UP SIR पर बड़ा खुलासा! क्या सच में कटे हैं लाखों नाम? जानिए क्या बोले यूपी सीएओ नवदीप रिणवा

बातचीत के दौरान नवदीप रिणवा ने बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का उद्देश्य है मतदाताओं की जानकारी तो सही, अपडेट और पारदर्शी बनाना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी का नाम काटना।
 
सीर प्रक्रिया बिल्कुल फ़ेद होने वाली सुन्नता हो गई। मतदाताओं को अपनी जानकारी तो दिखानी है, लेकिन उसकी गुमनामी भी छोड़नी चाहिए। नाम काटने का मतलब सिर्फ मतदाताओं को डराना-धमकाने की बात नहीं है। लोगों को अपने मतदान के अधिकार के प्रति जागरूक होना चाहिए, न कि अपने नाम को काटने की।
 
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में मतदाताओं को अपने वोटिंग शेड्यूल पर बैक्लॉक कराने की जरूरत है, ताकि हम सुनिश्चित कर सकें कि हर व्यक्ति ने अपना वोट डाला है या नहीं। यह मुझे थोड़ा असहज लग रहा है क्योंकि इससे लोगों को अपनी जानकारी को संभालने में परेशानी होने का डर है। लेकिन फिर भी, मैं समझता हूँ कि यह प्रक्रिया मतदाताओं की सुरक्षा और सुनिश्चितता के लिए जरूरी है। 🤔
 
Wow 🤯, सिर्फ भ्रामक बयान न कर देंगे मतदाताओं को! SIR का फायदा ही कुछ लोगों को जानकारी देने में मदद करता है और उन्हें पारदर्शिता के रास्ते पर ले जाता है। लेकिन यह तो भूल गये हैं कि मतदान में सच्चाई का मायने क्या रखती है? 🤔
 
नहीं, ये बिल्कुल सही है! स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी को अपडेट करने और पारदर्शी बनाने का उद्देश्य है, ताकि हम निर्वाचन की अखंडता बनाए रख सकें। लेकिन जब बोले गए हैं कि मतदाताओं के नाम काटने पर रोक लगाई जाएगी, तो यह एक अच्छी बात है। लेकिन इसके पीछे सोचेंगे कि यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि हमारे नागरिकों को उनके मतदान अधिकारों के प्रति जागरूक रखा जाए, और वे अपनी जानकारी सही से अपडेट कर सकें।
 
कोई भी चीज़ में सुधार करने का एक तरीका होता है, ऐसा तो तुम्हारे दिल में ही होता है। लेकिन ये सिर्फ सोचकर और मनाने से कुछ नहीं होता। सिर्फ हमें अपने प्रयास करने और ज़रूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी तो साफ़-सफ़ाई होनी चाहिए, लेकिन हमें यह नहीं देखना चाहिए कि किसी के नाम को काटना। हमें सभी की आवाज़ को सुनना चाहिए और उनकी ज़रूरतों को समझना चाहिए।
 
बोलते बोलते मैंने सोचा है कि ईवेंट्स पर जाकर लोगों को पूरी जानकारी देना चाहिए, ताकि वो अपने मतदान के तरीके के बारे में सही समझ सकें। मतलब यह है कि अगर आपके नाम काटने की सोच रहे हैं तो पहले सिर्फ जानकारी इकट्ठा कर लो, फिर सोचना। और खैर, मुझे लगता है कि इस सीरीज़ के बाद हमें एक नई दिशा में चलने की जरूरत है, जहां हम सभी को सही जानकारी मिल सके। 🤔
 
😂🤣 सिर्फ एक में 📚 पढ़े-लिखे मतदाताओं को भी सीरक्यूट कर देना चाहिए, तभी ही सच्चाई और सच्चे नेता बन सकते हैं 🙌
 
सिर्फ़ सोचते हैं कि SIR प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी तो सही, अपडेट और पारदर्शी बनाने का बोलबाला है, लेकिन किसी का नाम काटने से इसका मतलब नहीं चलेगा। मुझे लगता है कि यह सिर्फ़ एक झूठी सोच है कि हम तो अपने मतदाताओं की जानकारी तो सही, अपडेट और पारदर्शी बनाएंगे। लेकिन दिल्ली चुनाव में हाल ही में घोटाला हुआ था, तो अब यह सिर्फ़ एक टिप्पणी नहीं रहेगी। क्या सचमुच हम तो अपने मतदाताओं की जानकारी सुरक्षित कर पाएंगे। 🤔
 
