नीतीश कुमार के बारे में जानकर मैं हमेशा नजदीक से देखा करता हूँ। वे बहुत एक्सप्रेसिव लोग होते हैं, जैसे कि उनकी राजनीतिक भाषणों का माहौल। लेकिन, ऐसे में उनका परिवार जो दिव्यांगता से भरा था, ये सच्चाई तो बहुत प्रभावशाली है। मैं सोचता हूँ कि अगर वे अपने परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर राजनीति करते, तो क्या नतीजा निकलता। लेकिन, फिर देखें, जैसे उन्होंने अपनी स्थिति को और भी मजबूत बनाया, वे एक्सप्रेसिव होने के साथ-साथ, सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान देते रहे।