SIR को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 5 राज्य और 1 UT में बढ़ाई समयसीमा

चुनाव आयोग ने गुरुवार को एसआईआर (सर्टिफाइड इवेंट रिकॉर्डिंग) के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में समयसीमा बढ़ाई गई है। इससे पहले, कई राज्यों के चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर के लिए समयसीमा को बढ़ाने की मांग की थी।

चुनाव आयोग ने यह फैसला सुनिश्चित करने के लिए किया है कि राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड किया जा सके। एसआईआर एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिससे चुनाव आयोग और प्रशासन दोनों को चुनाव से संबंधित तथ्यों को निर्धारित करने में मदद मिलती है।

अब, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में समयसीमा बढ़ाई गई है। इससे राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी।
 
मुझे लगता है कि यह फैसला बहुत अच्छा है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एसआईआर न केवल चुनाव संबंधी घटनाओं को रिकॉर्ड करने में मदद करता है, बल्कि हमारे देश की गणराज्यीय परंपरा और पारदर्शिता को भी मजबूत बनाता है।
 
🤔 यह तो अच्छी बात है 🙌 कि समयसीमा बढ़ाई गई है, अब चुनाव आयोग और प्रशासन दोनों को चुनाव से संबंधित तथ्यों को निर्धारित करने में मदद मिलेगी। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाने से पहले इसकी व्यवस्था अच्छी तरह से तैयार नहीं हो सकती है। 🤓

मुझे लगता है कि यह फैसला न केवल चुनाव आयोग के लिए बल्कि राज्यों में भी मददगार साबित होगा। अब राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी, जिससे चुनाव से संबंधित मामलों को हल करने में भी आसानी होगी। 📊

लेकिन यह तो एक अच्छा प्रयास है और अब देखना होगा कि राज्यों में एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाने से पहले इसकी व्यवस्था अच्छी तरह से तैयार हुई है। 🤞
 
मुझे लगता है कि इन्हीं समयसीमा बढ़ाने की बात सुनकर मेरा दिमाग स्ट्रोकवाला डॉक्टर को याद आ गया 🤯 तो वो कैसे करते थे अपने मरीजों को ठीक करने के लिए इतनी समय देते थे। अब यह एसआईआर बढ़ाने से राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को अच्छे से रिकॉर्ड होना आसान होगा, लेकिन मुझे लगता है कि अगर मरीज़ को ठीक करने के लिए वो इतनी समय देते थे, तो वह अपने मरीजों के पास फिर से जाकर उनकी दवाइयाँ बदल देंगे। और अब एसआईआर में ये देरी नहीं होगी, तो मरीज़ खुश होंगे 🙃
 
बड़ा फैसला लिया गया है समयसीमा बढ़ाने का!! अब तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाई है। इससे पहले कई राज्यों के चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर के लिए समयसीमा को बढ़ाने की मांग की थी। 🤝

अब से सभी राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। यह एक बड़ा कदम है और इससे हमारे देश के चुनाव प्रक्रिया को और भी सुधारने में मदद मिलेगी। 📈
 
मुझे लगता है कि यह फैसला तो जरूर हुआ होगा, लेकिन अब क्या हमारे चुनाव आयोग की देखभाल करेंगे? एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाने से पहले, मैं कहीं भी नहीं था कि यह फैसला किया गया होगा। अब मुझे लगता है कि सबकुछ ठीक है और चुनाव आयोग वाकई तैयार हो गया है। लेकिन, मुझे लगता है कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि सभी राज्यों में एसआईआर के लिए समयसीमा एक समान हो।
 
बात है चुनाव आयोग का यह फैसला, अब तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की तरह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी समयसीमा बढ़ाई गई है, तो सुनिश्चित है हमारे चुनाव संबंधी घटनाओं को अच्छी तरह से रिकॉर्ड किया जाएगा 📝। इससे पूरे देश में चुनाव संबंधी घटनाओं को एक्सेस करना आसान होगा, और हमारे नेताओं को अपनी सरकारों में अच्छे विकास के लिए काम करने पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। 🌟 साथ-साथ यह हमारे देश के विकास में भी एक महत्वपूर्ण उपकरण होगा, और हमारे नागरिकों को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रहने में मदद करेगा। 🗿
 
मेरे दोस्त, यह फैसला बिल्कुल सही है 🤝। चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाने से राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। इससे हमारे देश के चुनाव प्रणाली में विश्वसनीयता और ईमानदारी बढ़ेगी।
 
मैंने देखा, अब चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ा दी, तो फिर भी हमारे देश के चुनावों में एक्सपीडिटेड सीटिंग्स नहीं होने वाली ? 😂😜

मुझे लगता है कि अब चुनाव आयोग ने राज्यों में समयसीमा बढ़ाने से चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। लेकिन अगर हमारे देश के पास चुनाव आयोग नहीं होता, तो तो फिर भी हमारे देश के चुनावों में एक्सपीडिटेड सीटिंग्स होंगी, निश्चित! 😂
 
