SIR मुद्दे पर चुनाव आयोग से मिले 10 टीएमसी सांसद: डेरेक ओ ब्रॉयन बोले- ECI के हाथ खून से रंगे; हमने 5 सवाल पूछे, जवाब नहीं मिला

चुनाव आयोग से मिलने का फैसला करते हुए TMC सांसदों की टीम ने शुक्रवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद TMC सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन ने कहा है कि ECI के हाथ खून से रंगे हैं। उन्होंने कहा, "हमने सबसे पहले उन्हें SIR प्रोसेस की वजह से लगभग 40 मरे हुए लोगों की लिस्ट सौंपी। हमने मीटिंग यह कहकर शुरू किया कि मिस्टर कुमार और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के हाथ खून से रंगे हैं। हमने पांच सवाल पूछे, किसी का भी जवाब नहीं मिला।"

TMC ने SIR प्रक्रिया को लेकर कई आरोप लगाए हैं, जिनमें एक सिर्फ मर्डर (हत्या) के रूप में वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने की बात शामिल है।

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "यह कोई कहानी नहीं बल्कि देश के सामने एक कड़वा सच है। इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा समय लेकर SIR करवाओ।"

इस मामले पर विपक्ष लगातार सवाल उठ रहा है, और विपक्ष 1 दिसंबर से शुरु हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र (विंटर सेशन) में इस मुद्दे पर हंगामा कर सकता है।

SIR का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है, और चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं।

इसके अलावा, 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के SIR का दूसरा फेज चल रहा है, जिसकी फाइनल वोटर लिस्ट 7 फरवरी 2026 को पब्लिश होगी।
 
सिर्फ इतना तो कहो कि ECI की सीरियसिटी और ईमानदारी देखने में लग रही है। तो ये SIR प्रक्रिया तो फ्रॉड की तरह नहीं लग रही है... 🤔
 
मुझे लगता है कि तुम्हारे चुनाव आयोग से मिलने की बात कर रहे TMC सांसदों की टीम की बात करने पर विचार करो, लेकिन उन्हें SIR प्रक्रिया को लेकर इतने आरोप लगाने का क्या नाम है? मुझे लगता है कि तुम्हारे देश में चुनाव आयोग से मिलने जाने वाली हर बात में एक ही कहानी होती है, लेकिन कोई इस बात पर ध्यान नहीं देता कि हम सब एक दूसरे को जानते हैं और एक दूसरे की बात सुनते हैं।

किसी ने भी उन्हें PSE की वजह से लगभग 40 मरे हुए लोगों की लिस्ट नहीं सौंपी थी, तो फिर वे इतने आरोप लगा रहे हैं? मुझे लगता है कि तुम्हारे देश में चुनाव आयोग को भी अपनी गलतियों को स्वीकार करने और सच्चाई से बात करने की जरूरत है।
 
मुझे ये बात बहुत चिंताजनक लगी कि चुनाव आयोग से मिलने का निर्णय और भी बढ़ गया है। तो लोगों की मतदान प्रक्रिया में इतना बदलाव क्यों हुआ? तो मेरे दोस्त ने अपनी बहन की वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो क्या उसका फिर से मतदान होगा? मुझे लगता है कि अगर मैं भी अपने रिश्तेदारों की वोटर लिस्ट देखूंगा तो बहुत सारे लोगों का नाम कट जाएगा।

मुझे लगातार सवाल उठ रहा है कि चुनाव आयोग क्या कर सकता है? अगर हमें लगता है कि मतदान प्रक्रिया में बदलाव हुआ है तो क्या हमने इसकी शिकायत क्यों नहीं की? मुझे लगातार ये सोचने की जरूरत है कि मैं अपने राज्य में मतदान प्रक्रिया में बदलाव देखूंगा या नहीं।

मेरे पति ने मुझसे कहा है कि अगर मैं भी चुनाव आयोग से मिलने जाऊं तो कुछ नया होने की शंका नहीं रह जाएगी। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा फैसला है।

