UP के 74 जिलों में ब्लैकआउट, युद्ध का सायरन बजा: गोरखपुर में डमी मिसाइल गिरी, कानपुर में धमाका, मॉक ड्रिल के PHOTO-VIDEO - Uttar Pradesh News

शुक्रवार शाम 6 बजे से उत्तर प्रदेश में 74 जिलों में अंधकार हो गया। यह मॉक ड्रिल था जिसमें सुरक्षा कर्मियों की तैयारी करने के लिए विशेष अभ्यास किया गया था।

गोरखपुर में जहां एक डमी मिसाइल गिरी, वहीं कानपुर में धमाके की आवाज सुनकर लोग जमीन पर लेट गए। वाराणसी में बिल्डिंग में फंसी महिला को रस्सी के सहारे उतारकर बचाया गया।

ब्लैकआउट का मकसद युद्ध या हवाई हमले की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। शाम के समय लाइटें बंद रखने से दुश्मन को किसी भी क्षेत्र की सटीक लोकेशन का पता नहीं चल पाता। इस मॉक ड्रिल के जरिए एनसीसी, स्काउट गाइड और सुरक्षा एजेंसियां अपनी तैयारियों को परखती हैं।

मॉक ड्रिल से युद्ध, हवाई हमले, आतंकी हमले या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में प्रशासन आम जनता के लिए तैयारी करता है। क्योंकि अभ्यास पहले से होगा तो असली हालात में सही और तेज फैसला लिया जा सकेगा।

इस मौके पर यूपी पुलिस ने अपनी तैयारियों को दिखाया।
 
शाम 6 बजे से 74 जिलों में अंधकार पड़ गया, लेकिन यह मॉक ड्रिल था... अच्छा लगा कि पुलिस ने अपनी तैयारियों को दिखाया। मैंने देखा है कि गोरखपुर में जहां एक डमी मिसाइल गिरी, वहीं कानपुर में धमाके की आवाज सुनकर लोग जमीन पर लेट गए। यह तो बहुत खतरनाक लगा। लेकिन फिर भी अच्छा है कि कानपुर की महिला को रस्सी के सहारे उतारकर बचाया गया।

मुझे लगता है कि इस मॉक ड्रिल से यूपी पुलिस अपनी तैयारियों को परख रही है। और यह अच्छा है कि प्रशासन आम जनता के लिए तैयारी करता है।
 
मुझे लगता है कि मॉक ड्रिल से पहले हमें कोई खाना नहीं बनाया था, लेकिन ब्लैकआउट के बाद मैंने अपनी पत्नी को एक अच्छा भारतीय भोजन बनवाया था। वह खुश हुई और हमारी सालगिरह की याद आ गई।
 
मैंने शुक्रवार की सुबह की ब्लैकआउट की खबर सुनकर बहुत हैरान रहा 🤯। यह मॉक ड्रिल वास्तव में बहुत जरूरी था, क्योंकि अगर हमारे देश में कोई हवाई हमला या आतंकवादी हमला हुआ, तो लोगों को पहले से ही जानकर रहने का समय नहीं मिलता। इस तरह के अभ्यास से हमारी सुरक्षा एजेंसियां अपनी तैयारियों को परख सकती हैं और आम जनता को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार हो सकती हैं।

यह मॉक ड्रिल वास्तव में बहुत अच्छा रहा, जिसमें पुलिस, एनसीसी, और स्काउट गाइड सभी ने भाग लिया। यह दिखाता है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां अपनी तैयारियों को नहीं मानती हैं और आम जनता को जरूरी सुरक्षा प्रदान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
 
अगर तय्यार सुरक्षा कर्मियों को यह अभ्यास करना जरूरी है तो फिर भी मैंने सुना है कि गोरखपुर में डमी मिसाइल गिराने से पहले ही वाली पोल खुल गई थी, और कानपुर में धमाके की आवाज सुनकर लोगों को फांसी लग गई। यह अभ्यास जरूरी है ना , लेकिन तय्यारी कैसे कर रहे हैं?
 
