भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी शील्ड एआई के साथ वी-बैट ड्रोन खरीदने का समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करने, निगरानी और टोही मिशन में उपयोग करना है। ये ड्रोन लगभग 12 घंटे तक हवा में रहने की क्षमता रखता है और संचार और जीपीएस सिग्नल बाधित भी हो सकता है।
इस समझौते के तहत, भारतीय सेना वी-बैट ड्रोन के साथ-साथ शील्ड एआई के हाइवमाइंड ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर का लाइसेंस भी प्राप्त करेगी। यह सॉफ्टवेयर रक्षा प्रणालियों को बिना मानवीय हस्तक्षेप के किसी वातावरण को समझने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने में मदद करेगा।
वी-बैट ड्रोन रूस-यूक्रेन युद्ध में अपना लोहा मनवाया है, और इसे भारतीय सेना के खुफिया और निगरानी मिशनों में उपयोग करने का प्लान है। यह ड्रोन बिना रनवे के तैनात होकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेगा, सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और आतंकी ठिकानों की पहचान जैसे कार्यों में मदद करेगा।
वी-बैट ड्रोन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में तैनात होकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेगा, और सेना को सटीक और समयबद्ध फैसले लिए जा सकेंगे।
इस समझौते के तहत, भारतीय सेना वी-बैट ड्रोन के साथ-साथ शील्ड एआई के हाइवमाइंड ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर का लाइसेंस भी प्राप्त करेगी। यह सॉफ्टवेयर रक्षा प्रणालियों को बिना मानवीय हस्तक्षेप के किसी वातावरण को समझने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने में मदद करेगा।
वी-बैट ड्रोन रूस-यूक्रेन युद्ध में अपना लोहा मनवाया है, और इसे भारतीय सेना के खुफिया और निगरानी मिशनों में उपयोग करने का प्लान है। यह ड्रोन बिना रनवे के तैनात होकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेगा, सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और आतंकी ठिकानों की पहचान जैसे कार्यों में मदद करेगा।
वी-बैट ड्रोन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में तैनात होकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखेगा, और सेना को सटीक और समयबद्ध फैसले लिए जा सकेंगे।