तेलंगाना में जहरीला इंजेक्शन देकर 300 कुत्तों की हत्या: सरपंच ने चुनाव में वादा किया था; एक महीने में 900 कुत्तों को मारा जा चुका

तेलंगाना के जगतियाल जिले में एक गांव में हुई घटना के पीछे कई सवाल उठ रहे हैं। 300 आवारा कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर हत्या कर देने की घटना ने सार्वजनिक चिंता को बढ़ा दिया है। इस घटना में गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव पर आरोप लगाया गया है।

चुनाव में वादा किया था, लेकिन वादा निभाने में विफल रहे। सरपंच ने चुनाव में जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा किया था। लेकिन एक महीने में 900 कुत्तों को मारने की घटना हुई।

पुलिस ने बताया कि दफनाने की जगह से लगभग 70 से 80 कुत्तों के शव निकाले गए। इस स्तर पर, पुलिस ने आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं कर सकती। आगे की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

इस घटना से मरने वाले कुल कुत्तों की संख्या 900 पहुंच गई है। तेलंगाना में कुल 600 कुत्तों को अलग-अलग गांवों में जहर देकर मारने की घटना सामने आई थी।

पालवंचा मंडल के 5 गावों में बीते दो-तीन दिनों में करीब 200-300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप है। पुलिस ने पांच सरपंचों सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

इससे पहले, हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से 9 जनवरी के बीच लगभग 300 आवारा कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस संबंध में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों सहित नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'हम गंभीर हैं। हमारी पिछली सुनवाई की हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा।'
 
यह घटना तेलंगाना में चुनाव विजय के बाद हुई है, और यह वादा था कि सरपंच जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाएंगे। लेकिन एक महीने में 900 कुत्तों को मारने की घटना हुई, यह तो चुनाव के बाद का वादा निभाने में विफल होने का एक उदाहरण है। इस दुष्कृत्य ने आम जनता की विश्वास को तोड़ दिया है और यह सवाल उठता है कि क्या चुनाव में वादा करने से पहले सरपंचों को अपने विरोधियों के खिलाफ रिकॉर्ड नहीं बनाए जाते।
 
यह तो बहुत बड़ा मामला है... सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव पर आरोप लगाने का यह दौर, बिल्कुल नहीं सही है। क्या वादे पूरे करने के लिए इतने स्तर तक किसी भी चीज़ को स्वीकार कर लेना पड़ता है? 300 आवारा कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारना तो एक बहुत बड़ा अपराध है, और इसके पीछे की वजहें समझने की जरूरत है।
 
बिल्कुल सही, इस घटना से बहुत दुख हुआ। शायद सरपंच ने अपने वादे में असफल रहे, लेकिन इससे पूरे गांव की गरिमा को आच्छन्न कर दिया। 300 कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारना बहुत ही अमानवीय कार्य है।
 
यह तो बहुत ही दुखद घटना है 🐕😔, 900 कुत्ते मर गए, यह सोचते हुए भी थोड़ा आश्चर्यचकित हूँ कि गांव में सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव ने इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों को जहर देने का वादा किया था। यह तो चुनाव में वादा करना ही नहीं, लेकिन वादा निभाने में विफल रहना एक बहुत बड़ी समस्या है। पुलिस को आगे जांच करनी होगी और आरोपियों पर साबित करना होगा कि उन्होंने इतनी बड़ी घटना में कहाँ से सहायता ली थी। इस तरह की घटनाएं देखना मुश्किल है, तो एक ओर तो हमारी बागडोर वाले लोगों को अपने वादों पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
क्या इस देश में आवारा कुत्तों के साथ भी ऐसा तानाशाही राज चल रहा है? पहले तो नाकाम होने वाली चुनावी वादियों पर ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन अब यह सोचकर बैठना अच्छा नहीं है कि सरकार तो और भी चुनाव में तोड़फोड़ कर रही है। पालवंचा मंडल के गांवों में 200-300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप तो बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन यह सिर्फ एक छोटा काम है?
 
