शेख हसीना को मौत की सजा, अब भारत क्या करेगा: बांग्लादेश को नहीं सौंपा तो क्या होगा; 6 सवालों में पूरी कहानी

शेख हसीना को बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया है। इस फैसले से भारत पर दबाव आ सकता है कि वो शेख हसीना को बांग्लादेश लौटवाए। अगर ऐसा नहीं करना चाहता है, तो उसमें तनाव बढ़ सकता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में एक्सट्रडिशन ट्रीटी साइन हुई थी, जिसमें दोनों देशों के बीच अपराधियों के एक्सचेंज की शर्तें हैं। इस शार्टी के तहत किसी अपराधी को प्रत्यार्पित तभी किया जाएगा, जब अपराध दोनों देशों में अपराध माना जाए। कम से कम 1 साल की सजा मिली हो। आरोपी पर अरेस्ट वारंट हो।

इस शार्टी के तहत भारत ने 2020 में शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के दो दोषियों को बांग्लादेश भेजा था। इस ट्रीटी के बावजूद शेख हसीना को वापस ना लौटाने के दो रास्ते हैं।

पहला, मुकदमा राजनीति से प्रेरित है। अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। इस शार्टी के तहत हत्या, नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध इनमें बाहर रखे गए हैं।

दूसरा, मुकदमा ईमानदारी से नहीं चला। अगर आरोपी की जान को खतरा हो, उसे निष्पक्ष ट्रायल नहीं मिला हो। ट्रिब्यूनल का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक हो।

इस ट्रीटी के तहत भारत ने 2020 में शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के दो दोषियों को बांग्लादेश भेजा था। इस ट्रीटी के तहत शेख हसीना पर अपराध तय हुए हैं। अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है।

अगर अपराध ईमानदारी से नहीं चला, तो भारत प्रत्यर्पण से मना कर सकता है। ट्रीब्यूनल के गठन, जजों की नियुक्ति और प्रक्रिया पर UN ने पहले ही सवाल उठाए हैं। शेख हसीना को अपना पक्ष रखने के लिए वकील नहीं मिला। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक जजों पर सरकारी दबाव था। 1400 मौतों की जांच पर अंतरराष्ट्रीय संगठन चिंता जता चुके हैं। शेख हसीना खुद लगातार पॉलिटिकल बदले का आरोप लगा रही हैं।

भारत के पूर्व डिप्लोमैट अजय बिसारिया ने कहा, ‘‘ भारत किसी भी हाल में शेख हसीना को वापस बांग्लादेश को सौंप देगा। भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दी है। एशिया में हसीना के लिए सबसे सुरक्षित भारत ही है। अगर वो हसीना को वापस भेजता है तो बांग्लादेश में अस्थिरता बढ़ जाएगी जो ज्यादा खतरनाक होगी।’’

इस ट्रीटी के तहत शेख हसीना पर अपराध तय हुए हैं। अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है।

अगर अपराध ईमानदारी से नहीं चला, तो भारत प्रत्यर्पण से मना कर सकता है।

शेख हसीना को मौत की सजा देने वाली इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना पर 5 आरोप लगाए थे।

आरोप-1: हत्या, हत्या की कोशिश, यातना देना। चार्जशीट के मुताबिक हसीना ने पुलिस और अवामी लीग को आम नागरिक की हत्या करने के लिए उकसाने और हत्या करने के लिए कहा।

आरोप-2: 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ था, जिसके बाद शेख हसीना ने भारत में शरण ली। प्रदर्शनकारियों ने उनके घर पर कब्जा कर लिया था।

आरोप-3: 5 अगस्त को ढाका के चांखारपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी गई। यह भी कहा गया है कि यह हत्या शेख हसीना के सीधे आदेश, उकसावे, मदद और साजिश की वजह से।

आरोप-4: इस आरोप में 5 प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या करने और एक को घायल करने की बात है। आरोप है कि उन 5 मारे गए लोगों की लाशें जला दी गईं, और एक प्रदर्शनकारी को जिंदा जला दिया गया।

आरोप-5: इस मामले में शेख हसीना पर गोली मारकर हत्या, यातना कराने, 5 प्रदर्शनकारियों को जीवित जलाने का आरोप है।

शेख हसीना को अपराध तय हुए हैं। अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत शेख हसीना को बांग्लादेश लौटवाएगा।
 
