'वो महाराष्ट्र-हरियाणा की तरह बंगाल में भी सत्ता लेना चाहते हैं', I-PAC दफ्तर में ED रेड के बाद

बंगाली राजनेताओं ने ईडी की रेड के बाद जमकर हमलावर बनकर खड़े हुए है. वो महाराष्ट्र-हरियाणा की तरह बंगाल में भी सत्ता लेना चाहते हैं.

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि ईडी ने I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर में छापेमारी की. उन्होंने कहा कि बीजेपी इस तरह की क्रिया कर रही है जैसे वो महाराष्ट्र-हरियाणा में भी सत्ता लेना चाहते हैं.

वह I-PAC के ऑफिस में स्थित थे और उन्होंने कहा कि I-PAC को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर पहचान पत्र (एआईडी) डाउनलोड करने की अनुमति नहीं दी गई है. पूरे राज्य में एक-एक ब्लॉक लीफ स्कैनिंग मशीन लगा रही थी.
 
ईडी की रेड को लेकर बंगाली राजनेताओं ने बहुत आक्रोश दिखाया है. लेकिन मुझे लगता है कि वो वास्तव में यहाँ पर अपनी अस्थिरता और असंतुष्टता को साबित करने के लिए है.

ईडी ने I-PAC के ऑफिस में छापेमारी की थी, जो एक पूरी तरह से वैध काम था. लेकिन बंगाली राजनेताओं ने यह तय कर दिया कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जाए.

मुझे लगता है कि I-PAC को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देना एक अच्छा फैसला था. यह सुनिश्चित करता है कि केवल वोटर ही अपना मतपत्र डालने जाएं, न कि किसी और.
 
बंगाल के राजनेताओं को तो ईडी ने कुछ भी छानबीन नहीं की, बस उनकी चपलता ने पूरा राज्य हिला दिया 🤦‍♂️। I-PAC के नेताओं का आरोप सुनकर लगता है कि ईडी ने उनके खिलाफ बहुत भारी बोझ लगाया है। लेकिन यही सवाल उठता है कि क्या वास्तव में उन्होंने कोई गलती की, या फिर बस अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए पूरा राज्य को जाल में फंसाया गया है? यह एक दिलचस्प सवाल है, लेकिन कोई जवाब नहीं है 🤔
 
मैंने पढ़ा कि ईडी ने I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर में छापेमारी की तो यह बहुत ही गंभीर बात है 🤔। लेकिन वाह, जमीन दिखाई नहीं देती, ईडी ने I-PAC को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं दी। यह सुनकर लगता है कि बीजेपी जैसे पार्टियाँ सत्ता लेने के लिए किसी भी तरीके से तैयार हो जाती हैं। लेकिन यह सब क्यों हुआ, ईडी ने I-PAC के ऑफिस में छापेमारी की तो इसका मतलब क्या? 🤷‍♂️
 
ਇੱਥੇ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ? ਬੰਗਲਾਦੇਸ਼ ਜਿਹੀ ਹਮ ਤਾਂ ਆਪਣੇ ਨੁਕਸਾਨ ਵਾਲੇ ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਬਣਦੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਯਾਰਾਂ ਜਿਹੋ ਨੇ ਸਮਝਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ ਉਹ ਤਾਂ ਬਿਲਕੁਲ ਪ੍ਰੋਫ਼ਾਈਟ ਵਿੱਚ ਆਏ ਹੀ... 😒
 
बंगाली राजनेताओं को समझने की कोशिश करूँ तो… ईडी की रेड ने उन्हें बहुत दुःखित कर दिया है 🤔। अब वो महाराष्ट्र-हरियाणा जैसी बातें करना शुरू कर दिए हैं। पर यही बात है कि अगर हम अपने राज्य में कोई बदलाव लाना चाहते हैं तो विरोधी दल से भी समझौता करना पड़ता है। उन्हें I-PAC की तरह खुद की सफाई कर लेनी चाहिए।
 
ईडी की रेड का यह तो बहुत बड़ा मैच था 🤦‍♂️। लेकिन ये तो विपक्षी दलों को चुनाव के समय सत्ता में आने का मौका देने से नहीं हुआ, बल्कि उनके खिलाफ पूरी तरह से जोरदार हमला करने से हुआ 😒। I-PAC के नेताओं ने भी ईडी की रेड को लेकर बहुत तेजी से आरोप लगाए हैं, यह बात मुझे थोड़ा अजीब लगती है क्योंकि यह सिर्फ एक छापेमारी का मामला था, परंतु I-PAC के ऑफिस को एक-एक ब्लॉक लीफ स्कैनिंग मशीन लगाने से वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं दी गई है यह तो पूरी तरह से गलत है 🤔
 
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को ईडी ने गले लगा दिया है 🤦‍♂️, लेकिन फिर भी वो राजनेताओं की तरह ही खुशहाल हुए हैं.. बीजेपी ने I-PAC पर छापेमारी करने का मामला उठाया है, लेकिन सोचो तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने अपने घरों को छापेमारी के लिए तैयार रखा था.. I-PAC के ऑफिस में स्थित थे, और वहीं पर वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं है, तो क्या बीजेपी ने पहले भी जानकारी दी है? 🤔
 
