उत्तराखंड में पूर्व सैनिक की एकेडमी से निकले 200 फौजी: ट्रेनिंग, रहना और खाना सब फ्री; सेना, ITBP और CRPF में दे रहे सेवा - Uttarkashi News

उत्तराखंड में एकेडमी से निकले 200 फौजी

पूर्व सैनिक चंद्र मोहन सिंह पंवार ने गंगोत्री फिजिकल एकेडमी खड़ी की। यहां बिना एक भी रुपये लिए युवाओं को फौजी बनाया जा रहा है। इसमें ट्रेनिंग, रहना-खाना और फौजी अनुशासन शामिल हैं। 100 से अधिक युवा नियमित रूप से यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं।

साल 2020 में इस एकेडमी की शुरुआत हुई थी। इसमें युवाओं को आर्मी ट्रेनिंग देने के लिए पूर्व सैनिक चंद्र मोहन पंवार ने सहयोग किया था। इस एकेडमी में युवाओं को फौजी की वर्दी पहनने का अवसर दिया जाता है।

इस एकेडमी से अब तक 200 से अधिक युवा भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों में चयनित हो चुके हैं। इन्होंने फिजिकल ट्रेनिंग और मेडिकल टेस्ट क्लियर कर लिया है। कुछ युवाओं ने उत्तराखंड पुलिस और वन विभाग में भी सेवा दी है।

यहां युवाओं को सुबह-शाम 6 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग देते हैं। इसमें दौड़, पुश-अप, सिट-अप और बाधा दौड शामिल है। ट्रेनिंग के साथ युवाओं को रहना-खाना भी मुफ्त मिलता है।

अब तक 100 से अधिक युवा नियमित रूप से यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनमें से कई युवाओं ने अग्निवीर भर्ती में भी भाग लिया है।
 
बिल्कुल, तो क्या हुआ था? ये एकेडमी वास्तव में अच्छी बात है, अगर यह सच है कि युवाओं को फौजी बनाने के लिए पैसे नहीं देने पड़ते। मेरा लगता है कि यह शुभ समारोह होगा, अगर सब सच है।
 
साल 2020 में इस एकेडमी की शुरुआत हुई थी, तब यह तो अच्छा विचार था, लेकिन अब यहां कोई निर्दिष्ट लक्ष्य क्या है? ये युवा सिर्फ फौजी बनने के लिए हैं या उन्हें अपना जीवन बदलने का मौका मिल रहा है? 100 से अधिक युवा यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं, इससे हमें उम्मीद है कि उनमें से कुछ वास्तव में अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। 🤔
 
बिल्कुल सुना कि उत्तराखंड में गंगोत्री फिजिकल एकेडमी में 200 से अधिक युवा अब तक फौजी बन चुके हैं 🤝🏽🔥। इसमें पूर्व सैनिक चंद्र मोहन सिंह पंवार की बहुत भूमिका रही होगी। इन युवाओं को ट्रेनिंग, रहना-खाना और फौजी अनुशासन शामिल करके एक्सपीरियंस दिया जा रहा है। यह अच्छी बात है कि उन्हें मुफ्त में रहना-खाना भी मिलता है 🍽️। लेकिन यह सवाल उठता है कि इन युवाओं को फौजी बनने के लिए कितना पैसा खर्च होगा? 🤑
 
बड़े दिन हैं उत्तराखंड के लिए 🌞, लगता है कि यहां एक नई पहल हुई है जो युवाओं को फौजी बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। 100 से अधिक युवाओं ने यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं और इसमें कई ने अग्निवीर भर्ती में भाग लिया है। ये बहुत अच्छी खबर है, क्योंकि हमारे देश में अब तक सेना में भर्ती होने वाले लोगों को बहुत मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है। इसके अलावा, यह एकेडमी युवाओं को फौजी अनुशासन भी सिखाती है जिससे उन्हें सेना में सफल होने में मदद मिलती है। तो आइए, इस पहल को और बढ़ावा दें और युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित करें।
 
यह तो बहुत बड़ी बात है कि गंगोत्री फिजिकल एकेडमी में 200 से अधिक युवाओं को फौजी बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह सवाल उठता है कि वे सचमुच तैयार हैं या नहीं। ट्रेनिंग और रहना-खाना मुफ्त दिया जाता है, लेकिन इससे कोई स्थायी परिवर्तन नहीं आयेगा। युवाओं को फौजी बनने की इच्छा होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए शिक्षा, नौकरी और अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं।
 
