बोलते हुए भी तो सही है, लेकिन सोचते समय भी इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री जी की बात सुनने से हमें नशा नहीं आयेगा, बल्कि संविधान को पवित्र मानने से हमें सोचने पर मजबूर कर देगा। लेकिन इतना भी नहीं, अगर हमारे संविधान को पवित्र करने की बात सुनते हैं तो हम अपने देश के इतिहास को भूल जाएंगे।
क्योंकि संविधान एक राजनीतिक दस्तावेज है, इसीलिए हमें इसकी मूल प्रकृति को समझना चाहिए। अगर हम संविधान को पवित्र मानते हैं तो हमारे देश के इतिहास में इतने भेदभाव और असमानताएं आ जाएगी।
आजकल लोग संविधान को एक पवित्र दस्तावेज मानते हैं और इसका पालन नहीं करते, तो यह बिल्कुल सही नहीं। हमें संविधान को समझना चाहिए, उसके नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन उसे पवित्र नहीं मानना चाहिए।