बंगाल के राजनेताओं को यह बहुत अजीब लगता है कि वो I-PAC के ऑफिस पर छापेमारी के बाद भी चिंतित हैं 🤔. लेकिन सच्चाई तो यह है कि प्रतीक जैन और उनकी पार्टी ने ईडी से लड़ाई लड़ने का सही मौका नहीं छोड़ा, जैसा कि वे आज भी कर रहे हैं 😒. बीजेपी को क्या इंतजार है कि वो I-PAC के ऑफिस पर छापेमारी करते समय त्रिशुल की खुशबू लेकर आये? 🤪

कुछ बातें समझ में आती हैं, जैसे कि पार्टियों के राजनेताओं ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देने से लोगों को कुछ ज़रूरतमंद दस्तावेज़ प्राप्त होने में परेशानियाँ पहुँचाई हैं, लेकिन यह बिल्कुल भी I-PAC के प्रतिक्रिया के साथ जुड़ा नहीं है 🙅‍♂️.
 
बंगाल में ईडी की रेड के बाद कुछ जघन्य चीजें हो रही हैं. I-PAC के ऑफिस पर छापेमारी करना और वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देना तो बहुत बड़ी बुराई है. लेकिन यह तो एक ही, ईडी ने पूरे राज्य में एक-एक ब्लॉक लीफ स्कैनिंग मशीन लगा रखी है जैसे किसानों की खेती में कोई मार्ग नहीं छोड़ रही है. यह तो और भी बड़ी समस्या है. कुछ चुनाव आयोग ने तो अपने राज्य में सत्ता लेने की इच्छा से पूरे व्यवस्था बदल दी है... 🤔
 
मैंने I-PAC के ऑफिस जाने के बाद भी तो वैसे ही महसूस कर रहा था, वहां बहुत ही शांति और निरंतरता... लेकिन अब ऐसा लगता है कि वे बहुत ही अस्थिर हो गए हैं... मेरी पत्नी ने हाल ही में अपने पापा से मिलवाने की बात की थी, उसके पापा ने उन्हें I-PAC पर भारी छापेमारी हुई है... और जैसे ही वहां से निकले, तो लगता है कि विश्वास खत्म हो गया है...
 
बंगाल की राजनेताओं को ईडी की रेड ने जिंदा ठंडा कर दिया है 🤯. उन्हें यह समझना चाहिए कि लोगों के पास अपने वोट का बिल्डिंग मॉडल तैयार करने के लिए समय नहीं है, लेकिन सत्ता खोजने के लिए यह रात नहीं खत्म होगी ⏰. I-PAC को वोटर पहचान पत्र डाउनलोड करने से पहले एक-एक ब्लॉक लीफ स्कैनिंग मशीन लगाना एक बड़ी चुनौती है, इसे समझने की जरूरत है 🤔.
 
बंगाली राजनेताओं को ईडी की रेड पर बहुत गुस्सा आ गया है 🤔. लेकिन पूछताछ करने की जरूरत नहीं है, तो कहिए कि I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर में छापेमारी कैसे हुई? और उनके निर्वाचन क्षेत्रों में एआईडी डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देने से सरकार दो मुश्किलों का सामना कर रही है - एक तो वोटरों की पहचान और दूसरा यह कि बीजेपी के नेताओं को अपने खिलाफ आरोप लगाते रहने का मौका मिलता है 😒.
 
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की आलोचना करने वालों को यह बात याद रखनी चाहिए कि ED ने I-PAC के घर में छापेमारी की, लेकिन पूछना है कि ईडी ने क्यों ऐसा किया ? क्या यह नहीं समझा गया कि I-PAC एक राजनीतिक पार्टी है, और उनके द्वारा की गई गतिविधियाँ अपने स्वयं के परिणाम को देखनी चाहिए। बंगाल में सत्ता लेने की बात तो एक दूसरे राज्यों की तरह नहीं है। यहां की राजनीति की जड़ें गहराई से जानी जानी चाहिए, और केवल इतनी पर ध्यान न दें।
 
मेरी तालियां 😐 ये ईडी को फिर से धमकाने वाले भाई हैं ना, I-PAC के प्रतीक जैन के घर में छापेमारी करना? 🤔 बहुत बड़ा आरोप है और मुझे लगता है कि ईडी ने अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से नहीं किया है. लेकिन, यह सवाल उठता है कि I-PAC क्यों इतने ज्यादा परेशान करना चाहते थे? 🤷‍♂️ और क्या बीजेपी वास्तव में महाराष्ट्र-हरियाणा जैसे राज्य में सत्ता लेने की दिशा में बढ़ रही है? 🤔
 
भाई, ईडी को तृणमूल कांग्रेस वालों ने बहुत गुस्सा करने का मौका दिया है 🤯। वो लोग I-PAC के ऑफिस पर छापेमारी करने जैसे भाग्य के बुरे दिन कर रहे हैं। और फिर वे बोलते हैं कि बीजेपी इस तरह की चालें करती है? 🤔 मुझे लगता है कि वो बस अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो क्यों नहीं थक जाते? 😒 और I-PAC की बात करें, अगर उन्हें एआईडी डाउनलोड करने की अनुमति नहीं दी गई, तो यह सिर्फ एक समस्या है, लेकिन फिर भी वे पूरे राज्य में ब्लॉक लीफ स्कैनिंग मशीन लगा रहे हैं। यह तो बहुत ही परेशान करने वाला होगा। 🤦‍♂️
 
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