SC Updates: कश्मीर फंडिंग मामले में 'सुप्रीम' फैसला, कारोबारी नवल किशोर की जमानत याचिका पर सुनवाई को सहमति

सुप्रीम कोर्ट ने नवल किशोर कपूर की जमानत याचिका पर सुनवाई को सहमति दी है। कपूर पर कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने के लिए फंडिंग करने का आरोप है, जिसमें उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज है।

नवल किशोर कपूर को यूएई में रहने वाले हैं और उनके खिलाफ आरोप यह है कि उन्होंने अलगाववादी नेताओं के लिए पैसा लिया था। हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि कपूर को जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि आरोप पहली नजर में सही लगते हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई करने का फैसला किया है। यह फैसला कपूर के वकील शादान फरासत द्वारा अदालत में पेश किए गए तर्कों पर आधारित है।

कपूर के मुवक्किल पर लगाए गए आरोपों के ठोस सबूत नहीं हैं, जिसकी स्थिति उनके वकील ने अदालत में बताई है। उन्होंने कहा कि कपूर ने विदेश से पैसा भारत लाने में मदद किया था, लेकिन यह पैसा बैंकों का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हुआ।

इस मामले में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत से नोटिस जारी किया है और इसका जवाब मांगा है।
 
बात बिल्कुल, यह तो बहुत बड़ा मामला है। मुझे लगने लगा है कि पैसा पूरे देश में फैलाया जाना चाहिए, न कि किसी एक व्यक्ति पर। और यह भी सच है कि आरोप पहली नजर में सही लगते हैं, लेकिन अगर सबूत नहीं हैं तो यह पूरी तरह से ठीक नहीं।

मुझे लगता है कि अदालत ने सही फैसला दिया है, अब आगे की सुनवाई करने का फैसला करना। और मेरी भावना है कि कपूर जी को जमानत देनी चाहिए, अगर उनके खिलाफ आरोप सच हैं तो क्यों वह नहीं पकड़े गए? लेकिन अगर आरोप झूठे हैं तो उन्हें जमानत देना और फिर बाद में साबित करना।
 
मुझे लगता है 🤔 कि यह मामला बहुत जटिल है और हमें अधिक सबूतों की जरूरत है 📝 इससे पहले कि किसी को जमानत दी जाए।

कपूर के वकील ने बहुत अच्छा तर्क पेश किया है 🤓 और मुझे लगता है कि अदालत ने सही फैसला लिया है। 🙏

लेकिन इस मामले में हमें यह भी सोचना चाहिए कि आरोप लगाने से पहले क्या कदम उठाए जा सकते थे? 🤔 और हमें यह जानना चाहिए कि पुलिस ने कैसे सबूत इकट्ठा किए और उनकी विश्वसनीयता क्या है? 💡

यह मामला बहुत ज्यादा जटिल है और इसके लिए हमें अधिक समय और सोच की जरूरत है। 🤓
 
अरे ये तो बहुत अजीब सी बात है 🤔, नवल किशोर कपूर पर आरोप लगाए गए तो शायद वाहबी, गैरकानूनी गतिविधियों के लिए। लेकिन इन सबके पीछे कौन सी सच्चाई है? मुझे लगता है कि जैसे ही यह फैसला आ जाएगा, तो हमें पता चलेगा। क्या कपूर ने वास्तव में कुछ गलत किया था या यह सब बस झूठी खबरें हैं? 🤷‍♂️ मुझे लगता है कि जांच एजेंसी से जवाब मिलने पर हमें कुछ और स्पष्टता मिलेगी।
 
कपूर को जमानत देने का फैसला अच्छा है, आरोपों के ठोस सबूत नहीं तो क्यों? 😐

कपूर के वकील ने बहुत अच्छी तर्क दिए, लगता है कि अदालत में सच्चाई खुलकर सामने आ रही है। 🤔
 