मुझे लगता है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मकसद केवल मतदाताओं की जानकारी तो सही, अपडेट और पारदर्शी बनाना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी के नाम से छेड़छाड़ करना बंद कर देंगे। मुझे लगता है कि इससे कुछ भी फायदा नहीं होगा। अगर हम मतदाताओं की जानकारी सही से पारदर्शी बनाने की कोशिश करते हैं, तो इसका मतलब यह होना चाहिए कि हम सभी को अपना नाम, पता और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित रखें।
 
सीरीअल में ज्यादातर लोग तभी हंसते हैं जब नये सिरे से देखे जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट्स में नवदीप रिणवा ने ऐसा नहीं कहा है… यह जरूरी है कि हमारी मतदाताओं की जानकारी ठीक से अपडेट हो और पारदर्शी बने। लेकिन यह तो अलग बात है कि उनके नाम काटने का रिस्क।
 
बातचीत के दौरान सुना है नवदीप रिणवा ने बोला है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया मतदाताओं की जानकारी को अपडेट और पारदर्शी बनाने का उद्देश्य है, लेकिन यह तो साफ़ है कि किसी का नाम नहीं काटा जा सकता। मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात है, चाहे कोई भी प्रक्रिया हो। सार्वजनिक जानकारी को साफ़ और सटीक रखना हमेशा फायदेमंद होता है। लेकिन, क्या यह प्रक्रिया वास्तव में सुरक्षित है? क्या इसमें भी गलती होने का खतरा है? ये सवाल मन को उठाते हैं। 🤔
 
सीरियस में ऐसे देख रहा हूँ मतदाताओं की जानकारी तो सही, पारदर्शी बनाने की बात कहीं नहीं है, लेकिन क्या ये सुनिश्चित करेगा कि किसी का नाम काटने में नहीं आएगा? यह एक बड़ा सवाल है और मुझे लगता है कि हमें इसके लिए और अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
 
सीरीज़ में कोई नया खिलाड़ी डालने से पहले उनकी पोर्टफोलियो को अच्छी तरह से देखना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि वे किस तरह की जंग में हैं। SIR की बात करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हमारी मतदान जानकारी पूरी और अद्यतन हो। अगर नहीं तो यह समझना चाहिए कि क्योंकि हमारी राजनीतिक दुनिया में कई चालाकी खेल हैं जहां सच्चाई को छुपाया जाता है।
 
मुझे लगता है कि ईवीएम के बारे में तो हमेशा से चिंता की जा रही थी। अब यह सिर्फ ईवीएम से जुड़ी बात है। लेकिन मेरी राय में इसका मतलब यह नहीं है कि मतदाताओं के नाम काटे जाएंगे। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का उद्देश्य सिर्फ मतदाताओं की जानकारी सही, अपडेट और पारदर्शी बनाना है। तो इसके बाद भी हर व्यक्ति का मतपत्र उनके नाम पर डाल दिया जाएगा। लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मतदाताओं की जानकारी सही और अपडेट हो। तो बाकी सब अच्छा ही चलेगा, मतदाताओं की आवाज़ सुनी जाएगी।
 
क्या दिलचस्प बात है! स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया में तो कोई किसी के नाम को काटने वाला नहीं है। यह तो मतदाताओं की जानकारी को सही, अपडेट और पारदर्शी बनाने की बात है। लेकिन लगता है कि कुछ लोगों में गलतफहमी हो गई है। हमें यह समझना चाहिए कि यह प्रक्रिया सिर्फ मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए है, न कि उनके खिलाफ। हमें अपने मतदान कर्ताओं को इस बात पर जागरूक करना चाहिए कि यह प्रक्रिया उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा करती है।
 
सिर्फ बात करते हैं तो ठीक है, लेकिन मतदाताओं की जानकारी को तो हमें फिर से देखना चाहिए। एक बार फिर से डेटाबेस में डालने से पहले सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वो सही है। नाम काटने जैसी गलतियों को रोकने के लिए, हमें एक और चरण शamil करना चाहिए। इससे मतदाताओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता बढ़ेगी।

मैंने भी तो ऐसा ही सोचा था। पर नाम काटने जैसी बुराई हुई, इसलिए दोबारा से विचार करना जरूरी है।
 
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