अरे वाह, ये तो बिल्कुल नियंत्रित होने वाली चीजें नहीं हैं! सबसे पहले, मुझे यह जानने में दिलचस्पी है कि इन 300 कुत्तों को मारने के लिए क्या तरीके का इस्तेमाल किया गया था। और फिर, सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव दोनों ही आरोपी हैं? यह तो बहुत बड़ी चीज है। इसके अलावा, मुझे लगता है कि पुलिस को इस मामले की जांच करने में थोड़ा धीमा रहना चाहिए। और सरकार द्वारा आवारा कुत्तों पर उठाए गए कदमों की स्थिति क्या है?
 
ये तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है… 900 कुत्तों को मारने की घटना से यहाँ पर सारी चिंता बढ़ गई है। पुलिस अभी तक आरोपियों की संलिप्तता नहीं कर पाई, लेकिन इस तरह की घटनाओं से हमें लगता है कि जो वादे सरपंच ने चुनाव में किए थे, उन्हें टूट-फूटकर रख दिया गया। और अब यह तो सार्वजनिक चिंता का विषय बन गया है।
 
इन दिनों तेलंगाना में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं जिससे आम आदमी परेशान होता है🐕😡 सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के आरोपित होने से पहले उन्होंने वादा किया था, लेकिन वादा निभाने में विफल रहे। यह तो दिखाता है कि पार्टी के आदर्शों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
 
दुष्कर्म का मामला तेलंगाना में घटित होने पर बहुत भयावह लगता है। सार्वजनिक चिंता बढ़ा दी है और यह जानना कठिन है कि इसके पीछे क्या कारण था। अगर सरपंच ने वादा किया था कि गांव में आवारा कुत्तों से छुटकारा आएगा, तो क्या वह वादा पूरा करने में असमर्थ था?

मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाएं हमारे समाज में बड़ी समस्या हैं। आवारा कुत्तों को मारने से न केवल उनकी जान जाती है, बल्कि इससे हमारे समाज में एक व्यापार भी बढ़ सकता है जिसमें लोगों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जाता है। इस तरह की घटनाएं सिर्फ आवारा कुत्तों को न ही, बल्कि हमारे समाज को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

हमें ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक साथ मिलकर काम करना होगा। हमें आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के लिए समाधान ढूंढने की जरूरत है। 🐕😔
 
मैं समझता हूँ कि यह घटना बहुत दुखद और चिंताजनक है। 300 आवारा कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन देकर हत्या करने की बात सुनने पर मुझे लगना तो नहीं है कि यह पूरा राज्य में एक ही तरीके से हुआ था।

कुछ लोगों का कहना है कि यह घटना चुनाव के दौरान वादा किये गए निभाने में विफल रहे, लेकिन मैं इस पर बात करने से पहले इन लोगों की आबादी और उनकी आर्थिक स्थिति जानना चाहूँगा।

क्या हम पूरे देश में आवारा कुत्तों को मारने की इस तरह की घटनाएं होना चाहिए? हमें आवारा कुत्तों को मारने की जगह उन्हें सहायक संसाधन के रूप में उपयोग करने के तरीके पर विचार करना चाहिए।

आजकल देश में कई ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिनसे हमें चिंतित होना चाहिए और उनके पीछे के कारणों पर सोचना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि जैसे ही ये घटनाएं सामने आती हैं तो सरकार को अपने नीति प्रणाली में बदलाव लाने की जरूरत है। ये आवारा कुत्तों को मारने की घटना सचमुच दिल को टुकड़ा देती है। मुझे लगता है कि अगर चुनाव में वादा निभाया जाता तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं।
 
अरे, यह तो बहुत बुरा हुआ क्या?! 300 आवारा कुत्ते मारने का आरोप इतनी आसानी से नहीं होता। जानबूझकर गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव ने जनता के वादे तोड़ दिए। चुनाव में लोगों ने उन्हें उम्मीदें दीं, लेकिन उनकी जगह पर खुद को तैयार कर लिया। यह सिर्फ नहीं था, पूरे हनमकोंडा जिले में कई गांवों में ऐसी ही घटनाएं हुई।
 
