विपक्ष को SIR पर चर्चा से कम नहीं कुछ मंजूर, सरकार पीछे हटने को नहीं तैयार... संसद सत्र के दूसर

राज्यसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव सुधारों पर चर्चा को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया. सरकार ने कहा है कि वह एसआईआर पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसके लिए कोई निश्चित समययीमा तय नहीं की जा सकती.

विपक्षी दल संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र के दौरान चुनाव सुधारों पर चर्चा की मांग करते हुए मंगलवार को संसद परिसर में प्रदर्शन कर सकते हैं. विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन के मकर द्वार के पास जमा होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. अगर सरकार एसआईआर पर चर्चा नहीं कराना चाहती तो चुनाव सुधार जैसे व्यापक विषय पर चर्चा कराई जा सकती है और विपक्ष इस मांग पर जोर देगा।

लोकसभा ने मणिपुर जीएसटी (दूसरा संशोधन) बिल 2025 पारित किया. विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पेश किया. सदन की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे आरंभ हुई तो विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा।

राज्यसभा में सभापति के तौर पर पहली बार सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे सीपी राधाकृष्णन ने अपने पहले भाषण में सदस्यों से संस्थानों का सम्मान करने और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, "हर कोई- चाहे सभापति हों या सदस्य- हम सभी को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए. भारत का संविधान और राज्यसभा के नियम हमारे संसदीय आचरण की लक्ष्मण रेखा तय करते हैं. हर सदस्य के अधिकारों की रक्षा की जाएगी, लेकिन उस लक्ष्मण रेखा के भीतर ही."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए कहा कि उनका एक सामान्य किसान परिवार से उठकर महत्वपूर्ण संवैधानिक पद तक पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक है.
 
राज्यसभा में एसआईआर और चुनाव सुधारों पर चर्चा हो रही है, लेकिन सरकार अभी तक तय नहीं कर पाई है कि कब और कैसे इस पर बात की जाएगी। यह देखना रोचक होगा कि विपक्ष कैसे आगे बढ़ता है। मैं चाहता हूं कि हम सभी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और संसदीय आचरण में सुधार करें। 🙏

लोकसभा ने मणिपुर जीएसटी बिल 2025 पारित किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। यह देखना रोचक होगा कि सरकार और विपक्ष कैसे आगे बढ़ते हैं। 🤔

सीपी राधाकृष्णन ने अपने पहले भाषण में सभापति के तौर पर अध्यक्षता करने का संदेश दिया, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या हमारी जिम्मेदारियों को समझने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। ⏰

आजकल चुनाव सुधारों पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि हमें अपने देश के भविष्य को आकार देने का मौका मिल सके। 🗳️
 
मुझे लगता है कि राज्यसभा में मतदाता सूची पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, खासकर जब चुनाव सुधारों पर विपक्ष ने बड़ा ताना बनाया है। लेकिन सरकार ने कहा है कि वह इस पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, बस इसके लिए समय निर्धारित नहीं किया जा सकता। मुझे लगता है कि विपक्षी दल अपने प्रदर्शन के दौरान व्यापक विषयों पर चर्चा करेंगे और सरकार से इस मांग पर जोर देंगे। यह तो एक अच्छा अवसर होगा कि हम सभी नेताओं के बीच खुलकर बातचीत हो।
 
राज्यसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव सुधारों पर चर्चा को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया, यह तो बिल्कुल सही है कि चुनाव सुधारों पर चर्चा करना बहुत जरूरी है, और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में भी कुछ बदलाव लाने की जरूरत है। लेकिन अगर सरकार एसआईआर पर चर्चा नहीं कराना चाहती तो फिर क्या करना? 🤔

मुझे लगता है कि विपक्षी दलों के सांसदों ने सही राह दिखाई है, वे सदन में प्रदर्शन कर सकते हैं और अपनी बात रखने की कोशिश कर सकते हैं। और अगर सरकार एसआईआर पर चर्चा नहीं करना चाहती तो फिर चुनाव सुधार जैसे व्यापक विषय पर चर्चा कराई जा सकती है और विपक्ष इस मांग पर जोर दे सकता है। यह जरूरी है कि सरकार और विपक्ष में बातचीत हो और समस्याओं का समाधान निकाला जाए। 💬

लेकिन राज्यसभा में सभापति के पहले भाषण में सीपी राधाकृष्णन ने बहुत अच्छी बात कही है, उन्होंने सदस्यों से संस्थानों का सम्मान करने और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया। यह जरूरी है कि सभी सदस्यों ने इस बात पर ध्यान देना चाहिए। 💯
 
बात दिलचस्प है यह, राज्यसभा में एसआईआर पर चर्चा तो नहीं हो रही, बल्कि चुनाव सुधारों के बारे में विपक्षी दल ने प्रदर्शन करने का फैसला किया है। लेकिन सरकार ने कहा है कि वह एसआईआर पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, बस समय सीमा तय करने में असमर्थ है।

मुझे लगता है कि चुनाव सुधारों पर चर्चा बहुत जरूरी है, लेकिन सरकार द्वारा एसआईआर पर ध्यान देने से पहले यह विषय पर होने वाले विरोध को रोकने में मदद मिल सकती है। और अगर विपक्ष चुनाव सुधारों पर चर्चा करने के लिए मजबूर है तो उन्हें अपने दावों को मजबूत बनाने की जरूरत होगी।

