Srinagar: डल झील की दीवारों को खोखला कर रहे हैं चूहे... हादसे का खतरा, पिछले साल हो चुकी हैं दो दुर्घटनाएं

सड़कों पर दरारें तो आम बात है, लेकिन यहां तो डल झील की दीवारों में भी चूहों ने छेद खोद लिए हैं। सड़क और दीवार के बीच गहरे पेड़ों के पन्हारे हुए पत्थरों से बनाए गए चूहों के द्वारा इन दरारों में खाने की जाना शुरू हो गया था।

चूंकि इस तरह की समस्या पहली बार नहीं हुई है, लेकिन यहां घाट 17 के पास स्थिति तो खास तौर पर चिंताजनक है। फरवरी 2025 में इसी तरह के कटाव के कारण फुटपाथ का एक हिस्सा गिर गया था, जबकि सितंबर 2025 में बुलेवार्ड रोड पर डल झील की दीवार का एक हिस्सा गिर गया था।

पर्यटकों के लिए ठीक है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय सीमेंट व अन्य मजबूत सामग्री का उपयोग करके पुनर्निर्माण करें। लेकिन पर्यटकों ने अपनी हरकतों से दीवारों को और भी कमजोर बना रहे हैं।

इस समस्या की मूल वजह यहां खाने के अस्थायी स्टॉल, ठेले और रेहड़ियां लगती हैं जहां पर वे खाने का कचरा और बचा खाना दीवारों के सहारे ही डाल देते हैं।
 
मुझे लगता है कि ये समस्या निकलने में एक अजीब तरीके से पूरा होता है। पहले तो यह दरारें फटती हैं लेकिन अब खाने के स्टॉल की वजह से दीवारें और भी कमजोर हो रही हैं। मुझे लगता है कि अस्थायी मरम्मत करने से पहले इन स्टॉलों को हटाना चाहिए। पर, यह तो आसान नहीं होगा। लेकिन मैं सोचता हूं कि अगर हमें अपने आप से प्यार करें तो हम अपनी दीवारों और सड़कों की सेवा करने का जरूरी प्रयास करते।
 
सारे लोग इस समस्या से निपटने के लिए एक दूसरे पर भरोसा करेंगे, लेकिन मुझे लगता है कि यह समस्या केवल खाने के अस्थायी स्टॉल और उनकी इस तरह की जिद है, नहीं तो सारी दीवारों को टूटने का कारण बन रहे भी हैं। लेकिन फिर, अगर हम पर्यटकों को ठीक से समझें तो वे बिल्कुल सही मायने में अस्थायी मरम्मत का उपयोग कर रहे हैं, बस इतना है कि उनकी हरकतों से दीवारों को और भी कमजोर बना रहे हैं तो यही समस्या है।
 
मुझे तो लगता है कि सरकारी सड़कों पर दरारें तो आम बात है, लेकिन ये डल झील की दीवारों में भी चूहों ने छेद खोद लिए हैं... यह तो क्या है ... पेड़ों के पत्थरों से बनाए गए चूहों के द्वारा इन दरारों में खाने की जाना शुरू हो गया था...

मुझे लगता है कि यह समस्या पहली बार नहीं हुई है, लेकिन घाट 17 के पास स्थिति तो खास तौर पर चिंताजनक है ... फरवरी 2025 में फुटपाथ का एक हिस्सा गिर गया था, जबकि सितंबर 2025 में बुलेवार्ड रोड पर डल झील की दीवार का एक हिस्सा गिर गया था...

मुझे लगता है कि पर्यटकों ने अपनी हरकतों से दीवारों को और भी कमजोर बना रहे हैं ... खाने के अस्थायी स्टॉल, ठेले और रेहड़ियां लगती हैं जहां पर वे खाने का कचरा और बचा खाना दीवारों के सहारे ही डाल देते हैं... यह तो चूहों के लिए बहुत अच्छा माहौल है...

मुझे लगता है कि सरकार को अस्थायी मरम्मत के बजाय सीमेंट व अन्य मजबूत सामग्री का उपयोग करके पुनर्निर्माण करें... और पर्यटकों को अपनी हरकतों में सावधानी बरतनी चाहिए ... 🚨
 
मुझे लगा कि यह समस्या नाहीं रोकने के लिए पर्यटक जिम्मेदार नहीं हैं। वे तो सिर्फ अपने खाने का कचरा फेंकने में चोरी कमाल कर रहे हैं 🤣। अगर हमारे पास ऐसे स्टॉल या ठेले न होते जahan पर खाने का कचरा फेंका जाए तो शायद यह समस्या नहीं पड़ी होती। लेकिन हमारे देश में चोरी-फोरी का राज है 🤦‍♂️
 
मुझे लगता है कि अगर सरकार ना तो पुरानी सड़कों और दीवारों की मरम्मत करे तो फिर दीवारों के कटाव की समस्या नहीं होती। लेकिन मैं समझता हूँ कि अस्थायी मरम्मत जरूरी है जैसे कि सीमेंट और अन्य मजबूत सामग्री का उपयोग करके पुनर्निर्माण करें। लेकि पर्यटकों ने यह सोचकर दीवारों को कमजोर बना दिया है कि अस्थायी स्टॉल लगाएं और वहाँ खाने का कचरा डालें। 🤔😐
 
मुझे ये तो आम बात है लोगों को पेड़ों के नीचे बैठने का शौक है, लेकिन मेरा सवाल यह है कि अगर हमारे देश की महान शहरी योजना का क्या नतीजा आ गया है? चाहे वह सड़कें हों या घर, सब तो जुड़ गए हैं उस पेड़ों के पन्हारे। और अब डल झील की दीवारों में भी चूहों ने अपना छेद खोद लिया है! 😂

मुझे लगता है कि अगर हमारे पर्यटक अपनी हरकतों से नहीं तो क्या सुधरेगा? वे अच्छी तरह से समझें कि उनकी हरकतें कहाँ तक पहुंच रही हैं। और फिर भी, डल झील के पास जाने के लिए बारिश में घूमने-फिरने की जरूरत नहीं थी। 🌂

क्या हमें अपने देश को साफ रखने की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए? या हम तो लोगों के खिलाफ खड़े होकर ही कहेंगे कि ऐसी स्थितियाँ नहीं आ सकती हैं? मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश को साफ रखते हैं, तो वही पेड़ लगने वाले पत्थर हमारे दिल में खुशियों से भर जाएंगे। 🌳
 
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