उज्जैन के तराना में फिर पथराव, पुलिस ने खदेड़ा: बस फूंकी-दुकान जलाई, मंदिर पर हमला किया, अब तक 15 गिरफ्तार - Ujjain News

उज्जैन की तराना में दूसरा पथराव हुआ, बसों और घरों को नुकसान पहुंचाया।

तीन दिनों बाद फिर से तराना में विवाद हो गया, इस बार पुलिस ने सभी पर खदेड़ दिया। शुक्रवार रात करीब 9 बजे पथराव हुआ, जब पुलिस पहुंची तो हल्के बल के साथ उपद्रवियों को इमली बाड़ा में खदेड़ दिया।

गुरुवार रात शुरू हुआ विवाद शुक्रवार दोपहर बाद हिंसा में बदल गया, जब एक दुकान में आग लग गई और एक बस को फूंक दिया गया। आगजनी के बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया, जिसमें एक युवक घायल हो गया।

इस विवाद की शुरुआत सुखला गली में हुई थी, जहां बड़े राम मंदिर के सामने विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री सोहेल ठाकुर (बुंदेला) खड़े थे। यहीं दोनों पक्षों में विवाद हो गया और इसी बात को लेकर कुछ युवकों ने पीछे से हमला कर दिया।

मामले में पुलिस ने सप्पान मिर्जा, ईशान मिर्जा, शादाब उर्फ इडली, सलमान मिर्जा, रिजवान मिर्जा और नावेद को जानलेवा हमले का केस दर्ज किया था। इलाके में 7 थानों की पुलिस बल तैनात किया गया था।
 
अरे दोस्त, यह तराना विवाद तो बिल्कुल हुआ चुका है । सिर्फ इतनी जानकारी मिलती है कि पुलिस ने पीछे से हमलावरों को इमली बाड़ा में खदेड़ दिया। लेकिन यह विवाद कैसे शुरू हुआ, इसकी वजह पता नहीं चलती।

क्या हमें लगता है कि पुलिस की तैनाती से इस विवाद को समाप्त करने में मदद मिलेगी या इससे और भी गंभीरता बढ़ जाएगी? लेकिन ये सवाल यहीं रह गया।

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में शांति और समझ को फैलाने पर ध्यान देना चाहिए।
 
उसके दूसरे ही दिन जब पुलिस पहुंची, तो सोहराबाद जैसे पुरुषों ने इमली बाड़ा में खदेड़ दिया, बसों को भारी नुकसान पहुँचाया।
 
यह तो बहुत ही दुर्भाग्य से हुआ, सबके घर और बसों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस तो मुश्किल स्थिति पर नज़र रखकर सभी पर खदेड़ दिया, लेकिन आगजनी के बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया जिससे एक युवक घायल हुआ। मुझे लगता है कि यह विवाद शुरू होने से पहले अगर सभी नेताओं और पुलिस अधिकारियों ने अच्छे से सोच-विचार किया, तो यह whole thing avoid ho sakta. 🙏👮‍♂️ #भारतीय_शांति #ज़मीन_सबके_है
 
जी बोलो दोस्त, यह तराना विवाद सचमुच दिलदार है 🤯। मुझे लगता है कि प्रशासन को इस विवाद के पीछे कारण समझने की जरूरत है। सुखला गली में राम मंदिर के बारे में विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के Presence को लेकर युवकों ने हमला किया, यह तो समझने की जरूरत है कि किस तरह की भावनाएं उछल रही हैं और इससे आग लगने कैसे ?

बसों को फूंक देने से पहले हमें पुलिस को एक बार फिर से अपना काम अच्छी तरह से करने की जरूरत है 🚨, इसके अलावा विवाद के समय तुरंत इलाज और मदद देने की जरूरत है। हमें यह भी समझने की जरूरत है कि युवकों को नौकरी, रोजगार और भविष्य की संभावनाएं देने की जरूरत है, ताकि वे ऐसे किसी भी विवाद में शामिल नहीं हों।
 
