शशि थरूर केरल कांग्रेस की बैठक में शामिल नहीं हुए: दावा- राहुल गांधी से नाराज; 19 जनवरी को राहुल ने कोच्चि में नाम नहीं लिया

शशि थरूर कांग्रेस मीटिंग में शामिल नहीं हुए, राहुल गांधी से नाराज: 19 जनवरी को राहुल ने कोच्चि में नाम नहीं लिया।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अजीब है... शशि थरूर किस तरह अपनी राजनीतिक जिंदगी को ऐसा सार्थक बनाने में असफल रहे। उन्होंने तभी से सोचा कि लोकतंत्र का विरोध करने से बड़ा संदेश होगा, पर यह बात न केवल भारतीय समाज को हैरान कर देती है, बल्कि पूरे विश्व में भी। राहुल गांधी का क्या फायदा? शशि थरूर जैसे लोगों के साथ खेलने का। मुझे लगता है कि ये दोनों एक जैसी चीजों को बदलने में असमर्थ थे। 19 जनवरी की क्या बात? क्या यह वाकई उनकी राजनीतिक सोच का परिचायक है?
 
मेरे दोस्त बोले थे कि राहुल गांधी जैसे ज्यादातर लोग कांग्रेस पार्टी की मीटिंग में शामिल हो जाते हैं लेकिन इस बार शशि थरूर ना आया। मुझे लगा की राहुल ने शशि से कुछ गलत हो गया होगा, परन्तु कोई भी सही बात नहीं पता है। मेरी बहन ने मुझसे बताया की शशि थरूर एक अच्छे लेखक हैं और उनके खिलाफ कुछ गलत नहीं था। मैं सोचता हूं की राहुल ने शशि पर दबाव डाला होगा, फिर भी मुझे लगता है की राहुल जी को तो बात करनी चाहिए थी। मेरी बहन ने मुझसे कहा की राहुल गांधी एक अच्छे नेता नहीं बन पाए, लेकिन फिर भी हमें उनके प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि अगर शशि थरूर कांग्रेस मीटिंग में शामिल हुए तो फिर भी कुछ बदलाव नहीं आ सकते। क्योंकि सरकार से बात करने वाला कोई भी राहुल गांधी की तरह नहीं है 🤔। वह लोग हमेशा नई दुनिया की बातें करते रहते हैं, लेकिन अपने देश को चुनने में तैयार नहीं। और अब शशि थरूर नाम लेने से भी उनकी पार्टी में बड़ा बदलाव नहीं आयेगा। यह तो बस एक खेल है 👀
 
क्या बात है यह? राहुल गांधी जी शशि थरूर से नाराज़ हुए तो फिर भी उन्होंने कांग्रेस मीटिंग में शामिल नहीं होने का दावा किया। यह तो जरूरी है कि शशि थरूर की बात सुनकर राहुल गांधी जी नाराज़ हुए, लेकिन उनकी खेद व्यक्त नहीं कर रहे? इससे लगता है कि कांग्रेस में और भी गहराई है, जो हमें आश्चर्यचकित कर देती है।
 
बस अनुभवी नेताओं को बदलते समय में तैयार रहना होगा। शशि थरूर जी ने अपना मनोबल और प्रतिबद्धता साबित करने का एक नया तरीका ढूंढ लिया है। अब देखिए, राहुल गांधी जी उनके कदमों पर हैं या नहीं। 19 जनवरी को कोच्चि में नाम नहीं लेना एक बड़ा फैसला था, इससे पहले कि विरोध प्रदर्शन हो सकते थे। लेकिन देखिए, राहुल गांधी जी ने अपने साथियों को शांत करने के बजाय उनके प्रति घृणा का भाव दिखाया। यह एक बड़ा मुद्दा है और साफ़ नहीं है कि राहुल गांधी जी किसने राहुल गांधी को ऐसा कहा।
 
