UGC पर रोक के बाद जज को दी गाली, देश को आग लगाने की कही बात, युवक का भड़काऊ वीडियो वायरल

पेशेवर अदालतों की सम्मानितता को लेकर एक बड़ा विवाद फैल गया है। राज्य अनुसूची वाले लोगों के खिलाफ इस नियम को समर्थन देने पर जागरूक होने के प्रयास में एक युवक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक भड़काऊ वीडियो साझा किया। उसी दौरान उस युवक ने अपने 6 मिनट लंबे वीडियो में कई हानिकारक और अपमानजनक बातें कहीं।

इस वीडियो में, रुद्र प्रताप कुशवाहा, उस युवक का नाम जिसने इस वीडियो साझा किया, ने अदालत की एकता को लेकर कई भड़काऊ बातें कहीं। उसी दौरान, इस वीडियो में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों पर गलत भाषा का उपयोग करने की बात कही। यहाँ बताया गया नहीं है, लेकिन वहां आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसने अदालत के प्रति सम्मान को लेकर कई विवादित बातें कहीं।
 
वीडियो देखा तो बहुत ही गुस्सा आ गया। क्यों ऐसे लोग सोचते हैं कि एक फेसबुक वीडियो से हरकत कर सकते हैं? 🙄
 
यार, यह तो बहुत गड़बड़ी हुई है! रुद्र प्रताप कुशवाहा नाम के युवक की बात कर रहा है, जो एक युवा है और उसकी ऐसी बातें सुनकर मुझे थोड़ा परेशान महसूस हुआ। लेकिन फिर भी, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह बातें कहीं से आ रही हैं, और हमें उनके बारे में सोचकर कुछ न कुछ कहना चाहिए।

मेरी राय में, जैसे ही कोई ऐसी बात करता है जो लोगों को परेशान कर सकती है, तो उसके दिमाग में और भी कुछ जो गलत होने वाला है, वो सोचता है। इसलिए, हमें अपनी राय रखनी चाहिए, लेकिन जरूरी नहीं कि हम व्यक्तिगत हमलों में फंसें।

अब जब मैं इस विषय पर सोच रहा था, तो मुझे याद आया कि पिछले हफ्ते ऐसा ही कुछ हुआ था। उस समय भी, लोगों ने बहुत बातें कहीं और, लेकिन फिर भी, हमें अपनी राय रखनी चाहिए।

क्या आपको लगता है कि यह वीडियो देखकर कुछ समाधान हो सकता है? मुझे लगता है कि अगर हमारी बातें सुनीं और समझें, तो शायद कुछ बदल जाएगा।
 
उम्मीद है कि यह भी हुआ होगा, तो फिर राज्य अनुसूची वालों को भी नियम का लाभ मिल जाए। लेकिन, इस तरह से ऐसे लोगों द्वारा वीडियो बनाकर और अपने अकाउंट्स पर शेयर करके, यह क्या हुआ? कोई अच्छे उद्देश्य से नहीं था, तो फिर क्यों ऐसी चीजें करते हैं? अदालतों में सम्मान का मुद्दा जरूर है, लेकिन इस तरह से इसका हल निकालने का तरीका साफ़ नहीं है।
 
😡 यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है! राज्य अनुसूची वालों पर यह नियम इतना बड़ा मुकदमा बना दिया जा रहा है। क्या हमारे इस्तेमाल की जाने वाली भाषा इतनी शक्तिशाली होती है कि इससे लोगों को अपने अधिकारों के बारे में सोचने पर मजबूर किया जाए? 🤔 यह तो बहुत ही खेदपूर्ण है।
 
🤔 भाई, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। जैसे ही पता चला कि इस वीडियो में ऐसी बातें कही गईं, तुरंत सभी ने इसका ख्याल रख लिया। लेकिन यह देखना थोड़ा चिंताजनक है कि कैसे एक युवक इतने खतरनाक और अपमानजनक बातें कर सकता है। हमें यह सोचना होगा कि इससे क्या परिणाम निकलेगा और कैसे अदालतों की सम्मानितता को लेकर ऐसी बातें कही जा रही हैं।