ब्लैकआउट का यह अभ्यास दिलचस्प है 🤔, मुझे लगता है कि लोगों ने अच्छी तरह से इसका प्रयोजन समझा, लेकिन फिर भी कुछ लोगों को आश्चर्य हुआ था 😅। मैंने देखा है कि शाम के समय लाइट्स बंद करने से बहुत बड़ा अंतर होता है, यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मुझे लगता है कि यूपी पुलिस ने अच्छी तरह से अपनी तैयारियों को दिखाया, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बचा है।
 
मैंने वीडियो देखा 🤔, यह बहुत ही रोमांचक लग रहा था, लेकिन फिर मुझे ऐसा लगता है कि हमें अपने देश की सुरक्षा पर इतनी ध्यान देना चाहिए।

ब्लैकआउट का मतलब यह भी हो सकता है कि हमारे पास निगरानी सिस्टम नहीं है, जिससे आतंकवादियों और अन्य खतरों को रोकने में समय लगता है।

मैं समझता हूँ कि इस अभ्यास का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन हमें यह भी विचार करना चाहिए कि हमारे पास ऐसी तैयारियाँ नहीं हैं जिससे हम अपने देश को आतंकवाद और अन्य खतरों से बचा सकें।
 
अगर ऐसी स्थिति में तब तक लाइट बंद रहती, तो यह बहुत बड़ा समस्या होगी। और फिर क्या करेंगे? 🤔

मॉक ड्रिल जैसे अभ्यास के जरिए नागरिकों की सुरक्षा के बारे में सरकार की तैयारी अच्छी है। लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि ऐसी स्थिति में कौन और कहाँ सुरक्षित रहेगा, यह जानने के लिए वास्तविक अभ्यास जरूरी होगा। 🚨

यह सुनकर मुझे यकीन नहीं है कि उत्तर प्रदेश में ऐसा बड़ा ब्लैकआउट हुआ। अगर इससे सरकार की तैयारी अच्छी है, तो फिर यह जानकारी सार्वजनिक करने में जरूरत नहीं थी। 🤷‍♂️

लेकिन जब यह बात आती है तब, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी सरकार नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान दे रही है। और अगर ऐसा नहीं है, तो फिर हमें अपनी सरकार को जवाबदेह ठहराने का अधिकार होगा। 💪
 
शायद हां, इस तरह से हमें अच्छी तैयारी करनी चाहिए। मॉक ड्रिल जैसा काम जरूरी है ताकि जब भी ऐसी स्थिति आये, तो हमें सही तरीके से जवाब देने में सक्षम हों।

उसके अलावा, लोगों ने वास्तविक समय में अपनी राय देनी चाहिए। यह भी बहुत जरूरी है कि लोग खुद को ऐसी स्थितियों में मिलवाएं ताकि वे सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।

अब अगर हमारे पास युद्ध से जुड़े अनुभव वाले लोग हों, तो वे जरूरी राय देंगे। उनकी बात सुनने से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
 
मॉक ड्रिल का यह विचार अच्छा है, लेकिन अभ्यास कितना हुआ? कुछ जगहों पर भी अंधकार हो गया, तो क्या सुरक्षा कर्मियों को अपने जीवन की जिम्मेदारी समझने में मदद मिली।
 
ब्लैकआउट ड्रिल की बात करने से पहले यह सवाल उठता है कि इतनी बड़े व्यापक में सारी लाइट्स बंद कर देने में नाकाम होने पर क्या फायदा होगा? और जो डमी मिसाइल गिरी, वह तो केवल एक धूमधाम बनाता है...
 
मुझे लगता है कि यह अंधकार का मॉक ड्रिल बहुत ही उपयोगी रहा होगा, लेकिन फिर सोचेंगे कि ये कितनी बार हो सकता है और इसके लिए हमारे सुरक्षा कर्मियों पर इतनी जिम्मेदारी देनी है? क्या यह हमारी सरकार की सुरक्षा योजनाओं की सफलता का हिस्सा भी बन सकता है?
 
