SHANTI Act: नवीकरणीय ऊर्जा की चुनौतियों का समाधान बनेगा परमाणु कानून? आर्थिक सर्वे ने गिनाए ये बड़े फायदे

सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कई पुरानी चुनौतियों को दूर करने में मदद करने के लिए नया परमाणु ऊर्जा कानून लाया है। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि SHANTI एक्ट के जरिए परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अहम है।

शांति एक्ट के तहत अब निजी कंपनियां परमाणु संयंत्र संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और अनुसंधान जैसे कार्यों में भाग ले सकेंगी। दायित्व व्यवस्था को चरणबद्ध बनाया गया है, ताकि पीड़ितों के मुआवजे से कोई समझौता न हो।

सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की थी, जिसके तहत 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लक्ष्य है कि 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित कर उन्हें चालू किया जाए।
 
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की नई योजना बहुत ही रोचक लग रही है 🤔। शांति एक्ट से निजी कंपनियों को भी इसमें पंजाकरण करने का मौका मिलेगा, जिससे आर्थिक तरीके से इस क्षेत्र में विकास होगा। सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये की आवंटन की घोषणा की है, जो कि बहुत ही अच्छा संकेत है। अब देखिए कि क्या हमें 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने में सफलता मिल जाएगी। 🚀
 
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाई गई कोशिशों के बावजूद, मुझे लगता है कि हम अभी भी बहुत सारे गड़बड़ीदार नियम बनाए जा रहे हैं 🙄। शांति एक्ट के तहत निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्र संचालन करने की अनुमति देना ठीक है, लेकिन क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे इन कार्यों में कुशल और अनुभवी पेशेवरों को नियुक्त करेंगे? 🤔

और भी एक बात, सरकार द्वारा जो परियोजनाओं की घोषणा की गई है, उसकी सफलता की संभावना क्या है? हमेशा तो नए नियमों और विकास योजनाओं के साथ-साथ, हमें चुनौतियाँ भी मिल जाती हैं 🤯
 
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार को ऐसी बड़ी बहस करने में सफलता पाई है। इससे हमारे देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली आपूर्ति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इसके लिए हमें अपनी जिम्मेदारियों को समझने की जरूरत है और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे देश में परमाणु ऊर्जा की तकनीक सुरक्षित रूप से विकसित की जाए 🤔
 
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की नई योजना से मुझे लगता है कि हम जल्द ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति को बढ़ावा देने में सफल होंगे। शांति एक्ट के तहत निजी कंपनियों को भी परमाणु ऊर्जा संचालन में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे हमारे अर्थव्यवस्था में और भी बढ़ावा आाएगा। 🚀

लेकिन सरकार द्वारा 20,000 करोड़ रुपये आवंटित करने से पहले निजी कंपनियों को अपनी पूरी तैयारी करनी होगी। इसके लिए उन्हें पहले से अच्छी तरह से परीक्षण और अनुसंधान करना होगा। फिर ही हमें उम्मीद है कि 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित कर उन्हें चालू किया जाएगा। इससे हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा और बिजली आपूर्ति पर अधिक नियंत्रण प्राप्त करेंगे। 🌟
 
मुझे यह आर्थिक सर्वेक्षण बहुत ही दिलचस्प लगता है, लेकिन मैं इसकी पूर्णता और विश्वसनीयता को समझने की जरूरत महसूस करता हूँ। क्या इसमें किसी भी अनियमितता या गलतियों की जांच नहीं की गई? 20,000 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी संख्या में से कहाँ से आ गई और यह पैसा कहाँ चल रहा है? इसके लिए सरकार को जरूरी सबूत प्रदान करने होंगे।
 
मैंने इस बात पर सोचा है कि सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है। अब निजी कंपनियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं, जो अच्छा है क्योंकि इससे नई ऊर्जा तकनीक और अनुसंधान आ सकती है। लेकिन अभी भी बहुत सारी चुनौतियां हैं। मुझे लगता है कि सरकार ने धीरे-धीरे इस क्षेत्र में चलने वाली समस्याओं पर नजर रखी हो। 🤔
 
अरे, यह सुनकर बहुत आश्चर्यकारी है कि सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए नया कानून लाया है। तो अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में शामिल हो सकती हैं? यह अच्छा है या नहीं, इसका सोचते समय मुझे यह सवाल आता है... 🤔

और देखो, सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये की खुरच्ची तय की है, जो इस परमाणु ऊर्जा मिशन के लिए। 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने का लक्ष्य है। यह तय है या नहीं, हमें तीन दशकों बाद पर्याप्त परमाणु ऊर्जा प्राप्त कर पाएंगे? 💡

लेकिन, मुझे लगता है कि सरकार की इस पहल से हमें बहुत फायदा हो सकता है, जैसे कि नए रिएक्टरों से हमारे देश में बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा। और इससे निजी कंपनियां भी हमारे अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। 🚀
 
अगर सरकार ने ऐसा बदलाव लाया तो यह अच्छा होगा। लेकिन इतने बड़े परिवर्तन के बाद भी सारी समस्याएं नहीं दूर होंगी। वास्तव में सरकार को इन पुरानी चुनौतियों को दूर करने के लिए और भी अधिक प्रयास करने होंगे।

परमाणु ऊर्जा से जुड़ी समस्याएं कई सालों से चल रही हैं। सरकार ने ऐसे बदलाव लाने में मदद की तो अच्छा होगा, लेकिन इसके बाद भी इन समस्याओं को दूर करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे।