भारत की देशभक्ति और सेवा के लिए युवाओं को इस तरह तैयार करना बिल्कुल सही है 🙏, लेकिन फिर यह सवाल उठता है कि यह एकेडमी वास्तव में अपने युवाओं को स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान देती है या नहीं? अगर सभी युवाएँ इन ट्रेनिंग प्रक्रियाओं में भाग ले रहे हैं तो कोई चिंता नहीं है, लेकिन अगर कुछ विशेष समस्याएँ हैं तो इसके बारे में अधिक जानकारी की आवश्यकता है।
 
🔥 देखा तो ये एकदम सच्ची चाल है! 200 के आसपास के युवा फौजी बनाने का तरीका क्यों नहीं समझाया जाता? 🤔 जैसे कि शुरुआत में भी चंद्र मोहन सिंह पंवार ने बताया था कि यह एक एडवांस्ड फिजिकल ट्रेनिंग है, लेकिन अब तो विद्यार्थियों को बिना परीक्षा किए ये फौजी बनाने की जानकारी मिल रही है। 🤷‍♂️

मुझे लगना चाहिए कि यह एक बड़ा झूठ है! क्या वास्तव में इन 100 से अधिक युवाओं ने फौजी बनाने की प्रक्रिया से गुजर लिया है? 🤔
 
🤔 मुझे यह एकेडमी वास्तव में रोचक लगता है, लेकिन फिर भी मैं सोचने लगा कि युवाओं को इस तरह ट्रेनिंग दिलाने के पीछे क्या मंशा है? क्या वे चाहते हैं कि युवाएं पूरी तरह से अपने आदर्शों और सपनों से दूर जाएं? 🤷‍♂️ और फिर भी, यह एक अच्छा प्रयास है, लेकिन मुझे लगता है कि इसे थोड़ा अधिक व्यवस्थित करने की जरूरत है, ताकि युवाओं को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी हो। 💡
 
यह तो बहुत अच्छा काम है चंद्र मोहन पंवार जी द्वारा किया गया। 100 से अधिक युवा नियमित रूप से यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं और अब तक 200 से अधिक युवाओं को भारतीय सेना में चयनित कर लिया गया है। यह तो युवाओं की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव लायेगा। इनकी ट्रेनिंग बहुत अच्छी है और इसमें रहना-खाना भी मुफ्त मिलता है, इससे युवाओं को फौजी बनने के लिए पूरी तैयारी करायी जा सकती है।
 
आजकल युवा जागरूक हो रहे हैं और अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। इन्होंने सेना में शामिल होने की दिशा में एक फीजिकल एकेडमी खोली है जिसमें वे फौजी बन सकते हैं और अपने परिवार को बेहतर भविष्य दे सकते हैं। यह बहुत अच्छा निर्णय है, लेकिन कुछ सवाल भी उठते हैं। जैसे कि ये एकेडमी कितनी प्रभावी है? क्या ये युवाओं को वास्तव में सेना में तैयार कर रही है? और क्या यह सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि युवाओं को एक अच्छा नागरिक बनने में मदद कर रही है?
 
मुझे लगता है कि अगर हम सब अपने पड़ोसी की दुकान पर जाकर उसके उत्पादों को खरीदने लगे, तो क्या होगा? वहां से मैं 5 रुपये खरीद सकता हूं। लेकिन अगर मेरे पड़ोसी की दुकान में मुझे कोई विकल्प नहीं मिल रहा है, तो मैं उसके बिना जाकर दूसरी दुकान से 5 रुपये खरीद लूंगा। ऐसा ही होता है जब हमारे पास आर्मी एकेडमी का विकल्प नहीं है।

तो मुझे लगता है कि अगर हमें आर्मी एकेडमी के बजाय स्वास्थ्य कक्षाओं में शिक्षित होने का मौका मिले, तो यह अच्छा होगा।
 
यार तो यह एक बहुत बड़ा अच्छा काम है! 200 फौजी उत्तराखंड में बन रहे हैं ? यह तो हमारे देश की future के लिए बहुत अच्छा सोचकर किया गया है। चंद्र मोहन सिंह पंवार जी ने एकदम सही फैसला किया है . युवाओं को बिना किसी रुपये के ट्रेनिंग दी जा रही है, यह तो हमें बहुत उम्मीदें दिलाता है।
 