मुझे लगता है कि यह मॉक ड्रिल बहुत ही अच्छा विचार है। अगर कोई हवाई हमला होता है या आतंकवादी हमला, तो लोगों को पहले से ही जानते हुए उस पर तैयार रहना चाहिए। यह अभ्यास हमें ऐसी स्थिति में तेज और सही निर्णय लेने में मदद करेगा। मैं यूपी पुलिस के इस अभ्यास की बहुत सराहना करता हूँ, विशेष रूप से जब यह दिखाती है कि हमने अपनी तैयारियों को परख लिया है।
 
मैंने ऐसा सुना है कि मॉक ड्रिल से पहले तो कोई तय नहीं था, वह लोगों को रात के अंधेरे में खुद को जानबूझकर खोना पड़ता। लेकिन अब यह साफ है कि यूपी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां बहुत तैयार हैं। मैं अच्छा महसूस करता हूं, चाहे वह वास्तविक लड़ाई हो या नहीं।
 
ज़रूरी है कि हम सब सुरक्षित रहें, खासकर जब ऐसे अभ्यास होते हैं जिसमें सारे जिले शामिल होते हैं 🕰️। मॉक ड्रिल का यह तरीका देखकर आश्चर्य हुआ, फिर से तैयारी करने का मौका है तो अच्छा होगा कि पुलिस और सरकार अपनी-अपनी तैयारियों को पकड़ लेते हैं 👮‍♂️
 
बच्चों को यह सीखना जरूरी है कि जब भी अस्थिति में सामूहिकता और सहयोग जैसे गुणों को दिखाएं, हम तुरंत सुधार ला सकते हैं। आजकल की जिंदगी में एक्सरसिव सेल्फी और फोन की निर्भरता से हम अपने आस-पास की सुरक्षा खतरों पर ध्यान देने लग गए हैं 📸. लेकिन आजकल की मॉक ड्रिल ने हमें यह बात समझायी कि अस्थिति में तुरंत सहयोग और सामूहिकता दिखाकर, हम अपने आस-पास की समस्याओं को हल कर सकते हैं। यही हमारे जीवन की बहुत महत्वपूर्ण सीख है 🤝.
 
અને આ મॉक ડ્રિલથી સાચવવામાં આવે છે કે ઉપરાંત આ ધોરણ બદલવા માટે સરકાર જીવનમાં હિંમત શોધી શકે છે.

આ પણ થયું કે દેખાવ બદલાવના દ્વારા સરકાર અને તમારી જિંદગી ભલે એક-દૂધનો હોય, પરંતુ સમાચારથી જાણવાની ઈચ્છા એક મિશ્રણ હોય છે.

તેથી, આ ધોરણનું પ્રચાર અને સમજવાની કોઈ શોભે ?
 
बेटा, यह मॉक ड्रिल बहुत अच्छा हुआ। मैंने सुना था कि गोरखपुर में डमी मिसाइल गिरी, वहीं कानपुर में धमाके की आवाज सुनकर लोग जमीन पर लेट गए। यह तो बहुत ही दयालु पुलिसवालों ने महिला को रस्सी के सहारे उतारकर बचाया।

मैंने सोचा था कि यूपी पुलिस अपनी तैयारियों पर अच्छा ध्यान दे रही है। मॉक ड्रिल से युद्ध, हवाई हमले, आतंकी हमले या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में प्रशासन आम जनता के लिए तैयारी करता है, इससे देश को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
 
मुझे लगता है कि यह ब्लैकआउट अभ्यास बहुत ही खतरनाक है। अगर सच्चा हालात आता तो हमें चिंतित होना चाहिए, न कि मौके पर पुलिस ने अपनी तैयारियों को दिखाया हो। इससे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

और फिर से, यह अभ्यास वास्तव में मॉक है, इसलिए हमें इसकी बात करने में चिंतित न होना चाहिए।
 
मैंने देखा कि गोरखपुर में डमी मिसाइल के बाद सुरक्षा कर्मियों ने अच्छी तरह से दिखाया है कि वे कैसे जीवन-जोखिम पर तैयार हो सकते हैं। लेकिन अभी भी लोगों को यह समझने में कुछ समय लगेगा कि क्या ये वास्तविक हमला था या नहीं। शायद वे इस बारे में थोड़ा सोचते हैं और अपनी तैयारियों को दोबारा देखें। 💡
 
Back
Top