😊 ये तो राहुल जी की राजनीतिक रणनीति है - वो पहले अपने खिलाफ दिखाएं, फिर उनसे बातचीत करें। शशि थरूर जी की वजह से कांग्रेस मीटिंग में न शामिल होना तो उनकी एक अच्छी रणनीति है। वो अपने दिलचस्प बयानों और लेखों की वजह से हमेशा चर्चा में रहते हैं। यह तो उनकी एक मजबूत पकड़ है - लोग उन्हें रोचक बनाए रखने के लिए पढ़ते हैं और देखते हैं।

शशि थरूर जी ने कई बार कहा है कि वो कांग्रेस मीटिंगों में नहीं भाग पाएगे, इसलिए उन्होंने यही फैसला किया। लेकिन राहुल गांधी जी के साथ उनकी राजनीतिक संबंधों की बात करते हुए, तो यह अच्छा है कि दोनों ने अपनी समस्याओं पर खुलकर बातचीत की।
 
अरे वो तो बहुत अजीब बात है 🤔। शशि थरूर जी कांग्रेस मीटिंग में शामिल नहीं हुए, राहुल गांधी से नाराज? यह तो कांग्रेस पार्टी के भीतर कुछ गलत होने का संकेत देता है। क्या उन्हें लगता है कि शशि थरूर जी को उनके खिलाफ आरोप लगाने का मौका मिलने से पहले उनके नाम पर बयान करने की जरूरत नहीं है? 🙄

लेकिन फिर यह भी सच है कि राहुल गांधी जी को अपने पार्टी की चुनौतियों का सामना करने में बहुत मुश्किल हो रही है। उनकी पार्टी में तालमेल बिठाने की जरूरत है, लेकिन उन्हें अपने नेताओं के साथ सहयोग भी नहीं कर पा रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी समस्या है जिसे जल्दी से हल किया जाना चाहिए।
 
ਅਰੇ ਇਹ ਗੱਲ ਪਤਾ ਚਲੀ ਆ ਗਈ ਕਿ ਸ਼ਸ਼ੀ ਠਰੂਰ ਨੇ ਕਾਂਗਰਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਹਿੱਸਾ ਨਹੀਂ ਲਿਆ। ਅਜਿਹਾ ਕਿਉਂ? ਇਹ ਪੁਰਾਣੀ ਗੱਲ ਹੈ, ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਵੱਡੇ-ਵੱਡੇ ਖ਼ਤਰੇ ਦੀ ਬਾਤ ਨਹੀਂ, ਫਿਰ ਵੀ ਸਮਝੋ। ਕੁਝ ਲੋਕ ਸਮਝ ਬੈਠਦੇ ਹਨ ਜਾਂ ਘਟ-ਘਟ ਹੋਣ ਤੱਕ ਰੁਕਦੇ ਹਨ।
 
शायद राहुल जी को लगता है कि अगर शशि थरूर को वह मीटिंग में शामिल करते, तो वो दोनों के बीच से बहुत बड़ी लड़ाई हो सकती है। लेकिन अगर सच्चाई को देखें, तो ये राहुल जी का निर्णय था, क्योंकि शशि थरूर का नेतृत्व पार्टी में खत्म हो गया था।

लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर ऐसा नहीं था तो फिर क्यों नाम नहीं लिया गया। और शायद राहुल जी को लगता है कि अगर वो नाम लेते, तो पार्टी में बहुत बड़ी झगड़ा होगा, जिससे कांग्रेस के भविष्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

उम्मीद है, कुछ समय बाद राहुल जी दिखाई देंगे और हमें बताएंगे कि वो नाम लेने का फैसला क्यों नहीं किया।
 
बात बुरी सी लग रही है... शशि थरूर जैसा सीनियर नेता अब सीट छोड़ देने को तैयार हैं? यह कहानी हमारे पार्टी की दिशा पर सवालचिन्ह है। राहुल गांधी जी को खेद है कि उनके विचारों में ऐसी बदलाव आ गया है। लेकिन फिर भी, पार्टी के नेताओं को अपने समर्थकों की उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
 
