'शंकराचार्य देश का PM या CM तय नहीं करेगा', माघ मेले में रोके जाने पर भड़के अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज के शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या पर्व पर हुए विवाद और उनके सवालों का जवाब दिया। जैसा कि हमने पहले बताया, उन्होंने प्रशासन से कहा है कि वह गंगा स्नान कराएगी, तभी हमारे शिविर में प्रवेश करेंगे।

उन्होंने कहा, 'हम ज्यादातर लोग पालकी में स्नान करते रहते हैं, और यह स्नान करने का तरीका तब भी जारी रहेगा।'

मौनी अमावस्या पर्व पर शंकराचार्यों ने अपने शिविर में भाग लिया था, फिर पुलिस ने उन्हें बाहर खींच लिया और उन्हें मारपीट किया। इसके बाद गंगा स्नान कराने की अनुमति दी।

शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'हम गंगा स्नान परमिशन लेकर नहीं करेंगे।'

उन्होंने मीडिया को भ्रामक और झूठी जानकारी देने की आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों, डीएम, और गृह सचिव के खिलाफ भी शिकायतें कीं।

शंकराचार्यों ने कहा, 'हमें अपनी परंपरा को कलंकित करने का काम करेगा तो बर्दाश्त नहीं करेंगे।'
 
मैंने पहले ही बताया था कि शंकराचार्यों के सवालों का जवाब देना आसान नहीं है... 🤔 उन्होंने पालकी में स्नान करने का तरीका भी जारी रखने का फैसला किया, लेकिन क्या यह वास्तव में समाधान है? 🤷‍♂️

अब जब उन्होंने गंगा स्नान कराने की अनुमति दी है, तो यह सवाल उठता है कि अगर प्रशासन ने उनकी बात मानी और उनकी परंपरा को सम्मानित करने की कोशिश की, तो क्यों उन्हें मारपीट किया गया? 🚔

मैं समझता हूँ कि शंकराचार्यों ने अपनी परंपरा को बचाने के लिए इस्तेमाल किया है, लेकिन यह एक दुर्भाग्यपूर्ण तरीका नहीं है। उनकी बात सुनना और समझना चाहिए, ताकि समाधान निकालने में मदद मिल सके। 💡

क्या हमें अपने पास की समस्याओं को हल करने के लिए एक्सेसरीज़ खरीदने जैसा ही सोचा जाए? नहीं, यह सवाल उतना समझदार नहीं है... 🤓 शंकराचार्यों को अपनी परंपरा को बचाने के लिए एक वास्तविक समाधान ढूंढने की जरूरत है। 💪
 
अरे, ये मौनी अमावस्या पर्व के बारे में बात करते हैं और प्रयागराज में शंकराचार्यों के साथ विवाद। तो फिर उन्होंने कहा कि वे गंगा स्नान कराएगी तो हमारे शिविर में प्रवेश करेंगे। लेकिन अब उन्होंने कह दिया कि नहीं, हमें परमिशन लेकर नहीं करेंगी। और अभी भी जैसे ही पुलिस ने उन्हें बाहर खींच लिया, तो उन्होंने कहा कि मीडिया भ्रामक और झूठी जानकारी दे रहा है। यह वाकई थोड़ा अजीब है, नहीं? 😒🤔
 
मैंने देखा है कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर्व पर जो घटनाएं घटीं, वो बहुत ही गंभीर थीं। शंकराचार्यों ने अपने अधिकार की रक्षा के लिए बहुत बड़ी साहसिकता दिखाई।

मुझे लगता है कि हमें उनकी जिद्द का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपने परंपरागत अधिकारों को बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को सम्मानित रहना बहुत जरूरी है।
 
अरे, यह तो बहुत ही अजीब बात है! मौनी अमावस्या पर्व पर शंकराचार्यों को गंगा स्नान करने की अनुमति देने का निर्णय पूरी तरह से गलत है। वे लोग तो मेरे भाई, उनकी बात समझने के लिए जरूरी नहीं है कि हमें उनकी परंपराओं को कलंकित करने का काम करने दो। और पुलिस ने उन्हें भी मारपीट किया, तो यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि शिविर में प्रवेश करने से पहले वे लोग गंगा स्नान कराने की अनुमति लेते हैं, यह तो एक बात है, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी परंपराओं को बनाए रखने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
 
मैंने पाया है कि मौनी अमावस्या पर्व पर हुए विवाद के बारे में बहुत सारी गलत जानकारी फैल रही है। शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पारंपरिक गंगा स्नान की अनुमति लेते समय पुलिस और प्रशासन से मिले, लेकिन उन्होंने कहा है कि वे इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देंगे। मुझे लगता है कि यह एक अच्छी चीज हो सकती है, ताकि हमारे शिविर में स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखी जा सके।
 