सुप्रीम कोर्ट ने नवल किशोर कपूर को जमानत देने का फैसला लेना चाहिए। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पहले से ही बहुत हल्के लगते हैं और उन्हें इस मामले में दोषी नहीं माना जाना चाहिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को यह कहने की जरूरत नहीं है कि आरोप सही हैं, बल्कि उन्हें यह साबित करना चाहिए कि आरोप पहले से ही ठोस सबूतों पर आधारित हैं।
 
🤔 यह तो बहुत ही दिलचस्प मामला है, लेकिन मुझे लगता है कि जमानत याचिका पर सुनवाई करने से पहले कुछ और जानकारी चाहिए। 📝 क्या सच्चाई यह है कि नवल किशोर कपूर ने वास्तव में अलगाववादी नेताओं को पैसा दिया था, या यह सिर्फ एक आरोप है? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि अदालत इस मामले में सभी तथ्यों को सुनने के लिए ज़रूरी है। हमें यह भी देखना चाहिए कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोपों पर कैसी जानकारी इकट्ठा की है और इसका जवाब अदालत से मांगा है? 📰

अदालत को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नवल किशोर कपूर को न्याय मिले, लेकिन इसके लिए उन्हें जमानत नहीं देनी चाहिए। यह एक सख्त निर्णय होगा, लेकिन अगर आरोप सच हैं तो यह जरूरी है। 🤝
 
मुझे लगता है कि यह फैसला बहुत अजीब है, खासकर जब हमें पैसा और जमानत की बात हो रही हो। यूएपीए का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर माफी नहीं मिलेगी, लेकिन कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने के लिए फंडिंग करने के आरोप को दूर करने के लिए इतना जोर देना समझ में नहीं आता। और जब हम यूएई वाले नवल किशोर कपूर की बात करते हैं तो उनकी जमानत पर सुनवाई को सहमति देना भी एक अजीब फैसला लगता है। 😐
 
मुझे लगता है कि यह फैसला अच्छा हो सकता है, लेकिन पहले से ही आरोप बहुत गंभीर हैं 🤔। मैंने पढ़ा है कि नवल किशोर कपूर पर अलगाववादी नेताओं के लिए पैसा लेने का आरोप लगाया गया है, लेकिन उनके वकील ने कहा है कि इस सबूतों को ठीक से नहीं जांचा गया है। यह तो अच्छी बात है कि अदालत ने आगे की सुनवाई करने का फैसला किया है, लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले की पूरी जांच करानी चाहिए 🕵️‍♂️
 
मैं तो कह देना चाहूंगा कि ये नवल किशोर कपूर की जमानत की बात तो बहुत मुश्किल स्थिति में पड़ा है... आरोपों पर सबूत तो कोई नहीं है, लेकिन अदालत ने फैसला किया है कि आगे की सुनवाई करनी चाहिए। यह तो बहुत हैरान करने वाली बात है... मुझे लगता है कि इसके पीछे और भी कुछ हो सकता है।
 
मुझे लगता है कि इस मामले में हमें यह प्रश्न करना चाहिए कि क्या हम अपने देश में किसी को भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उसकी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं? नवल किशोर कपूर पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अलगाववादी नेताओं के लिए पैसा लिया था, लेकिन हमें यह साबित करने में सक्षम नहीं हुए कि वे वास्तव में ऐसा क्यों कर रहे थे। मुझे लगता है कि हमें अपनी राजनीति में अधिक न्याय और निष्पक्षता लाने पर ध्यान देना चाहिए।
 
अरे यार, यह तो बहुत बड़ा मामला है 🤔। मुझे लगता है कि आरोप लगाने से पहले पूरी जांच करनी चाहिए थी। कपूर के खिलाफ आरोप लगाने वाली एजेंसियों ने तो पहले ही अपनी बात कह देनी चाहिए थीं। लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, इसलिए आशा है कि अदालत ने सभी facts देखकर निर्णय लेंगे।

कपूर के वकील ने अच्छी बात कही है - आरोपों के ठोस सबूत नहीं हैं। लेकिन अदालत में सबूत और तर्क दिखाना एक अलग मामला है। मुझे लगता है कि कपूर को जमानत मिल जाएगी, लेकिन इसके बाद भी आरोपों पर रोक लगानी चाहिए।
 