क्या देखा तो राहुल गांधी और शशि थरूर बीच तकरार, बस इतना है कि चुनावों का समय आ गया है। राहुल को लगता है कि अगर सोनिया जी का नहीं चला, तो वह भी प्रमुख बन सकते थे। लेकिन अब ये सवाल उठता है कि अगले चुनाव में कौन विरासत में आता है। शशि थरूर को लगता है कि राहुल जी को प्रधानमंत्री पद पर पहुंचाने के लिए उसे अपनी टीम से खुद सीधे बात करनी चाहिए।
 
मैं तो सोचता हूँ कि शशि थरूर जैसे लोगों की बात समझ में आती है, पर फिर भी उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक निर्णय मुझे आश्चर्यचकित करते हैं। कांग्रेस मीटिंग में शामिल नहीं होना उनकी नेतृत्व क्षमता को कम करने की बात नहीं है, बल्कि यह उनकी व्यक्तिगत पसंद की बात है। लेकिन राहुल गांधी जैसे लोगों पर इस तरह की आलोचना करने से मुझे लगता है कि फिर भी कुछ गलत हुआ है, जिसे सुधारने की जरूरत है।
 
बड़ा दुख 🤕 क्या हुआ कांग्रेस पार्टी से शशि थरूर निकल गए? 🚫 राहुल गांधी पर उनकी नाराजगी 😒 तो अच्छा है की उन्होंने अपनी बात कह दी, लेकिन अब यह सवाल है की पार्टी में वापस आने का संकेत मिलेगा या नहीं 🤔। शशि थरूर ने कई अच्छे काम किए हैं उनकी आलोचना करना जरूरी नहीं है, लेकिन अब यह समय था की उन्हें अपनी बात समझानी चाहिए और पार्टी में वापस आने का रास्ता ढूंढना चाहिए 💡
 
शायद कुछ तानाशाही का प्रदर्शन कर रहे हैं 🤔, लेकिन दिल में सच्चाई बैठी है। कांग्रेस मीटिंग से वंचित होना एक बड़ा निर्णय था, लेकिन इसके पीछे कुछ और जरूरी जानकारी भी हो सकती है 🤐
 
मुझे लगता है कि आजकल के नेताओं को और भी शिक्षित होने चाहिए। शशि थरूर जी ने अपनी राय व्यक्त करने से मना कर दिया, तो फिर क्यों? यह तो बहुत ही अजीब लग रहा है। 19 जनवरी को राहुल गांधी कोच्चि में नाम नहीं लेने से भी हमें जो एहसास हुआ, वह है कि उन्हें अपने दिल की बात कहने से परेशानी होती है। मुझे लगता है कि अगर वे अपनी राय व्यक्त करें, तो और भी लोग उनकी बात समझेंगे।

किसी भी नेता को अपने दिमाग का सही फैसला करने का मौका मिलना चाहिए।
 
बातचीत करने वालों का यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है... शशि थरूर और राहुल गांधी के बीच की स्थिति, तो बस मन में सवाल उठते हैं ...

क्या थरूर ने खुद को भूल गया? या फिर उनकी पार्टी की रणनीति में बदलाव हुआ? ... 19 जनवरी को वहां कितना जोश और उत्साह था, तो वैसे तो उसके बाद क्या हुआ?

राजनीति में ऐसी कई गड़बड़ी देखने को मिलती है, कभी तो लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं ... और फिर कभी वो सभी सवालों का जवाब देते हैं। शायद इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा।
 
क्या तो राहुल गांधी की बातों सुनने का एहसास हुआ? 19 जनवरी पर उनके नाम नहीं लेने का मतलब यही है कि उन्हें शशि थरूर की सरकार से खुश नहीं हैं ? 🤔

मुझे लगता है कि राहुल गांधी को अपने मंत्रिमंडल के निर्माण पर विचार करना चाहिए। अगर शशि थरूर कांग्रेस मीटिंग में नहीं गए तो यह उनके साथ मतभेदों का प्रतीक है। लेकिन राहुल गांधी को अपने खुद के विचारों पर विश्वास करना चाहिए और सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए। 🙅‍♂️

क्या तुम्हें लगता है कि राहुल गांधी को अपने मंत्रिमंडल बनाने के लिए थोड़ी और देर मिलेगी?
 
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