मुझे लगता है कि पुलिस वाले बुरे दिखाई देते हैं ⚔️। शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके खिलाफ मुठभेड़ की और उन्हें गंगा स्नान करने की अनुमति दी। यह अच्छा है कि वे अपनी परंपरा को बचाए रखना चाहते हैं 🙏। लेकिन पुलिस वालों को भी उनकी बात समझनी चाहिए, शायद कुछ नहीं हुआ था 😔

क्या तुम्हें लगता है कि शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद के सवालों का जवाब सुधराया गया है? 🤔

(https://indianexpress.com/article/e...a-controversy-and-the-ganga-snana-permission/)
 
मेरे दोस्त, यह तो बहुत ही ज्यादा चोटिल है । पुलिस ने उनकी बातों पर टाल मारने की और उन्हें मारपीट किया, लेकिन फिर भी वह गंगा स्नान करने के लिए तैयार रहे। मेरा मन यह सोचता है कि वास्तव में उन्होंने प्रशासन से चीजों को ठीक करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुछ दूसरे ने उनकी बातें खराब कर दीं। यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है, और हमें इस पर विचार करना चाहिए कि कैसे हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रख सकें।
 
मैंने पढ़ा है प्रयागराज में क्या हुआ था। शंकराचार्यों ने सोचा कि अगर वे गंगा स्नान करते हैं तो हमारे शिविर में प्रवेश करेंगे। लेकिन उन्हें पता नहीं था कि यह विचार बहुत दुखदा होगा। और फिर भी उन्होंने अपने अधिकारियों से कहा है कि वह गंगा स्नान करते रहेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि ये एक दुर्भाग्यपूर्ण विचार था। और फिर पुलिस ने उन्हें बाहर खींच लिया, मारपीट किया, और फिर उन्होंने गंगा स्नान करने की अनुमति दी। यह तो बहुत शर्मनाक है। मुझे लगता है कि शंकराचार्यों ने अपने अधिकारियों को भ्रामक जानकारी देने की थी, और अब उन्हें अपने कार्यों से निपटना होगा। यह एक बड़ा मुद्दा है।
 
बेटा, यह सच है कि शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस से बहुत बड़ा मैच खेला है 🤯। उनकी बात तो सच्ची है, हमें अपनी परंपरा और आदतों को बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन, फिर भी, उन्होंने कहा है कि गंगा स्नान करने के लिए प्रशासन की अनुमति लेने की जरूरत है? यह तो थोड़ा अजीब है, मुझे लगता है कि वे अपनी परंपराओं को बचाने के लिए चुनौतियों का सामना कर रहे हैं 💪
 
अरे, यह तो दिलचस्प है! पुलिस जैसे व्यक्ति खुद गंगा स्नान करने के लिए कह रहे हैं, और फिर वही तो मौनी अमावस्या पर्व के दौरान शंकराचार्यों को बाहर खींच लेते हैं और उन्हें मारपीट करते हैं। 🤦‍♂️

अब, जब उन्हें गंगा स्नान करने की अनुमति मिल गई, तो वही तो कह रहे हैं कि हमें परमिशन लेकर नहीं करेंगे। अरे, यह तो सीखने का मौका है! 🙃

और जब उन्होंने पुलिस जैसे व्यक्तियों पर आरोप लगाया, तो कह रहे थे कि हम अपनी परंपरा को कलंकित नहीं करेंगे। लेकिन, देखिए, वही तो उनकी परंपरा को कलंकित कर रहे हैं! 😂

क्या यह वास्तव में एक विवाद था, या सिर्फ एक व्यवसायिक चाल थी? 🤑
 
मैंने देखा है कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर्व पर हुए विवाद को समझने के लिए, हमें सबसे पहले यह समझना चाहिए कि शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने दृष्टिकोण से कहा है कि गंगा स्नान करने से पहले उन्हें प्रशासन से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

उनकी बात सुनते हुए, यह लगता है कि शंकराचार्यों ने अपनी परंपरा और सम्प्रदायिक विश्वासों को बनाए रखने के लिए खड़े हैं। उनकी राय में गंगा स्नान करने का तरीका पालकी में जैसा है, वह भी जारी रहेगा।

लेकिन, यह भी सच है कि पुलिस ने उनको बाहर खींच लिया, और फिर उन्हें गंगा स्नान करने की अनुमति दी। यह एक दिलचस्प सवाल उठाता है कि क्या सरकार और प्रशासन की तरफ से, शंकराचार्यों को उनके अधिकार क्षेत्र में रखने की जरूरत नहीं है।

कुल मिलाकर, यह विवाद एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाता है जिस पर हमें बात करनी चाहिए।
 
