सुप्रीम कोर्ट ने आज देश भर में मतदाता सूची से नाम हटने पर गंभीर निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग को आदेश दिया गया है कि जिन मतदाताओं के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी यानी तार्किक विसंगति की सूची में डाले गए हैं, उनके नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि तार्किक विसंगति की सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों, तालुका कार्यालयों और शहरी वार्ड कार्यालयों में लगाए जाएं। प्रभावित लोग स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि यहां तक कि बूथ लेवल एजेंट के जरिए भी दस्तावेज और आपत्तियां जमा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में स्पष्ट कहा है कि जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को मतदाता सूची पर लोगों की आपत्तियां सुनने की जिम्मेदारी देनी चाहिए। राज्य सरकारें भी चुनाव आयोग को पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध करानी चाहिए ताकि पंचायत भवनों में दस्तावेजों की जांच और सुनवाई सुचारु रूप से हो सके।
इस आदेश से पहले बहुत से सवाल उठ रहे थे, जैसे कि मतदाता सूची पर लोगों के नाम कटने का कारण क्या है? और चुनाव आयोग को ऐसी स्थिति में कहाँ खड़ा रहना चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि सभी मतदाताओं को सुनने का अवसर देना अनिवार्य होगा। इससे पहले भी अदालत ने पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों में ऐसे ही निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य यह है कि लोकतंत्र की सुरक्षा और प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखना। इससे पहले भी अदालत ने कई मामलों में ऐसे ही निर्देश दिए थे।
इस आदेश के बाद चुनाव आयोग और राज्य सरकारें गंभीर परिस्थितियाँ लेकर तैयार हो जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि तार्किक विसंगति की सूची में शामिल मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवनों, तालुका कार्यालयों और शहरी वार्ड कार्यालयों में लगाए जाएं। प्रभावित लोग स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि यहां तक कि बूथ लेवल एजेंट के जरिए भी दस्तावेज और आपत्तियां जमा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में स्पष्ट कहा है कि जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को मतदाता सूची पर लोगों की आपत्तियां सुनने की जिम्मेदारी देनी चाहिए। राज्य सरकारें भी चुनाव आयोग को पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध करानी चाहिए ताकि पंचायत भवनों में दस्तावेजों की जांच और सुनवाई सुचारु रूप से हो सके।
इस आदेश से पहले बहुत से सवाल उठ रहे थे, जैसे कि मतदाता सूची पर लोगों के नाम कटने का कारण क्या है? और चुनाव आयोग को ऐसी स्थिति में कहाँ खड़ा रहना चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि सभी मतदाताओं को सुनने का अवसर देना अनिवार्य होगा। इससे पहले भी अदालत ने पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों में ऐसे ही निर्देश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य यह है कि लोकतंत्र की सुरक्षा और प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखना। इससे पहले भी अदालत ने कई मामलों में ऐसे ही निर्देश दिए थे।
इस आदेश के बाद चुनाव आयोग और राज्य सरकारें गंभीर परिस्थितियाँ लेकर तैयार हो जाएंगी।