मुझे लगने लगता है कि यह मामला बहुत जटिल हो गया है... कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने के लिए फंडिंग करने का आरोप बहुत गंभीर है, लेकिन कपूर के वकील ने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के ठोस सबूत नहीं हैं... यह तो समझने में आता है कि अदालत में आगे की सुनवाई करने का फैसला कैसे किया गया है।

क्या हमेशा ऐसी ही परिस्थितियाँ होती रहती हैं जहां लोगों को जमानत नहीं दी जाती? और राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत से नोटिस जारी किया है... यह तो एक अच्छा सवाल है कि इन सब बातों में क्या सच्चाई है।
 
अरे, यह तो वाकई भूल गई ये प्लेटफॉर्म। क्यों नोटिस नहीं मिलते जब आप इस तरह से पूछते हैं? मुझे लगता है कि हमारी बातें बहुत कम आ जाती हैं। मैं समझ नहीं पाया कि यह कैसे सुनवाई को सहमति देता है। पहले तो हाई कोर्ट ने कहा था कि जमानत नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने क्यों फैसला बदल दिया? यह तो बहुत अजीब है। और क्या यह प्लेटफॉर्म की शिकायत प्रबंधन टीम तक पहुंचती है? 🤔
 
कपूर को जमानत देना सही नहीं होगा, लेकिन अदालत में आगे की सुनवाई करना जरूरी है। क्योंकि अब तक उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ठोस सबूतों के बिना हैं और कपूर ने अपने पैसे वापस भारत लाने के तरीके बताए हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई करनी जरूरी है ताकि इस मामले को आगे बढ़ाया जा सके। 🤔
 
कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने की बात तो भूल गये हैं यार... लेकिन यह आरोपों पर बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। कपूर को जमानत देना सही नहीं था, लेकिन अब ऐसा हुआ है। मुझे लगता है कि एनआईए को अधिक सबूत इकट्ठा करने की जरूरत है, तभी हम समझ सकते हैं कि वास्तव में क्या हुआ था।
 
कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने वाले दोहरे मुंह का खेल चल रहा है, यह तो सुनिश्चित है कि भारत में सुरक्षा तंग हो जाएगी। नवल किशोर कपूर की जमानत याचिका पर फैसला आने से पहले इसका एहसास करना चाहिए था। अब यह सवाल उठता है कि कश्मीर घाटी में अशांति के लिए दंडित कौन जाएगा।
 
कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने का आरोप लगने पर भी यह सुनिश्चित है कि जमानत मिल रही है, लेकिन कपूर को पैसा एक्सप्रेस व्हील पर नहीं लगाया गया। इसके ठीक विपरीत, उनके वकील ने अदालत में बताया कि यह पैसा बैंकों का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हुआ।
 
कपूर को जमानत देना सही नहीं था, फिर भी, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा ही कर दिया। यह तो सबके चेहरे पर घिसने वाली आँखों का खेल है। हमें लगता है कि अदालत में बैठने वाले लोग देश के अच्छे हैं, लेकिन सोचते समय यह नहीं तो रोकना चाहिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के नोटिस पर ताकीद करना चाहिए, फिर भी, कपूर को जमानत मिल गई।
 
मुझे ये सुनकर लगा कि कभी-कभी जीवन में तो ऐसे भी मिल जाते हैं कई दिलचस्प मामले। नवल किशोर कपूर पर आरोप लगाए गए थे और अब उन्हें जमानत देने का फैसला हुआ है। मुझे लगता है कि अदालत ने बहुत सावधानी से सुनवाई की और फैसला लिया। मैं समझ नहीं पाया कि उनके वकील ने इतने मजबूत तर्क दिए थे कि अदालत ने पहले की गई रोकथाम पर विचार करने को तय किया है। लेकिन अब यह सुनकर अच्छा लग रहा है कि उनके मुवक्किल को जमानत मिल जाएगी।
 
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