‘उसकी आंखें अभी भी नम हैं’: जानें संजय राउत ने सुनेत्रा पवार की बड़ी भूमिका पर क्यों उठाए सवाल

संजय राउत ने अपने बयान में एक बड़ा दांव उठाया है - उन्होंने सुनेत्रा पवार की बड़ी भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, इस मुद्दे (नेतृत्व) पर बात करना अमानवीय है। जिसने भी यह मुद्दा उठाया है, उसमें शून्य मानवता है - चाहे मंत्री हों या विधायक।

महिला नेताओं को ऐसी स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उनके पति खो गए हैं। उनकी आंखें अभी भी नम हैं। उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने की जरूरत है, लेकिन उनका पति खो गया है।

संजय राउत ने बीजेपी पर भी निशाना साधा और कहा, अगर पार्टी को अजित पवार से कोई लगाव है तो सिंचाई घोटाले के 70,000 करोड़ के आरोप बिना शर्त वापस ले ले। उन्होंने कहा, बीजेपी को बिना शर्त आरोप वापस लेने चाहिए।
 
मुझे लगने लगा कि संजय राउत के बयान में ज्यादा आक्रोश है... 😒 उन्होंने सुनेत्रा पवार पर बहुत भारी दंड की धमकी दी है। लगता है कि उनको ये विषय तो समझ नहीं आ रहा है... 🤔 महिलाओं के खिलाफ ऐसी बातें कहकर हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाती हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने अपने बयान में बहुत गलती कर ली है।
 
संजय राउत का बयान सुनकर तो लगता है कि वह तो खुद भी अपने पति को खोने का अनुभव नहीं कर रहा है। महिलाओं के पति खोने की बात कहकर उन्हें दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बदले में वे तो अपने पति को फिर से पाए नहीं पा सकते। यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है 🤕

और बीजेपी पर आरोपों के बारे में, अगर पार्टी को लगता है कि उन्हें ये आरोप वापस लेने चाहिए, तो फिर भी उन्हें अपनी गलतियों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। बस इसलिए कि उन्हें आरोप वापस लेना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास कोई सबूत नहीं हैं जो इन आरोपों की बात करते हैं। 🙄
 
मुझे लगता है कि संजय राउत ने अपने बयान में थोड़ा भारी हाथ उठाया है। महिला नेताओं पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें उनके पतियों को खोने के बाद सुरक्षा और समर्थन की जरूरत है।

और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आरोप वापस लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने नेताओं के बयानों पर विचार करने की जरूरत है ताकि कोई गलतफहमी न हो।
 
मैं तो सोचता हूँ कि अगर मंत्री खो गए हैं, तो उनके पत्नियों को कमर्शियल फ्लाइट्स पर बैठने के लिए 70,000 करोड़ का वेतन नहीं देना चाहिए, फिर क्यों? और अगर संजय राउत ने कहा है कि महिला नेताओं को पति खोने की जरूरत नहीं है, तो मैं सोचता हूँ कि यह उनके लिए एक नया मंत्री बनाने की तरह है - नए मंत्री की जरूरत नहीं, नई जिंदगी की जरूरत है! और अगर बीजेपी 70,000 करोड़ के आरोप वापस लेने चाहती है, तो फिर संजय राउत ने पार्टी को ऐसा कहा है, यह तो एक नई मुठभेड़ है! 🤣👀
 
संजय राउत की बातें सुनकर मुझे लगता है कि उनके दिल में बहुत दर्द हुआ है। वह महिलाओं के प्रति अपनी भावनाएँ प्रकट कर रहे हैं जो हमेशा से उनके साथ थीं। लेकिन क्या हम उन्हें पत्रित नहीं कर सकते?

उनकी बातों से लगता है कि संजय राउत अपने पत्नी पर भी बहुत गुस्सा है। वाह, उसे तो अपने आप से माफ करना चाहिए। नेतृत्व का यह मुद्दा तो सभी को प्रभावित करता है, लेकिन हमें महिलाओं को भी महत्व देना चाहिए।

और फिर, संजय राउत ने बीजेपी पर लगाम लगाने की बात कही। मैं इस बारे में नहीं तो और नहीं। लेकिन अगर उन्हें लगता है कि आरोपों को वापस लेना चाहिए, तो चलिए, हम सब उनके साथ हैं।

हम सभी राजनीतिजगत में अपने नेताओं को एक साथ लेकर आ रहे हैं और उन्हें अपने दांव पर खेलने नहीं दे रहे हैं।
 
संजय राउत ने अपने बयान में बहुत सारी बातें कही है - सबसे पहले उन्होंने सुनेत्रा पवार को बड़ी भूमिका पर सवाल उठाया है, और फिर कहा कि महिला नेताओं को अपने पति खोने के बाद आगे बढ़नी चाहिए। यह तो बहुत सुन्नी बात नहीं है। लेकिन फिर उन्होंने अजित पवार पर सिंचाई घोटाले के आरोप के बारे में कहा, जो कि बहुत बड़ी बात है - और कहा कि अगर बीजेपी ने 70,000 करोड़ के आरोप से खुद को बचाना चाहती है, तो उन्हें शर्तों के बिना वापस लेनी चाहिए। यह तो बहुत ही पारदर्शी और ईमानदार दावा है।
 
संजय राउत के बयान से लगता है कि उनका दिमाग थोड़ा खराब हुआ है। वह सुनेत्रा पवार पर सवाल उठाए बिना अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ सकते थे। महिलाओं को अपने पति खोने के बाद भी अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने की जरूरत है। उनका पति खो गया है, लेकिन वह अपने साथियों के प्रति दयालुता रखनी चाहिए।
 
संजय राउत का बयान देखकर मुझे लगता है कि वह अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए सोच रहे हैं। लेकिन उन्होंने सुनेत्रा पवार की बड़ी भूमिका पर सवाल उठाने का तरीका गलत समझा है। महिलाओं को ऐसी स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए समर्थन और सहायता की जरूरत है।

और बीजेपी पर संजय राउत का निशाना, वही बात कही जो हम सब सोच रहे हैं। अगर पार्टी को अजित पवार से लगाव है, तो उन्हें आरोप वापस लेने की जरूरत है। यही सच्चाई है और इसे स्वीकार करना चाहिए। 🙌
 
😐 मुझे लगता है कि संजय राउत ने अपने बयान में थोड़ा गलत दिशा ली। महिला नेताओं पर ऐसी बातें करना कभी सही नहीं होता। उन्हें खुद को मजबूत बनाने की जरूरत है, न कि पति-पत्नी की समस्या पर ध्यान देना। और अगर भाईजान को सिंचाई घोटाले में आरोप वापस लेना पड़े तो उसे तय करना चाहिए, हमारे पास बहुत सारे सवाल हैं।
 
मुझे लगता है कि संजय राउत ने अपने बयान में थोड़ा बहुत जोर दिया है। ऐसा लग रहा है कि उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर और बीजेपी पर आरोपों पर बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है। मुझे लगता है कि अगर संजय राउत महिलाओं की भूमिका पर विचार करना चाहते हैं तो उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि महिलाएं भी अपने पति को खोने के बाद आगे बढ़ सकती हैं। और अगर बीजेपी को कोई आरोप वापस लेने का मौका मिलना है तो उन्हें पहले इस पर ध्यान देना चाहिए।
 
मुझे लगता है कि संजय राउत ने बहुत बड़ा फैसला लिया है - वह महिलाओं के साथ आघात करने पर बोल रहे हैं। उनके बयान में बहुत गलती है, यह जरूरी है कि हम उन्हें सुधारें।
 
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