वैज्ञानिक धरोहर का नया स्वरूप: अंटार्कटिका में सदियों पुरानी बर्फ की जड़ें मजबूत
भारत और विश्व के विज्ञान समुदाय ने एक ऐतिहासिक परियोजना शुरू की है जहां यूरोपीय आल्प्स से निकाली गई सदियों पुरानी बर्फ को अंटार्कटिका में बनाए गए आश्रय में सुरक्षित रखा जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के बीच पृथ्वी के अतीत को सुरक्षित रखना है।
पृथ्वी के अतीत के रहस्य
ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।
आइस मेमोरी फाउंडेशन का प्रयास
आइस मेमोरी फाउंडेशन के अध्यक्ष और स्विस जलवायु वैज्ञानिक थॉमस स्टॉकर के अनुसार जो कुछ हमेशा के लिए खो सकता था, उसे बचाना मानवता के लिए एक सामूहिक प्रयास है। उनका कहना है कि ये आइस कोर पृथ्वी के अतीत की ऐसी जानकारियां समेटे हुए हैं, जिन्हें दोबारा कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
आइस कोर क्या बताते हैं?
ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।
भारत और विश्व के विज्ञान समुदाय ने एक ऐतिहासिक परियोजना शुरू की है जहां यूरोपीय आल्प्स से निकाली गई सदियों पुरानी बर्फ को अंटार्कटिका में बनाए गए आश्रय में सुरक्षित रखा जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के बीच पृथ्वी के अतीत को सुरक्षित रखना है।
पृथ्वी के अतीत के रहस्य
ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।
आइस मेमोरी फाउंडेशन का प्रयास
आइस मेमोरी फाउंडेशन के अध्यक्ष और स्विस जलवायु वैज्ञानिक थॉमस स्टॉकर के अनुसार जो कुछ हमेशा के लिए खो सकता था, उसे बचाना मानवता के लिए एक सामूहिक प्रयास है। उनका कहना है कि ये आइस कोर पृथ्वी के अतीत की ऐसी जानकारियां समेटे हुए हैं, जिन्हें दोबारा कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
आइस कोर क्या बताते हैं?
ग्लेशियरों से निकाले गए आइस कोर पृथ्वी के जलवायु इतिहास के मौन साक्षी होते हैं। इनमें प्राचीन तापमान, मौसम के पैटर्न, वायुमंडलीय संरचना और यहां तक कि पुराने ज्वालामुखीय विस्फोटों के संकेत भी सुरक्षित रहते हैं। लेकिन वैश्विक तापन के कारण हजारों ग्लेशियर आने वाले दशकों में समाप्त हो सकते हैं, जिससे यह अमूल्य रिकॉर्ड हमेशा के लिए नष्ट होने का खतरा है।