बात है उत्तराखंड में एकेडमी की, जहां 200 से अधिक फौजी बनाए जा रहे हैं! 🤯 यह तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन कुछ सवाल भी उठते हैं। सबसे पहले, यह एकेडमी कैसे चलने वाली है? क्या यहां पर प्रशिक्षण का फीस में नहीं लगती? और जैसे ही युवा सेना में भर्ती होते हैं, उनके लिए यह तो एक अच्छा अवसर है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें अपने परिवार का ख्याल रखने के लिए पैसे कैसे लगाएंगे।

लेकिन, अगर हम इस एकेडमी के फायदों को देखें, तो यह बहुत ही अच्छा है। यहां पर युवाओं को ट्रेनिंग मिल सकती है और वे अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। और जब वे सेना में भर्ती होते हैं, तो उनके लिए यह एक अच्छा मौका है। लेकिन, सरकार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि युवाओं को फौजी बनने के बाद भी उनके परिवार का ख्याल रखा जाए।

अगर हमारे पास अच्छी और स्थायी नीति है, तो यह एकेडमी वास्तव में युवाओं के लिए एक अच्छा अवसर बन सकती है।
 
बात बढ़ाते हुए, मेरी तो लगती है कि यह एकेडमी बहुत ही अच्छा विचार है, लेकिन जरूरी है कि इसमें सुरक्षा और प्रशिक्षण का ध्यान रखना ज़रूरी है। युवाओं को ठीक होने के बाद फौजी बनने का मौका देने का यह एक बहुत ही अच्छा तरीका है।

लेकिन, अगर सुरक्षा और प्रशिक्षण का ध्यान नहीं रखा जाता है तो यह एकेडमी सफल नहीं हो सकती। चूंकि ये फौजी बनने का एक अच्छा तरीका है, इसलिए इसमें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देना ज़रूरी है।

इसके अलावा, यह एक अच्छा मौका है युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने का। अगर हमारे देश में फौजी बनने के लिए इतनी मेहनत और ज़रूरत पड़ती है, तो फिर यह एकेडमी वास्तव में युवाओं की मदद कर सकती है।
 
वाह! ये तो बहुत बड़ी बात है! 200 फौजी उत्तराखंड की एकेडमी से निकले हैं ... यह तो हमारे देश की Zukunft के लिए बहुत अच्छा है! पूर्व सैनिक चंद्र मोहन सिंह पंवार जी ने यह एकेडमी खड़ी की, और अब युवाओं को फौजी बनाने का अवसर दिया जा रहा है। ट्रेनिंग, रहना-खाना, और फौजी अनुशासन - सबकुछ मुफ्त में! यह तो हमारे सरकार की तरफ से बहुत अच्छी बात है 🤩

मैंने भी अपना बेटा इस एकेडमी में भर्ती कराने का फैसला किया है... क्योंकि यह तो हमारे देश की सेवा करने वाले लोगों को मौका देता है! और जो भी युवा इस एकेडमी से निकलता है, वह फिर भारतीय सेना में चयनित होने की संभावना रखता है। यह तो बहुत अच्छा है! 🙌
 
अगर देश के बच्चों को सेवा करने के लिए तैयार करना है तो ऐसे ही तरीके अपनाए जाने चाहिए। ये एकेडमी वास्तव में भारतीय सेना के लिए शानदार सामग्री बन रही है। जैसे कि युवाओं को फौजी की वर्दी पहनने का अवसर दिया जाता है और उनके पास रहना-खाना मुफ्त मिलता है, यह एक बहुत ही अच्छा विचार है। लेकिन इस तरह से सभी बच्चों को फौजी बनने की प्रेरणा देने की जरूरत नहीं है, क्यूंकि फौजी बनना आसान नहीं है और इसमें बहुत मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है।
 
भाई, तो ऐसी अकादमी है उत्तराखंड में जिसमें 200 फौजी आ गए हैं? यहाँ किस तरह की शिक्षा दी जाती है? और ये अकादमी कब से चल रही थी? पहले तो मुझे लगा कि यह बिल्कुल फ्री है, लेकिन 6 घंटे ट्रेनिंग देने में इतनी मेहनत कैसे कर सकते हैं? और ये 100 से अधिक लड़के एक ही समय पर क्यों ट्रेनिंग करते हैं?
 
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