'VIP' के नाम से अंकिता के घरवाले अंजान: पिता बोले- झूठ बोल रही SIT, एसपी ने कहा- उन्हीं के लिए तो हम लड़ रहे - Dehradun News

अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए बनाई गई SIT ने शनिवार को VIP का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान बताया। लेकिन अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा है कि जांच के दौरान एसआईटी ने कभी उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है।

उन्होंने कहा, "वो झूठ बोल रहे हैं, पुलिस ने रिसॉर्ट से कोई सबूत नहीं जुटाए। सबूत जुटाने से पहले रिसॉर्ट को गिरा दिया गया था।"

वहीं, SIT के सदस्य हरिद्वार एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने कहा, "ऐसा नहीं हो सकता, सारी चीजें अंकिता के पिता के संज्ञान में थीं और हम उन्हीं के लिए तो लड़ाई लड़ रहे हैं।"

इस बीच, एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने बताया कि VIP शब्द चैट से सामने आया, जिसी आधार पर जांच आगे बढ़ी थी। उन्होंने कहा, "विवेचना के दौरान कई नाम सामने आए थे। इसी क्रम में दो दोस्तों के बीच हुई एक चैटिंग में 'VIP' शब्द का जिक्र मिला।"

उन्होंने बताया, "चूंकि मृतका की मौत हो चुकी थी, इसलिए जिस व्यक्ति से उसकी बातचीत हुई थी, उससे पूछताछ की गई। संबंधित व्यक्ति के तीन-चार बार बयान दर्ज किए गए, जिनमें धारा 164 के तहत न्यायिक और मजिस्ट्रेट स्टेटमेंट भी शामिल थे।"

एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने कहा, "हमने गवाह बना रखा था और बयान नहीं लिए। जांच के बाद धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान को दोषी ठहराया गया है।"

उन्होंने बताया, "कोई भी सबूत नष्ट नहीं किए गए, हमने सबूत जुटाए और उन्हें कोर्ट में जमा कराया।"
 
मैं तो लगता है 🤔 कि यह सारा बातचीत बहुत जटिल है, लेकिन मैं बस एक छोटी सी चित्र बना सकता हूँ।

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| VIP |
| (जिसे |
| धर्मेंद्र |
| उर्फ प्रधान कहते हैं) |
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- वीरेंद्र भंडारी ने कहा : "पुलिस झूठ बोल रही है!"
- एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने कहा : "नहीं, सब कुछ अंकिता के पिता के संज्ञान में था"
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- यह तो एक बहुत ही दिलचस्प मामला लगता है, लेकिन जब तक सबूत निकले, तब तक हमें कुछ नहीं कहना चाहिए... 🤷‍♂️
 
तो यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤯 पुलिस और SIT दोनों एक दूसरे को गलत ठहरा रहे हैं। अंकिता के पिता ने कहा है कि उनकी बातें नहीं सुनी गईं, लेकिन एसपी ने कहा है कि सबूत जुटाए गए। यह तो कितना अनिश्चित है। हमें पता चलना चाहिए कि क्या पुलिस और SIT मिलकर काम कर रहे हैं या नहीं।

मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंकिता की बहन को विश्वास होना चाहिए। उसकी आवाज़ सुननी चाहिए और उनकी जरूरतों को समझना चाहिए। पुलिस और SIT के बीच कोई भी लड़ाई नहीं होनी चाहिए, यह तो हमारे न्यायपालिका की जिम्मेदारी है।
 
मुझे लगता है कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है, तो भी उनके दिमाग में कुछ स्थान क्यों नहीं है? अंकिता के पिताजी जी ने बिल्कुल सही कहा, पुलिस ने रिसॉर्ट से सबूत नहीं जुटाए। और फिर वो विवेचना में दोस्तों के बीच की चैटिंग से आगे बढ़ गए, तो भी उन्हें यहाँ तक नहीं पहुँच पाया। इसके लिए मुझे लगता है कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है, और वो अंकिता के परिवार को छोड़कर सबकुछ सही नहीं कर सकती।
 
