SIR पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रक्रिया पारदर्शी हो: चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता; EC बोला- हमें गाली देकर इलेक्शन जीतना फैशन बना

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (EC) से कहा कि SIR प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, उनकी जांच करना न्यायसंगत और सही है। यह दावा EC द्वारा किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए।

चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट की जांच करना NRC (नागरिकता रिकॉर्ड) की तरह एक महत्वपूर्ण काम है और इससे संविधान को बनाए रखने में मदद मिलती है। यह दावा याचिकाकर्ताओं ने किया था, जिन्होंने कहा था कि प्रक्रिया में 'ड्यू प्रोसेस' नहीं अपनाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इससे संविधान को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में जिसके नाम कटे हैं, उनकी जांच करना न्यायसंगत और सही है।

इस बीच, चुनाव आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया NRC की तरह एक महत्वपूर्ण काम है और इससे संविधान को बनाए रखने में मदद मिलती है।
 
मेरी राय तो यही है, चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, उनकी जांच करनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही इस प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना जरूरी है, ताकि यह जांच वोटरों तक पहुंच जाए और उनकी राय भी मिल सके। इससे हमें अपने देश को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
 
😂👀 SIR प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, वे तो पहले टिकट बेचते थे 🚂💸, अब फिर से ड्यू प्रोसेस करने की जरूरत है! 😆
 
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग की बात समझ में नहीं आ रही है, अगर वोटर लिस्ट की जांच करना एक महत्वपूर्ण काम है तो तो यह तो सिर्फ गैर-नागरिकों के नाम कटते हुए सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, यह तो संविधान के लिए खतरा नहीं है।
 
न्यायिक आदेश निकलने पर दिलचस्प है 🤔। यह तो सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी वोटर लिस्ट में केवल प्रासंगिक और अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हों। इससे हमारे समाज में शुद्धता आ जाएगी। लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि NRC जैसी प्रक्रिया से हम अपने देश के नागरिकों को अलग कर सकते हैं और उनके अधिकारों की छीन खा सकते हैं। इससे बात तो गलत हो गई। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी वोटर लिस्ट में केवल योग्य मतदाताओं के नाम हों और उनकी जांच-जांच पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से हो।
 
बस एक बात, चुनाव आयोग को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यह प्रक्रिया तो संविधान को बनाए रखने में ही मदद करती है, लेकिन इसके पीछे कुछ भी छिपा नहीं है। तो फिर NRC जैसी प्रक्रिया को अपनाकर, वोटर लिस्ट की जांच करने से पहले सबकुछ साफ कर देना जरूरी है। यही हमारे देश की स्वतंत्रता और न्याय की रक्षा में मदद करता है 🙏
 
क्या ये वाकई सही तरीका है? चुनाव आयोग कैसे पता लगाता है कि कौन लोग वोट नहीं देने जा रहे हैं? इसका परिणाम इतना बड़ा होने से किसी को भी डरना चाहिए, यह तो जरूरी है...
 
बात तो ये है कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी होती है लेकिन न्यायपालिका भी अपनी जांच कर लेती है, फिर क्यों? यही तो सिस्टम की खामी है। हमें सोचने की जरूरत है कि वोटर लिस्ट में गलतियाँ कैसे आ सकती हैं और इससे संविधान को कैसे नुकसान पहुंचता है। हमें अपनी ताकतें इकट्ठा करनी चाहिए और अपने देश के भविष्य के लिए लड़ना चाहिए।
 
तो वाह! लोगों को जानना चाहिए कि चुनाव आयोग का यह नियम तो भारतीय मतदाताओं के लिए कितना फायदेमंद है... नहीं, नहीं! मैं सोच रहा था कि इससे बहुत से लोगों की जानकारी कट जाएगी, जैसे वोटर की सूची में उनका नाम नहीं आता। यह तो एक बड़ा समस्या है और चुनाव आयोग को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि इससे मतदाताओं की गोपनीयता को कैसे बचाया जाए... और इसके अलावा, यह सुनिश्चित करना भी चाहिए कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हो। 🤔
 
जैसे कभी मतदाताओं के नाम टिप्पणी पर ध्यान दिया जाता, अब तो यह ऐसा लग रहा है जैसे सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी के नाम पूरी तरह से पता होने चाहिए। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी ऐसी भी बातें होती हैं जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी है। यह सब एक पुराने ट्रेंड से शुरू हुआ था, जब हमारे देश के पास मतदाता सूची नहीं थी, और अब तो यह सारी चीजें बदल गई हैं। लेकिन मुझे लगता है कि इस बारे में चर्चा करना जरूरी है, क्योंकि हम अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए हर कदम पर सावधान रहना चाहिए। 🤔
 
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने दफ्तर में जांच करने वालों की सूची पारदर्शिता से भरपूर होनी चाहिए, नहीं तो यह संदेह बनाता है। मैं समझता हूं कि NRC जैसी प्रक्रिया में लोगों के नाम कट सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें उनकी जांच करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह तो सही है, लेकिन थोड़ी देर में फिर से इस बात पर विचार करना चाहिए। अगर हमारे पास NRC जैसी प्रक्रिया है, तो शायद हमें अपने वोटरों की जांच करने के लिए एक अलग तरीका ढूंढना चाहिए, जिससे हर किसी को समान अवसर मिले।

क्या हमारी पारदर्शिता पर और भी ध्यान देना चाहिए? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी SIR प्रक्रिया में हर किसी को समान अधिकार मिले।

और, मुझे लगता है कि हमें अपने वोटरों की जांच करने के लिए एक नया तरीका ढूंढना चाहिए, जिससे हमारे संविधान को बनाए रखने में मदद मिले।

😐
 
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