निजी एजेंसियों के माध्यम से बने दस्तावेजों पर भरोसा तोड़कर सवाल उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में आधार को सत्यापन दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
निजी एजेंसियों ने पासपोर्ट जारी करने का काम भी आउटसोर्स किया गया है, इसलिए किसी दस्तावेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एसआईआर में नाम जोड़ना और हटाना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह पूरी एसआईआर प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
आधार के आधार पर नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। मतदाता पंजीकरण अधिकारी नागरिकता जैसे जटिल मुद्दे का फैसला नहीं कर सकते।
आधार एक मान्य पहचान पत्र है, लेकिन इसका सीधा संबंध नागरिकता से नहीं होता।
निजी एजेंसियों ने पासपोर्ट जारी करने का काम भी आउटसोर्स किया गया है, इसलिए किसी दस्तावेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एसआईआर में नाम जोड़ना और हटाना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह पूरी एसआईआर प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
आधार के आधार पर नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। मतदाता पंजीकरण अधिकारी नागरिकता जैसे जटिल मुद्दे का फैसला नहीं कर सकते।
आधार एक मान्य पहचान पत्र है, लेकिन इसका सीधा संबंध नागरिकता से नहीं होता।