पुलिस सरासर झूठ बोल रही है तो फिर क्या? वीरेंद्र भंडारी की बात सुनने के बाद लगता है कि एसआईटी ने उनके खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी तो पुलिस का दावा सच में कह रहा है? 🤔
 
सिटी पुलिस ने VIP का दावा करके लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रही है तो नहीं? पुलिस ने रिसॉर्ट से कोई सबूत नहीं जुटाए, बस वो झूठ बोल रहे हैं।

इस मामले में बहुत सारे सवाल उठते हैं, पुलिस ने दोषी ठहराया तो कहां? क्योंकि अंकिता के पिता ने बताया कि जांच के दौरान एसआईटी ने कभी उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए।

जांच करते समय तीन-चार बार बयान दर्ज किए गए, लेकिन पुलिस कहा है कि हमने गवाह बना रखा था। यह देखकर लगता है कि पुलिस सरासर झूठ बोल रही है।

क्योंकि मृतका की मौत हो चुकी थी, इसलिए जिस व्यक्ति से उसकी बातचीत हुई थी, उससे पूछताछ की गई। लेकिन यह तो भी सवाल उठता है कि उस व्यक्ति ने कब और कहां बयान दिया।

कुछ लोगों को लगता है कि एसआईटी ने रिसॉर्ट को गिरा दिया था, इसीलिए सबूत जुटाने से पहले रिसॉर्ट को गिरा दिया गया था। यह तो बहुत बड़ा सवाल है।

पुलिस सरासर झूठ बोल रही है, उनकी हरकतें लोगों को धोखा देने की तरह हैं।
 
बात तो बहुत ही गंभीर है यह हत्याकांड की। पुलिस तो भी ऐसी बड़ी बातें झूठ बोलती है। यह जांच कैसे चल रही थी, यह समझ नहीं आ रहा है। और यह VIP शब्द कैसे सामने आया, यह तो भी बहुत अजीब है। मुझे लगता है कि पुलिस ने यह सब बहुत ही अनियमित तरीके से किया होगा।

तो ये जांच कैसे चल रही है, यह समझ नहीं आती। पुलिस तो क्या जानबूझकर झूठ बोल रही है? और यह अंकिता के पिता ने बोला था कि एसआईटी ने उनके संज्ञान में सबूत नहीं लिए, तो यह सच में कहा गया होगा।

यह भी समझ नहीं आ रहा है कि विवेचना के दौरान कैसे 'VIP' शब्द का जिक्र मिला, और क्या यह सब सच में हुआ था? पुलिस तो क्या सबूतों को नष्ट कर रही है?

मुझे लगता है कि इस मामले में बहुत सारी गड़बड़ी हुई होगी। और अब यह दोषी ठहराया गया है, तो यह तो एक बड़ा झूठ है।
 
बात तो बस इतनी है कि पुलिस क्यों झूठ बोलती है? अंकिता के पिता की बात समझ में नहीं आती, सारी चीजें उनके संज्ञान में थीं, लेकिन वो सबूत खोजने की कोशिश नहीं करते, बस कह देते हैं कि पुलिस झूठ बोल रही है।

मुझे लगता है कि पुलिस की तरह कोई चैट करने से सबूत जुटाने में आसान नहीं होता, तो फिर सारी चीजें अंकिता के पिता के संज्ञान में थीं, लेकिन उन्होंने बयान नहीं लिए।

क्या हमें पता है कि धर्मेंद्र कुमार ने कहाँ से यह शब्द 'वीपी' कहा, या फिर कोई बात है कि वो चैट का मालिक था, तो फिर पुलिस क्यों सोचती है कि धर्मेंद्र कुमार ने कुछ गड़बड़ी की।

कभी-कभी लगता है कि जांच में बातचीत इतनी आसान नहीं होती, तो फिर पुलिस क्यों सोचती है कि अंकिता के पिता झूठ बोल रहे हैं।
 
