शायद राहुल जी को लगता है कि अगर शशि थरूर को वह मीटिंग में शामिल करते, तो वो दोनों के बीच से बहुत बड़ी लड़ाई हो सकती है। लेकिन अगर सच्चाई को देखें, तो ये राहुल जी का निर्णय था, क्योंकि शशि थरूर का नेतृत्व पार्टी में खत्म हो गया था।
लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर ऐसा नहीं था तो फिर क्यों नाम नहीं लिया गया। और शायद राहुल जी को लगता है कि अगर वो नाम लेते, तो पार्टी में बहुत बड़ी झगड़ा होगा, जिससे कांग्रेस के भविष्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
उम्मीद है, कुछ समय बाद राहुल जी दिखाई देंगे और हमें बताएंगे कि वो नाम लेने का फैसला क्यों नहीं किया।