इसलिए सरकार को इस पर ध्यान रखना चाहिए और ऐसे बदलाव लाने में मदद करनी चाहिए जिससे सभी संबंधित पक्षों की भावनाएं शांति से रहें। यहाँ एक रिपोर्ट है जिसे पढ़ सकते हैं: https://www.ndtv.com/india-news/par...ji-sukhaa-kheenchi-baat-hoti-rahi-hai-2351414
 
परमाणु ऊर्जा के बारे में यह नया कानून तो अच्छा है, लेकिन शायद इसके साथ-साथ हमें अपनी पुरानी परमाणु संयंत्रों की मरम्मत पर भी ध्यान देना चाहिए, नहीं तो इससे और ज्यादा समस्याएं होंगी।

और यह शांति एक्ट, तो अब निजी कंपनियां परमाणु संयंत्र चला सकेंगी, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी विदेशी जैसी कंपनियों से बात करके देखna चाहिए, नहीं तो यह सारा पैसा हमारी खाल में चला जाएगा।
 
परमाणु ऊर्जा पर नया कानून देखकर मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ... 🤔 सोचता है यह तो बड़ी बात होगी कि निजी कंपनियां भी इसमें शामिल होंगी। लेकिन शायद इसके फायदे कुछ होंगे, जैसे कम समय में सुधार कर सकेंगे। और दायित्व व्यवस्था तो अच्छी लग रही है... चरणबद्ध बनाने से पीड़ितों के लिए मुआवजा तय होगा। 🙏
 
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा तय करने की बात अच्छी है। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इसके नीचे कितने पुरानी समस्याएं छिपी हुई हैं? जैसे कि सुरक्षा, विस्फोटक दुर्घटनाओं का खतरा, और पीड़ितों के लिए मुआवजे की बात। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि निजी कंपनियां कैसे व्यवस्था कर रही हैं इन सभी समस्याओं को।
 
परमाणु ऊर्जा कानून ही है इस देश को आजादी दिलाने का एक तरीका, लेकिन यार कौन सा जवाब देगा कि हमें 2033 तक तयार होना पड़ रहा है? पहले हम 10,000 करोड़ रुपये में कुछ भी नहीं बनाने की कोशिश करते, अब 20,000 करोड़ वाले लक्ष्य तो बिल्कुल अलग है। और यार, स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर तैयार करना एक बड़ी बात है, लेकिन पहले हमें क्या बनाना है?
 
बिल्कुल सुना तो आ गया है सरकार ने नया परमाणु ऊर्जा कानून लाया है। मुझे लगता है यह बहुत अच्छी बात है, खासकर जब हमें ऊर्जा की कमी का दौर चल रहा हो। शांति एक्ट नाम सुनकर मुझे अच्छा लगा, जैसे कि सरकार परमाणु ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रही है और हमारे पास अधिक बिजली का विकल्प देने का मनोबल बढ़ा रही है। अब निजी कंपनियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं तो अच्छा होगा, खासकर जब सरकार पर्यावरण और अनुसंधान जैसी चुनौतियों को दूर करने में मदद कर रही है।
 
जो परमाणु ऊर्जा कानून आ गया है वह तो एक अच्छी बात है 🌟। लोगों के सामने आने वाली कई समस्याओं को दूर करने में मदद करेगा। पुरानी चुनौतियों को दूर करने के लिए यह बहुत जरूरी है। अब निजी कंपनियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं जिससे विकास और तकनीक का उपयोग बढ़ सकता है।

लेकिन मुझे लगता है कि सरकार ने इसके लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। तेजी से इसे लागू करने की कोशिश न करें, इससे कुछ गलत हो सकता है। और भी एक बात, यह कानून शायद ही ऐसी किसी भी समस्या का समाधान बनेगा। इसके फायदे और नुकसान दोनों ही देखने की जरूरत है
 
😂🚀 परमाणु ऊर्जा से हमारे भविष्य को लाइट करने का एक बड़ा कदम है! 🔋💡 पर्यावरण की दिशा में बढ़ने के लिए हमें नई ऊर्जा स्रोतों पर विश्वास करना चाहिए। 🌎💚 जैसा कि विजय मल्होत्रा ने कहा है "परमाणु ऊर्जा देश की आजादी और खुशी की किताब है" 👍💥
 
जो लोग कहते हैं कि परमाणु ऊर्जा हमारे भविष्य के लिए खतरनाक है वे सिर्फ बिना समझे चले बोलने की चाल जैसे हैं। अब सरकार ने शांति एक्ट में बदलाव कर दिया है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम अपने पास की ऊर्जा का उपयोग समझदारी से करें। 20,000 करोड़ रुपये का परमाणु ऊर्जा मिशन बहुत ही अच्छी बात है। अब देखेंगे कि हम कितने तेजी से बढ़ते हैं! 🚀
 
बिल्कुल सही है, सरकार ने ऐसा काम किया है जिससे हमें ऊर्जा सुरक्षा और बिजली की मांगों में मदद मिलेगी। अब निजी कंपनियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं ताकि हमारी विकास गतिविधियों में नई ऊर्जा जुटाई जा सके। शायद यह नया परमाणु ऊर्जा कानून हमारे लिए बहुत मददगार साबित होगा। 🌞
 
परमाणु ऊर्जा का भविष्य देखना ही मजेदार लग रहा है 🤩। सरकार ने शांति एक्ट में बदलाव लाने से तो निजी कंपनियों को भी इसमें शामिल होने का मौका मिलेगा, जिससे हमारी ऊर्जा सुरक्षा और बिजली आपूर्ति में सुधार होगा। लेकिन क्या वास्तविकता यही रहेगी कि हम अपने स्वदेशी परमाणु संयंत्रों को कैसे शुरू करेंगे, की इसका पता अभी नहीं चल पाया है 😐
 
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