इस बात से मुझे लगता है कि कुछ लोग चुनाव के दौरान वादे करते हैं तो उन्हें वादा नहीं निभाने में सफल होते हैं। सरपंच ने चुनाव में जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा किया, लेकिन एक महीने में 900 कुत्तों को मारने की घटना हुई। यह बहुत बड़ी बात है और इसके पीछे कई सवाल उठते हैं।

क्या सरपंच ने बस वादा दिया था और वास्तविकता की जांच नहीं की? क्या उन्हें पता था कि उनके वादे को लेकर इतना बड़ा विवाद हो सकता है? यह एक बहुत बड़ी गलती है और इसके परिणामस्वरूप कई कुत्तों की मौत हुई।
 
🐕😞 यह घटना बहुत दुखद है और हमें सोचते रहना चाहिए कि ऐसी घटनाएं कब तक होने दी जा रही हैं? 🤔 सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव दोनों ने जनता को वादा किया था, लेकिन वे वादे नहीं निभाये। 900 कुत्तों की हत्या करने से पहले उन्होंने क्या सोचा था? 🐾

आवारा कुत्तों पर क्या जानबूझकर हिंसा की जा रही है? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कुत्ते भी जीव जंतुओं हैं और उनका दुख-दarr स्वीकार करना चाहिए। 💔

इस घटना से सोचने को मिला कि हमें यहाँ पर आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने का तरीका ढूंढने की जरूरत है। 🤝 पुलिस और सरकार को इस मामले में जांच करनी चाहिए और आरोपियों को सजा दिलानी चाहिए। 👮‍♂️

इस तरह की घटनाएं होने से पहले, हमें सोचते रहना चाहिए कि क्या यह सही है और क्या हम इसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। 🗣️
 
यह तो बहुत ही चिंताजनक बात है 🐕😱। क्या यही तेलंगाना में आवारा कुत्तों के साथ किया जा रहा है? सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव दोनों एक ही नौकरी करते हैं लेकिन ऐसी बड़ी घटनाएं होती रहती हैं। यह तो जनता की भरोसा पर ही चलना चाहिए, अगर ऐसा नहीं है तो सार्वजनिक मामलों में आरोपियों की न्यायिक सुनवाई भी नहीं होनी चाहिए।
 
तेलंगाना में आवारा कुत्तों की हत्या की घटनाएं कितनी चिंताजनक हैं! 😱 पुलिस की गंभीरता से सवाल उठ रहा है कि आगे कैसे जांच की जाएगी और आरोपियों को मिलेगा न्याय? यह घटनाएं न केवल आम लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं, बल्कि पार्टी के वादों पर भी सवाल उठ रहा है। सरपंचों के वादों को तोड़कर कैसे जांच की जाएगी? यह तो सिर्फ प्रशासन की कमजोरी का प्रदर्शन होगा।
 
अरे यार, यह तो बहुत ही दुखद बात है 🤕। एक गांव में इतने कुत्तों को मारने का आरोप लगाना तो जरूरी नहीं था, लेकिन प्रशासन के वादों पर भरोसा करने से भी ऐसा न हो सकता। चुनाव में जनता से 'कुत्तों से छुटकारा दिलाने' का वादा करना और फिर एक महीने में 900 कुत्तों को मारने की घटना होना तो बहुत ही शर्मिंदगी भरा है। पुलिस ने आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं कर सकती, लेकिन यह जरूरी है कि उन्हें कड़ी सजा मिले। तेलंगाना में ऐसी घटनाएं तो हमेशा से बढ़ रही हैं। हमें अपने गांवों और पास के इलाकों में जागरूक रहना चाहिए और ऐसी घटनाओं की निगरानी रखनी चाहिए।
 
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