कुछ लोग माफ कर देंगे, लेकिन इस तरह की बातें करने वाले लोगों को सोचना चाहिए। हमारे समाज में शांति और सम्मान का महत्व बहुत ज्यादा है। अदालतों की एकता पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन इससे पहले कि हम कुछ करें, हमें यह सोचना चाहिए कि इससे कैसे समाज प्रभावित होगा। 🤝
 
🤔 यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है जिस पर हम सब को सोचना चाहिए। अगर हमारे युवाओं को ऐसे वीडियो देखने को मिलें जिसमें लोगों को अपमानित करने और भड़काऊ बातें करने के लिए मजबूर किया जाए, तो यह बहुत ही चिंताजनक है। 🙅‍♂️

आजकल के युवा बहुत ही सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और वहां कई तरह के वीडियो और पोस्ट देखने को मिलते हैं। लेकिन यह तो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने शब्दों और कार्यों की जिम्मेदारी लें। 💻

अगर हमारे युवाओं को ऐसे वीडियो देखने को मिलें जिसमें गलत भाषा का उपयोग करने से बचने के लिए हमें एक दूसरे की ओर से बोलने की जरूरत है। हमें अपने समाज के लिए जिम्मेदार विचारों और शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। 🙏
 
😡 यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है… हमारी अदालतें सुधारने की कोशिश कर रही हैं और फिर भी ऐसे लोगों द्वारा विकृति किया जाता है। राज्य अनुसूची वाले लोगों पर इतना आरोप लगाना बिल्कुल सही नहीं है, यह एक बड़ा मुद्दा है… हमें अपने समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा देना चाहिए।
 
उस युवक की गलती देखना मुश्किल लग रहा है 😔। वह जो बोल रहा था, सुनने में अच्छा लग रहा था, लेकिन जब उसकी शब्दों की सच्चाई समझने लगी तो असहज महसूस हुआ 🤯। अदालत की एकता पर इतने विवाद बनाने की जरूरत नहीं थी, इसके बजाय उसे अपने विचार साझा करने की कोशिश कर सकता। उसके वीडियो देखने के बाद मुझे लगता है कि हमें अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि गलत जानकारी फैल सकती है और लोगों को गलत रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित कर सकती है।
 
😒 ये तो क्या हुआ है? यह लड़का इतना फस गया है कि अब वह अदालत की सम्मानता की बात कर रहा है। उसका 6 मिनट लंबा वीडियो देखकर मुझे लगता है कि युवाओं को पता नहीं है कि इसका सही अर्थ क्या है। अदालतों में सम्मान को लेकर इतनी बातचीत करना कुछ ऐसा नहीं है जिससे हमारे देश की सामाजिक संरचना को मजबूत किया जा सके।

कोई भी व्यक्ति अपने अधिकारों और सम्मान की बात कर सकता है, लेकिन ऐसा करने से पहले उसे पता होना चाहिए कि इसका सही अर्थ क्या है। यह लड़का अदालत को लेकर इतना नकारात्मक दृष्टिकोण रख रहा है कि अब वह अपने जीवन को भी खराब कर रहा है।

आइए, हमें ऐसे व्यक्तियों से बचने की कोशिश करें जो अदालतों में सम्मान की बात करते हैं लेकिन उनके पास इसके सही अर्थ के बारे में ज्ञान नहीं है।
 
🤔 यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है। ऐसे युवकों की जागरूकता के प्रयास के साथ-साथ अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता की भी जरूरत है, लेकिन उनके तरीके से तुलना नहीं की जानी चाहिए। 6 मिनट लंबा वीडियो बनाकर अपमानजनक बातें कहकर सबको डराने-धमकाने का क्या लाभ? इसके अलावा, अदालतों में निरंतरता और एकता बनाए रखने के लिए हमें इस तरह की हानिकारक चीजों से दूर रहना चाहिए।
 
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