अरे, यह देखकर हैरानी हो गई कि उज्जैन में फिर से तराना में विवाद हुआ और आग लग गई। क्या कोई हमसफर नहीं है? पुलिस ने जैसे ही वहाँ पहुंचा, खदेड़ दिया। लेकिन यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। पहले तो बसों और घरों को नुकसान पहुंचाया गया और फिर विवाद शुरू हुआ। एक दुकान में आग लग गई, खैर इस तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए।
 
जानवर के लिए भी नुकसान हुआ, परन्तु कुछ लोगों को यकीन नहीं है कि क्या सही था और क्या गलत था। पुलिस बहुत तेजी से कार्रवाई कर रही है, लेकिन मुझे लगता है कि अगर कोई दुकान में आग लग जाती है तो उसके बाद भी कुछ ना कुछ होता है। पुलिस को पहले से समझना चाहिए कि क्या यह विवाद थोड़ा शांतिपूर्ण तरीके से हल हो सकता था।
 
उज्जैन के तराना में फिर से हुआ ये दूसरा पथराव, तो मुझे लगता है कि सबकुछ ठीक है, जैसे ही सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इमली बाड़ा जिंदा है। यहां तक कि जब आग लगी तो भी कोई देर कर दी नहीं और आगजनी के लिए निकलने वाले दोनों पक्ष के लोगों को पुलिस ने खदेड़ दिया। यह तो समझ में आता है कि दोनों पक्षों के बीच जो विवाद था, वह सभी से ठीक है।
 
ज्यादा साहस हुआ, लेकिन दूसरे में तो बहुत सारी समस्या आई। पहले में बसों और घरों को नुकसान पहुंचाया, फिर पुलिस खदेड़ दिया। ज्यादातर लोग शांति से बैठे थे, लेकिन जब कोई दूसरा लोग विवाद करने लगा, तो सबकुछ बर्न हो गया। मुझे लगता है कि अगर सभी एकजुट होते तो यह सारा विवाद खत्म ह जाता।
 
यह विवाद इतना बिगड़ गया है कि अब यह साबित हुआ कि भारत में विभिन्न दृष्टिकोण के लोग एक-दूसरे को प्रोत्साहित कर रहे हैं। अगर पहले यह विरोध-प्रदर्शन था, तो आजकल यह खेल ही गया है। 🤪

मैं समझता हूँ कि जब भी कोई विषय हिंसक तरीकों से लिए जाता है, तो सब कुछ खराब हो जाता है। अगर हम एक दूसरे के साथ बातचीत करें और समझ में आतें, तो सभी पार्टियां अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार रखती हैं। लेकिन जब भीड़भाड़ में आकर आग लगाना और दूसरों पर हमला करना शुरू कर देती है, तो यह सब गलत है।

अगर पुलिस ने सभी पक्षों पर कसा डाला, तो फिर से यह विवाद क्यों हुआ? क्या हमें अपने विचारों को लेकर खुद को सुरक्षित नहीं रख सकते थे? मुझे लगता है कि अगर पुलिस ने पहले ही सभी पक्षों से बातचीत की, तो इस सब समस्या को दूर कर देते। 🤔
 
राजनीति से बाहर निकलकर लोगों को खुशी देने की जरूरत है, जैसे सुखला गली में विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री सोहेल ठाकुर (बुंदेला) खड़े हुए थे। अगर उन्होंने लोगों को खुशी देने का प्रयास किया होता, तो इस विवाद नहीं हुआ होता। अब बसों और घरों में नुकसान हुआ, यह अच्छा नहीं है। सरकार को भी जरूरी है कि वह लोगों की मदद करे और सुरक्षा सुनिश्चित करे।
 
इस दुनिया में हमेशा कुछ होता है जो लालच और गुस्से से उत्पन्न होता है। जब कोई व्यक्ति अपनी जिज्ञासा को नियंत्रित नहीं कर पाता है, तो वह दूसरों पर अपना तनाव टूटाने की कोशिश करता है। यह एक बड़ा मिथ्या है - किसी को भी अगर हम अच्छाई और करुणा से देखें, तो उसके पीछे कुछ गहरी समस्या होती है।

उज्जैन की तराना की घटनाएं ने इस बात पर जोर दिलाया है - जब लोग अपने इरादों और आकांक्षाओं में भूल जाते हैं, तो वे अपने आसपास के लोगों को प्रभावित करते हैं। हमें सीखने की जरूरत है कि हमारा शब्द और कार्य दोनों एक ही निर्देशित होना चाहिए।
 