लेकिन इतना कहने के लिए यह बिल पास हुआ है, जो मुझे खेद है। मणिपुर जीएसटी बिल 2025 के पारित होने से व्यापार और उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
 
राज्यसभा में एसआईआर और चुनाव सुधारों पर चर्चा नहीं करने से सरकार निश्चित रूप से गलत दिखाई देगी, लेकिन अगर विपक्षी दल सत्र के दौरान प्रदर्शन करते हैं तो यह एक अच्छा मौका होगा कि सभी पक्ष अपने विचार साझा कर सकें।

मणिपुर जीएसटी बिल 2025 पर लोकसभा ने पारित कर दिया, लेकिन यह देखकर आश्चर्य हुआ कि सरकार ने चुनाव सुधारों पर चर्चा करने में इतनी धीमी बन गई।

सरकार को यह समझना चाहिए कि राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन का पहला भाषण एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार और विपक्ष में दो अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।
 
बस यह तो साफ है कि सरकार एसआईआर पर चर्चा करने में भूल गई है, और अब विपक्षी दल इन पर ध्यान देने के लिए संगठित हुए हैं . क्या उन्हें पता है कि इससे एक बड़ा चुनावी घोटाला तैयार हो सकता है? 🤔

और राज्यसभा में सबकुछ सही से नहीं चल रहा है। पहली बार सभापति ने अपना भाषण दिया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। यह तो बहुत अजीब है . और प्रधानमंत्री का सभापति सीपी राधाकृष्णन पर जोर देना एक ही में समझ नहीं आता .

क्या हमारे चुनावी व्यवस्था में यह तो छुपा हुआ है ? सरकार एसआईआर पर चर्चा करने के लिए किस समय तय करेगी, यह तो एक बड़ा रहस्य है . 🤷‍♂️
 
अरे, यह तो बहुत ही दिलचस्प बात है... राज्यसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव सुधारों पर चर्चा को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉक आउट कर दिया। यह तो बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, लेकिन सरकार ने कहा है कि वह एसआईआर पर चर्चा के खिलाफ नहीं है। लेकिन इसके लिए कोई निश्चित समययीमा तय नहीं की जा सकती।

मुझे लगता है, कि विपक्षी दलों को चुनाव सुधारों पर चर्चा करने का मौका देना चाहिए। इससे राज्यसभा के सदस्यों को अपनी राय व्यक्त करने का मौका मिलेगा। और अगर सरकार एसआईआर पर चर्चा नहीं कराना चाहती तो तो वह अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कराई जा सकती है।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है एसआईआर और चुनाव सुधारों पर! सरकार ने कहा है कि वह इसमें शामिल नहीं है, लेकिन विपक्षी दलों ने सदन से वॉक आउट कर दिया। यह तो बहुत बड़ा सवाल है कि चुनाव सुधारों पर चर्चा कैसे आगे बढ़ेगी। मैं सोचता हूं कि अगर सरकार एसआईआर पर चर्चा नहीं करना चाहती है, तो विपक्ष इस मांग पर जोर देना चाहेगा।

मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है और इसका समाधान सिर्फ निचोड़कर नहीं चलेगा। हमें अपनी मतदाता सूची को साफ करने और चुनाव सुधारों पर चर्चा करने की जरूरत है। 🤔
 
क्या तो इस तरह सरकार और विपक्ष को पता नहीं कि देश के भविष्य में सुधार करने का समय है! मतदाता सूची के बारे में चर्चा न करें, तो चुनाव सुधारों पर चलने की जरूरत है। और अगर सरकार ऐसा नहीं करना चाहती, तो विपक्ष अपने मंच पर इस मुद्दे पर गरमागरम बातें करे। 🗣️

और लोकसभा ने जीएसटी बिल पास किया, यह अच्छी खबर है। लेकिन चुनाव सुधारों पर चर्चा नहीं हो रही, तो विपक्ष को अपने मंच पर इस मुद्दे पर फिर से ध्यान देने की जरूरत है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया कि उन्होंने जीएसटी बिल पर अपनी राय कह रहे हैं या नहीं। 🤔

राज्यसभा में सभापति ने एक अच्छा भाषण किया, लेकिन वास्तविकता यह है कि चुनाव सुधारों पर चर्चा करने की जरूरत है। और सरकार को इस पर अपनी राय देनी चाहिए, नहीं तो विपक्ष अपने मंच पर गरमागरम बातें करेगा। 🔥
 
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों से मिलने की बात कही है तो क्या यह सच है? राजनेताओं को अपने खराब प्रदर्शन को देखना भी चाहिए और बदलने का तरीका खोज लेना चाहिए 🤔

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा करने की बात है तो यह एक अच्छा विचार है, लेकिन सरकार ने इतना देर तक इनसे बचना जैसे पूर्वानुमान नहीं कर सकते 🤦‍♂️

राज्यसभा में नए सभापति की पदाधिकार शुरू होने पर बहुत उत्साह है, लेकिन यह समय देखना होगा कि वे अपनी पदधी पर अच्छा काम कर पाएंगे या नहीं 👀
 
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