मुझे लगता है कि यह फैसला एक बहुत बड़ा मास्क है, जिसके पीछे कुछ और काम हो सकता है। समयसीमा बढ़ने से चुनाव आयोग को और अधिक निगरानी करने की सुविधा मिलेगी, लेकिन यह सवाल उठता है कि यह वास्तव में चुनाव संबंधी घटनाओं को रिकॉर्ड करने के लिए है, या इसके पीछे कोई और एजेंडा है। 🤔
 
🤔 यह फैसला तो हमेशा से चल रहा था, लेकिन अब तो ये वास्तविकता। चुनाव आयोग ने समझा है कि समयसीमा की बढ़ती मांग क्यों नहीं मानी जा रही थी। इससे पहले यह सवाल उठता था कि क्या हमारे देश में चुनाव संबंधी घटनाओं को रिकॉर्ड करने में कमजोरी है।अब तो ये साबित होता है कि हमारे देश के नेताओं को भी इस तरह की जरूरतों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि अब कैसे चुनाव आयोग और प्रशासन दोनों मिलकर चुनाव संबंधी घटनाओं को रिकॉर्ड करेंगे। क्या ये सब सारे नेताएँ एक-दूसरे के साथ अच्छे संबंध बनाए रख पाएंगी? 😐
 
🤩 यह फैसला बिल्कुल सही था, अब हमारे देश में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी, जिससे हमें अपने देश की सच्चाई को समझने में मदद मिलेगी।

मैं यह तो सोचता था कि क्यों नहीं था, चुनाव आयोग ने बहुत अच्छा फैसला लिया है और अब हमारे देश में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी।

मैं सीएनएनआई और आईएफएस की बहुत बड़ी प्रशंसा करता हूं, ये दोनों नाम ही चुनाव आयोग की भलाई को समझते हैं।
 
ਇੱਕ ਬੁੱਧੀ ਵालੇ ਚुनाव आयोग दਰ ਨੇ ਫਿਰੋਸ ਸ਼ਹਿਦ ਤਾਂ ਲਗਭਗ 10 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਕੀਤੀ ਕੁਝ ਵਧੇਰੇ ਯੋਜਨਾ ਨਾਲ ਆਈ, ਉੱਥੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਪਹਿਲੂ ਵਿਕਸਤ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਸਮਝੋ, ਜ਼ਿਆਦਾ ਤਰਲ ਅਤੇ ਬਹੁਪਰਕਾਸ਼ੀ ਰਿਕਾਰ्डਿੰਗ ਨਾਲ ਚੋਣਯੋਗਤਾ ਵਧੇਰੇ ਅਖ਼ਬਾਰਾਂ ਸਮੇਤ ਪਹਿਲੂ ਨੂੰ ਦਰਸ਼ਕ ਲਈ ਮਜਬੂਤ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਮਿਲੇਗੀ।

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बड़े बड़े चुनाव आयोग ने तो अब एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ा दी है 🤝। इससे पहले, कई राज्यों के चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर के लिए समयसीमा को बढ़ाने की मांग की थी। अब तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में समयसीमा बढ़ाई गई है। इससे पहले यह तय नहीं कर पाया था कि चुनाव संबंधी घटनाओं को कितना समय लेगा। अब यह तय हुआ है कि ऐसी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी।
 
वाह! यह तो बहुत अच्छी खबर है 🤩। अब एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाई गई है, जिससे हमारे चुनाव आयोग और प्रशासन दोनों को चुनाव से संबंधित तथ्यों को निर्धारित करने में मदद मिलेगी। यह बहुत जरूरी है कि हमारे चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड किया जाए। इससे हमारे देश की सच्चाई और ईमानदारी को बनाए रखने में मदद मिलेगी। मैं इस फैसले से बहुत खुश हूँ और उम्मीद करता हूँ कि यह हमारे देश के विकास में मदद करेगा।
 
बड़े बड़े फैसले लेने की बात है, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे चुनाव संबंधी सिस्टम को और भी अच्छा बनाने के लिए इन बदलावों की जरूरत थी। अब तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाई गई है, जो एक अच्छी बात है। इससे चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। और यह तय होना चाहिए कि कैसे हम अपने चुनाव सिस्टम को और भी अच्छा बना सकते हैं।
 
मैंने देखा है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाई है, जो कि बहुत अच्छी बात है 🙌। अब राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सकता है कि हर घटना का सही आकलन लिया जाए। इससे चुनाव आयोग और प्रशासन दोनों को बहुत फायदा होगा।
 
कुछ भी इस फैसले को ध्यान में रखते हुए, लगता है कि यह अच्छा है। लेकिन आपने चुनाव आयोग के बारे में इतनी जानकारी नहीं दी। कब से एसआईआर की समस्या है? क्या पिछले 10 सालों में इन राज्यों में चुनाव आयुक्तों ने इस पर बात नहीं की? यह जानने की जरूरत है कि यह फैसला कब से लाया गया था।
 
मैंने देखा है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए समयसीमा बढ़ाई है, जिससे हमारे देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव संबंधी घटनाओं को सटीक रूप से रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी।

मैंने एक छोटा सा बार ड्रैग बनाया है जिसमें समयसीमा बढ़ाने की तस्वीर दिखाई गई है।
 
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