मेरे दोस्त ने अपनी बहन की वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो उसने चुनाव आयोग से शिकायत क्यों नहीं की? मुझे लगता है कि अगर हमें लगता है कि मतदान प्रक्रिया में बदलाव हुआ है तो हमें इसकी शिकायत करनी चाहिए।

मुझे लगता है कि इस मामले पर विपक्ष और भी आगे बढ़ सकता है। मैंने सुना है कि विपक्ष 1 दिसंबर से सत्र शुरू कर रहा है और इस मुद्दे पर हंगामा कर सकता है।
 
नाहीं तो यह बातें सुनकर मुझे एहसास होता है कि भ्रष्टाचार जैसा मामला कितना गहरा चल रहा है। पार्टियों ने अपने नेताओं की जानबूझकर हत्या करने की बात कह देनी चाहिए, तो नहीं तो यह एक बड़ा घोटाला है 🤥

मैंने कभी नहीं सोचा था कि चुनाव आयोग भी इस तरह में पड़ जाएगा। इससे पता चलता है कि हमारे देश में बहुत बड़ी समस्याएं हैं और उन्हें हल करने के लिए हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना चाहिए।
 
मैंने सोचा कि चुनाव आयोग और उनकी प्रक्रियाएं कितनी जटिल हैं। कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारे देश में इतनी जटिलताएं बन गई हैं, कि हम अपनी स्वतंत्रता भी नहीं समझ पाते। यहाँ पर लोगों को बेचारा मरने का मौका मिलता है, ताकि चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को समझाने में मदद मिले। 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपनी प्रणाली को सुधारने की जरूरत है। अगर हमारे नेता सच्चाई और न्याय को देखने में सक्षम हैं, तो फिर शायद इस तरह की गड़बड़ी नहीं होती।
 
क्या ये तो बिल्कुल सही दिख रहा है? ECI से मिलने का फैसला करना और तुरंत SIR प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाना... यही न कोई अच्छा निर्णय, न ही अच्छी। ये TMC की बातें हैं और वे इस मामले में अपने खिलाफ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई क्या है?
 
मैंने तो कभी नहीं सोचा था कि चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया से इतना डर जाता है कि वे खूनसे रंगे हुए लगते हैं। लेकिन सुप्रिया श्रीनेत की बात सुनकर यह देखना मुश्किल लग रहा है कि चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया किस दिशा में जाने वाली है। तो यह सवाल उठता है कि SIR प्रक्रिया में इतनी गड़बड़ी क्यों हुई?

मैंने सोचा था कि SIR प्रक्रिया एक बार फिर से लागू होने पर हमें इससे निपटने के तरीके ढूंढने की जरूरत होगी, जैसे कि हमने कभी नहीं सोचा था।
 
जो भी हुआ उसका खून से रंगा गया। ECI की तुलना खून से रंगी गई एक चप्पल से करने में बड़ी दुर्बलता है।

श्रीनेत जी ने सही कहा, यह समय थोड़ा लेकर SIR करवाओ। जल्दबाजी से सब कुछ नहीं चलेगा। संसद में सवाल उठाएं, ECI को जवाब देने का समय है।
 
चुनाव आयोग से मुलाकात करने का फैसला तो एक बड़ी बात है! मैं समझता हूँ कि TMC सांसदों ने अपनी चिंताओं के बारे में बात की है, लेकिन अगर वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने की बात तो थोड़ी देर लेकर सीर प्रोसेस करवा देते, तो फायदा क्यों नहीं होता।
 
मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि चुनाव आयोग से मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने इतनी गंभीर आरोप लगाए हैं। अगर सच्चाई बताई जाए तो इससे लोकतंत्र पर भारी प्रभाव पड़ेगा। मेरा विचार है कि इससे पहले SIR प्रक्रिया को लेकर सबकुछ स्पष्ट होना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं न हों।
 
