में इतनी आसानी से ज्यादा, या कोई और गड़बड़ी भी छुपी हुई?
 
वाह, यह तो बहुत बड़ा मामला है 🤯 बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम की जांच हुई तो इतनी बड़ी संपत्ति अटैच करने का यह एक अच्छा निर्णय है 💸 ED ने सही तरीके से इस मामले की जांच की है और बीजेपी सरकार द्वारा करोड़ों रुपयों की घोषणा पर भी अब संदेह होने लगा है 🤔
 
बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम मामला तो बहुत बड़ा हुआ है, ईडी ने अचल संपत्तियों पर हाथ फसले हैं... लेकिन यह सोचा जा सकता है कि ये सब कुछ इंजीनियरिंग कॉलेजों में होने वाली दुराचार का हिस्सा है। बेचने के बजाय, छोड़ देना चाहिए कि कॉलेजों में सीटें आरक्षित कर दी जाएं।
 
😒 बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम में ED ने बड़ी कार्रवाई की, लेकिन सवाल यह है कि अब क्या? कॉलेजों में सीट ब्लॉकिंग की समस्या तो तब तक नहीं समाप्त हुई, जब तक कि ED की जांच पूरी नहीं होती. और इसके अलावा, 1.86 करोड़ नकद जब्त करने के बाद भी कॉलेजों में सुधार क्या दिखाई देगा? यह तो ED की जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन मुझे लगता है कि ED ने इस मामले में बहुत धूमधड़ मचाने के लिए पर्याप्त नहीं किया है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि अब कॉलेजों में सुधार होगा, लेकिन यह तो समय दिखाएगा। 🤔
 
पहले तो यह सुनकर हैरान होता कि कैसे एक एजुकेशनल ट्रस्ट पर ऐसा मामला सामने आया.. 19 करोड़ रुपये तक की बेहिसाब नकदी वसूली से जुड़े सबूत मिल गए, यार यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है... ED ने अच्छी तरह से जांच की और सभी पक्षों पर अटकलें लगाने वाले लोगों को पकड़ लिया..

बस एक सवाल है, यह कैसे हो सकता है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी वसूली से जुड़े सबूत नहीं मिल पाए? और भी तो कई एजिक्शनल ट्रस्ट्स ऐसे हैं जहां भी ऐसे मामले लंबे समय तक छिपे रहते हैं।

बस यह उम्मीद है कि अब सारा सच उजागर होने वाला है, और जल्द ही सबकुछ साफ हो जाएगा। ED ने बहुत अच्छी तरह से काम किया है। 🙌
 
मुझे लगता है कि ये सब एक बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। ED ने अच्छे से काम किया, लेकिन यह तो साफ है कि बेंगलुरु की शिक्षा व्यवस्था पर छापा पड़ गया है। कॉलेजों में सीटें इतनी आसानी से बेच दी जा रही थी, तो इसका मतलब यह है कि वे किसी भी नियम का पालन नहीं कर रहे थे। और अब जब ED ने छापेमारी की तो उन्हें पता चल गया होगा कि यह सब क्या हुआ।
 
बेंगलुरु सीट ब्लॉकिंग स्कैम तो बहुत बड़ा मुद्दा है... लेकिन अगर हम इस पर गहराई से देखें, तो यहाँ कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए। ये सीट ब्लॉकिंग स्कैम न केवल कॉलेजों के खिलाफ नहीं बल्कि हमारे पूरे शिक्षा व्यवस्था पर है। लेकिन ED ने अच्छी तरह से जांच की और सबूत इकट्ठे किए, इसलिए मुझे लगता है कि इस पर कोई भी धारणा नहीं लगानी चाहिए। यह तो एक अवसर है कि हमें शिक्षा प्रणाली में सुधार करने पर विचार करना चाहिए।
 
मैंने भी ऐसा ही सोचा था कि यह तो बड़ा स्कैम है अगर सच्चाई तय कर दी जाए, तो क्या होगा इन लोगों को जेल में रखना... वाह बीएसएमएस एजुकेशनल ट्रस्ट पर ऐसा हाथ फसला है, अब पूरा सवाल यह है कि इन लोगों ने इतनी नकद कैसे इकट्ठा की और क्यों?
 
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