यह दिल्ली में हो रहा विवाद क्या करेगा? पहले उसमें कुछ युवक घायल हुए, फिर आग लग गई, अब यह वहां खून बह रहा है! सुखला गली में तो राम मंदिर के बारे में जंग शुरू हुआ, लेकिन अगर विवाद में युवक घायल हुए तो क्या इसका मतलब यह है? पुलिस ने जानलेवा हमले का मामला दर्ज कर दिया, लेकिन खेद है कि उपद्रवी पर जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आगजनी का मौका मिल गया।
 
राज्य सरकार को बसों को सुरक्षित रखने और युवाओं को शांति बनाए रखने के लिए और भी अच्छे नीति पर विचार करना चाहिए। मुझे लगता है कि अगर कोई दुकान आग लग जाए तो पुलिस तुरंत वहां पहुंच जाए और दोनों पक्षों के बीच खतने की नहीं बल्कि समझौते की कोशिश करें।
 
राज्य में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं... पथराव, आगजनी, दुकानों और बसों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है... क्या सरकार किसी से बात नहीं कर सकती? तीन दिनों में एक-एक करके विवाद होते हैं... पुलिस की भी इस तरह के मामलों में काम करने में असफल रही है...
 
यारो देखिए ये तराना में क्या हुआ है 🤯 तीन दिनों बाद फिर से विवाद हुआ और इस बार पुलिस ने सभी पर खदेड़ दिया। तो वाह! आग लग गई, बस फूंक दी, युवक घायल हो गया... यह सब क्या है? 🤔

मेरा मन यह सोचता है कि सुखला गली में विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री खड़े थे, तो यह तो साफ़ सोचता है कि उनकी बातों ने सबको घेर लिया और फिर क्या हुआ? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि पुलिस ने सही तरीके से काम किया है, खदेड़ दिए तो ठीक है, लेकिन आग लगने के बाद शायद कुछ गलत हुआ होगा। 🚒

अब यारो चिंतित हैं, विवाद कैसे हुआ? और पुलिस ने जिन लोगों पर खदेड़ दिया, उनकी बातें थी कि तो वाह! 😮
 
🤦‍♂️🚨😒 📸 👀

💥😡👊 दोनों पक्ष में से भारी लोग घायल हुए, आग लग गई, बस फूंक दी गई... यह तो खेल नहीं था, या ? 😐

🤷‍♂️🚫😒 पुलिस ने सब पर खदेड़ किया, फिर क्या करना? 🤔
 
अगर सुखला गली में हिंसक विवाद हो सकता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोग जिसके पीछे विश्व हिंदू परिषद खड़े थे, ही हिंसक हैं। क्योंकि बुराई में कोई अच्छा नाहीं होता। अगर पुलिस ने इतनी तेजी से इमली बाड़े में खदेड़ दिया, तो यह भी एक गंभीर सवाल उठाता है।
 
क्या हुआ उस ज़माने का, यह तो सिर्फ़ बताने में भी पर्याप्त नहीं है! इस दौरान शायद ज़माना वाला तराना पुलिस के खिलाफ निकल गया होगा। अगर कोई ऐसा मामला हुआ, तो जरूर साबित करना चाहिए कि कौन क्या दोषी था, लेकिन यहाँ तो सबके खिलाफ जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया है। ऐसा लगता है कि पुलिस और विवादित पक्ष में कुछ गलतफहमी थी।

अब यह देखना रोचक होगा कि आगे इस विवाद को कैसे समाप्त किया जाएगा।
 
जानबूझकर लोगों को खदेड़ देना और फिर से पथराव होना तो एक बात है, परंतु जब आग लग गई और एक युवक घायल हुआ तो यह तो कोई मजाक नहीं है 🚒😭। क्या लोगों ने कभी सोचा है कि उनके इस तरह के व्यवहार से दूसरे लोगों की जान जोखिम में आ सकती है? 😤। और फिर पुलिस ने जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया, यह तो सही काम था, लेकिन क्या कोई सोच रहा था कि इस तरह के मामले में कौन सी दिशा में आगे बढ़ाया जाए? 🤔
 
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