🤔 प्रयागराज में शंकराचार्यों के साथ हुआ विवाद देखकर मुझे लगता है 🙏 कि हम सब को एक-दूसरे की बात समझनी चाहिए। 🗣️ जैसे कि प्रशासन ने कहा है कि अगर उन्हें गंगा स्नान करने का मौका मिलता है, तो शिविर में दाखिल करेंगे। 🤝 लेकिन शंकराचार्यों ने कहा है कि वह गंगा स्नान परमिशन लेकर नहीं करेंगे। 😐

मुझे लगता है 🤷‍♂️ कि पुलिस अधिकारियों और प्रशासन को शंकराचार्यों की बात समझनी चाहिए। 💬 अगर उन्हें गंगा स्नान करने का मौका नहीं मिलता, तो शिविर में दाखिल होने का भी कोई निश्चित तरीका नहीं है। 🤔

कुल मिलाकर 🙏 मुझे लगता है कि हम सब एक-दूसरे की बात समझने और सहानुभूति रखने की जरूरत है। ❤️
 
बhai, यह तो पूरी तरह से अजीब सी हालत है। मौनी अमावस्या पर्व पर जैसे ही शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना सवाल पूछा, पुलिस ने उन्हें बाहर खींच लिया और मारपीट किया। फिर तो वे गंगा स्नान करने के लिए कह दिए। यह तो बहुत ही अजीब है, क्या थोड़ा समझौता नहीं कर सकते थे।

मैंने भी पढ़ा है कि प्रशासन ने उन्हें पालकी में स्नान करने की अनुमति दी है। लेकिन जब शंकराचार्यों ने कहा कि वे गंगा स्नान परमिशन लेकर नहीं करेंगे, तो सब कुछ बदल गया। यह बहुत ही अजीब है कि पुलिस और प्रशासन दोनों एक ही तरफ खड़े हैं।

बहुत से लोग कहते हैं कि शंकराचार्य सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया को भ्रामक जानकारी देने की आरोप लगाया, लेकिन यह बात जरूर है कि उनके सवालों का जवाब दिया गया।
 
ये जानकर मुझे दुख हुआ कि उन्होंने ऐसा व्यवहार किया। हम सभी जानते थे कि उनके सवालों का जवाब तुरंत देना होगा, लेकिन पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी। अब वे कह रहे हैं कि उन्हें परिशन लेकर गंगा स्नान करना पड़े। यह अच्छा नहीं है, हमें उम्मीद थी कि उन्हें समझाया जाएगा।
 
बात प्रयागराज में हुई विवाद, शंकराचार्यों ने कहा कि हम उनकी परंपरा को कलंकित नहीं करना चाहते, लेकिन पुलिस ने उन्हें बाहर खींच लिया और उन्हें मारपीट किया, फिर उन्हें गंगा स्नान कराने की अनुमति दी। शंकराचार्यों ने कहा कि हम नहीं करेंगे, पर पुलिस ने कहा है कि तुम करो। यह बहुत ही अजीब है।
 
मेरा सोचता है कि यह बहुत भूलबूलाहट है। पुलिस ने शंकराचार्यों पर मारपीट किया, फिर उन्हें गंगा स्नान करने की अनुमति दी। और अब वो कहते हैं कि हमें परमिशन लेकर नहीं करेंगे। यह तो बहुत शरारती है। मेरा नामांकित भी है!
 
मेरे दोस्त, यह पूरा मामला बहुत ही रोचक लग रहा है 🤯। मैंने भी सुना था कि शंकराचार्यों ने तो पुलिस से कह दिया था कि अगर हम गंगा स्नान कराएंगे, तो आपका शिविर प्रवेश करेंगे। यह बहुत ही राजनीतिक मंच बन गया है 🤝। लेकिन मुझे लगता है कि इन शंकराचार्यों ने सही तरीके से नहीं बाता है। अगर वे गंगा स्नान करना चाहते हैं, तो फिर तो हमें उनकी बात समझनी चाहिए और उन्हें सहायता देनी चाहिए। लेकिन मेरा मतलब यह नहीं कि हम उनकी गलतियों को छुपाएं, बल्कि हम उनके साथ खड़े होकर उनकी बात समझने की जरूरत है।
 
मानो-मानिक दोस्तों, ये मौनी अमावस्या पर्व विवाद कुछ और भी गहरा हो गया है। शंकराचार्यों ने पुलिस, डीएम, और गृह सचिव के खिलाफ आरोप लगाए हैं, और यह बहुत ही दुखद स्थिति है। मुझे लगता है कि हमें अपने प्रशासन को समझने की जरूरत है, ताकि हम जान सकें कि क्यों ऐसे हालात उत्पन्न होते हैं।

शंकराचार्यों ने कहा है कि वह गंगा स्नान परमिशन लेकर नहीं करेंगे, और यह बिल्कुल सही है। लेकिन मेरा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने उनकी जरूरतों को समझा था, ताकि वे अपनी परंपरा को बनाए रख सकें।

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में शांति और समझ को बढ़ावा देने की जरूरत है, ताकि ऐसे हालात न हों।
 
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