क्या यार, यह तो बहुत बड़ी बात है! ईसीटीई से बात करते समय तMC की टीम ने इतना साहस दिखाया है कि लोगों को उम्मीद मिल गई है। और सुप्रिया श्रीनेत जी ने बोला है कि यह कोई कहानी नहीं बल्कि सच्चाई है। सिर्फ इतना कहने में आसान नहीं है, लेकिन हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग और ईसीटीई इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें। फिर से बोलते हुए, यह तो एक बड़ा मुद्दा है और हमें इसके पीछे जाने की जरूरत है।
 
ECI के साथ बात करने के बाद तृणमूल कांग्रेस के लोग अब ECI को खून से रंगे हुए मान रहे हैं 🤣. क्या ये उनकी नई पार्टी की नीति नहीं थी, जो चुनाव में जीतने के लिए हर किसी को खून पसीना आयेगा? 😂.

मुझे लगता है कि SIR प्रक्रिया से पहले तो ये लोग नींद में भी वोटर लिस्ट की जांच नहीं कर सकते थे, आज तो वो खुद खून पसीना आ रहे हैं 💦. और सबसे बड़ी बात, SIR प्रक्रिया से पहले तो ये लोग कहेंगे थे कि हमारी नीति शांतिपूर्ण है, लेकिन आज वो चुनाव में जीतने के लिए हर किसी को डराने लग रहे हैं 😳.
 
यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है 🤔 कि चुनाव आयोग से ऐसी गलती कैसे हुई? SIR प्रक्रिया में इतनी गड़बड़ी होने का मतलब है कि हमारे देश में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। और नीतीश कुमार जी के बोल सुनकर यह तो बहुत ही चिंताजनक है 😬 उनकी बात से पता चलता है कि उन्हें ऐसी गलतियों के लिए माफी मांगनी पड़ रही है, लेकिन इसका मतलब है कि वे जानते हैं कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है।

इससे हमें सोचने पर मजबूर होना चाहिए कि हमारे देश में लोकतंत्र की स्थिरता कैसे बनाए रखी जाए, और ऐसी गलतियों से हम कैसे बच सकते हैं? यह तो एक बहुत बड़ा सवाल है जिसका जवाब हम सभी से मांगना चाहिए।
 
मुझे यकीन नहीं है कि चुनाव आयोग ने तो मिलकर इतने लोगों का खून लगा दिया होगा। यह सिर्फ एक बड़ा मंच बन गया है। और विपक्ष ने भी इस पर बोलने का बहुत समय नहीं दिया क्या? मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को इन सभी आरोपों का जवाब देना होगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो यह बड़ा सवाल उठता है। और सबसे बड़ा सवाल यह है कि 7 फरवरी को वोटर लिस्ट जारी किए जाने के बाद भी हमें अभी तक इन आरोपों का जवाब नहीं मिल पाया है।
 
बोलते-बोलते यह सब भी देख गया कि चुनाव आयोग में कुछ खास क्या जानबूझकर न होने लगा है...? 🤔 यार, 40 मरे हुए लोगों की सूची कैसे आ गई थी, यह तो कोई मजाक नहीं है। और अगर ECI के हाथ खून से रंगे हैं तो फिर क्या चुनाव आयोग है? 🙄

कुछ दिनों पहले, बोलते हुए विपक्षी दलों ने भी SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी, लेकिन जब मामला तेजी से बढ़ता गया, तो सब कुछ अपने-अपने फायदे के लिए दोनों पक्षों ने फैसला कर लिया है।

अब संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष 1 दिसंबर से इस मामले पर हंगामा कर सकता है, और अगर सुप्रीम कोर्ट भी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों से डरने लगेगा, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन जाएगा।

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग में एक छोटा-सा बदलाव जरूरी है, और अगर वह बदलाव जल्द ही भेज दिया जाता, तो सब कुछ ठीक होता। लेकिन अगर नहीं तो... फिर यह सिर्फ एक चुनाव घोटाले की तरह ही समाप्त होगी।
 
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