अरे वाह! शेख हसीना की स्थिति बहुत खराब हुई है... 🤕 अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं करना चाहता है, तो तनाव बढ़ सकता है... 😬 और फिर क्या? शेख हसीना खुद लगातार पॉलिटिकल बदले का आरोप लगा रही हैं... 🤔 किसी को ऐसा करने का मौका नहीं देना चाहिए, लेकिन ये तो बहुत आसान नहीं है... 😅
 
मुझे लगता है कि ये फैसला बहुत बड़ा है, और शेख हसीना की स्थिति वास्तव में दुखद है। ताकि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटवाने पर भारत की पकड़ बढ़ जाए, लेकिन अगर पूरा मामला राजनीतिक है तो भारत इसे नहीं कर सकता।

शेख हसीना की स्थिति वास्तव में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, और इसके पीछे कई सवाल उठते हैं। अगर जजों पर सरकारी दबाव था, तो यह एक बड़ा मुद्दा है।

मुझे लगता है कि भारत को इस मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और पूरी सच्चाई को सामने लाना चाहिए। अगर शेख हसीना पर अपराध तय हुए हैं, तो भारत उन्हें बांग्लादेश लौटवाना चाहिए, लेकिन अगर यह राजनीतिक है, तो भारत इसे नहीं कर सकता।

शेख हसीना की स्थिति में हमारी दुनिया को बहुत बड़ी चिंता है।
 
[ GIF: एक शेक हसीना की तस्वीर पर चम्मच चलाते हुए दिखाई देती है ] 🤣

[ GIF: एक मानवता की किट बंधी हुई, जिसमें एक 'हसीना' स्टिकर लगा हुआ है, और उसे पेड़ की पत्तियों को छूने के लिए मजबूर कर रही है ] 🌳

[ GIF: एक ट्रिब्यूनल रूम में शेख हसीना को चार्जशीट दिखाई देती है, और उसे मुस्कराते हुए दिखाई देता है ]
 
🤔 मेरे दोस्त, यह बहुत ही गंभीर मामला है। शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह फैसला बहुत ही विवादास्पद है।

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में एक्सट्रडिशन ट्रीटी साइन हुई थी, जिसमें दोनों देशों के बीच अपराधियों के एक्सचेंज की शर्तें हैं। लेकिन शेख हसीना को वापस ना लौटाने के दो रास्ते हैं - सबसे पहले, मुकदमा राजनीति से प्रेरित है।

अगर अपराध राजनीतिक माना जाए, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। लेकिन अगर अपराध ईमानदारी से नहीं चला, तो भारत प्रत्यर्पण से मना कर सकता है। और इसमें शेख हसीना पर अपराध तय हुए हैं।

यह फैसला बहुत ही जटिल है और मुझे लगता है कि इसके पीछे कई छिपे हुए एजेंडे हो सकते हैं। शायद शेख हसीना ने अपने देश के राजनेताओं या विदेशी शक्तियों पर दबाव डाला होगा। लेकिन भारत किसी भी हाल में शेख हसीना को वापस बांग्लादेश को सौंप देगा, जैसे कहा है।

बशरत अल्लाह! 🤞
 
ना ना ना, यह बहुत बड़ा मामला है! शेख हसीना पर 5 आरोप लगाए गए हैं और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें अपराधी घोषित कर दिया है। लेकिन, भारत पर दबाव आ सकता है कि वो शेख हसीना को बांग्लादेश लौटवाए। मुझे लगता है, अगर अपराध राजनीतिक माना जाए तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। लेकिन, यह एक बहुत बड़ा सवाल है कि शेख हसीना को निष्पक्ष ट्रायल मिला है या नहीं। UN ने पहले ही सवाल उठाए हैं और कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि जजों पर सरकारी दबाव था। तो अब भारत को एक अच्छा फैसला करना होगा - शेख हसीना को बांग्लादेश लौटवाएं या नहीं।
 
मुझे लगता है कि यह फैसला हमें एक नए सवाल के साथ जोड़ता है - कब तक हम अपनी नैतिकता और मानवता की ओर बढ़ सकते हैं? शेख हसीना को अपराध तय हुए होने पर भारत को यह सोचना होगा कि हमें अपनी राजनीतिक गद्दियों को छोड़ने का मौका देना चाहिए या नहीं। लेकिन फैसला ऐसा नहीं है जैसे वह हमारे निजी विचारों को प्रभावित करे।
 
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