मैं तो सोचता हूँ कि पुलिस सुनिश्चित करे की वह सबूत इकट्ठा करते समय ना कोई किरकिंवा, ना कोई गोली, चाट छुराई जाए। तो मुझे लगता है कि अगर अंकिता के पिता ने सोचा था की एसआईटी उनकी नहीं देख रही थी तो वह सही कह सकते हैं। लेकिन मैं यह सोचता हूँ की एसपी जी ने सच बताया होगा, जैसे उन्होंने संज्ञान में सबूत इकट्ठा नहीं किए, फिर भी पुलिस ने धर्मेंद्र उर्फ प्रधान को दोषी ठहराया। यह तो एक बड़ा सवाल है। 🤔
 
अरे, यह तो बहुत दुखद है... जांच के दौरान भी एसआईटी ने अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी संज्ञान में नहीं लिए। यह तो झूठ बोलने की बात है। जब तक हम अपने संज्ञान में सबूत नहीं लेते, तब तक हमें खुद को गलत समझना नहीं चाहिए। 🤔

और यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच के दौरान हमारी बातों पर ध्यान न दिया गया। यह तो सीख है कि हमें अपनी बातों को स्पष्ट और संक्षेप में रखनी चाहिए, नहीं तो गलतफहमी हो सकती है।

लेकिन सबसे बड़ा सबक यह है कि जांच के दौरान भी हमें सच्चाई का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि अगर हम सच्चाई नहीं पाते, तो हम अपने जीवन में गलतियाँ बनाते हैं। 🚫
 
मेरे दोस्त, यह जांच तो सीधे झूठी है… पुलिस इतनी बातें करती है, लेकिन अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने सच कहा, एसआईटी ने कभी उनके संज्ञान में सबूत नहीं लिए थे। यह तो एक बड़ा झूठ है… और SIT के सदस्य हरिद्वार एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल को भी दोषी ठहराया गया है, लेकिन उन्होंने कहा है कि सबूत जुटाने से पहले रिसॉर्ट को गिरा दिया गया था, यह तो एक बड़ा आरोप है… और क्या एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल ने सच कहा कि अंकिता के पिता के संज्ञान में सबूत थे?

मुझे लगता है कि यह जांच तो एक बड़ा राजनीतिक घेराव है, और हमारी देशभक्ति वाले लोगों को यह नहीं पता है… 🤔🚫
 
मुझे यह पता चलता है कि पुलिस ने VIP का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान बताया है, लेकिन अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी को लगता है कि पुलिस झूठ बोल रही है। अगर सच्चाई तो सामने आ रही है तो शायद एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल को अपनी बात बदलनी चाहिए।

मुझे लगता है कि यह जांच लंबी चली गई है, अब पहले नंबर पर मामला तय होने की उम्मीद है। एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल को अपने बयान पर विश्वास रखने की जरूरत है, फिर क्यों खुद को दोषी बता रहे हैं? 🤔
 
अरे दोस्त क्या कर रहे हैं? यह अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच में VIP का नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान सामने आया, लेकिन पुलिस तो फिर भी झूठ बोल रही है। उन्होंने कहा कि एसआईटी ने कभी उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए, यह तो बहुत बड़ा झूठ है 🙄

और सिटी पुलिस तो कुछ भी नहीं कर रही है। उन्होंने रिसॉर्ट से सबूत जुटाने का कोई प्रयास नहीं किया, लेकिन अभी भी वो आरोप लगाते हैं कि धर्मेंद्र उर्फ प्रधान दोषी है! यह तो एक बड़ा मजाक है 🤣

लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि जांच की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। एसपी शेखर सुयाल ने कहा कि VIP शब्द चैट से आया, लेकिन अभी तक उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया। यह तो एक बड़ा रहस्य है 🤔
 
मुझे तो यह जांच बहुत ही अस्थिर लग रही है 🤯। पहले VIP का नाम बताया गया फिर पिता ने कह दिया थोड़ा सा सही नहीं हुआ। लेकिन अगर चैट से 'वीप' शब्द आया तो मुझे लगने लगा कि यह जांच कितनी ठीक से चल रही है 🤔। तो क्या सबूत जुटाने के बाद पहले कुछ ही दिनों में धर्मेंद्र कुमार 'प्रधान' को आरोपी बनाया गया है? यह तो बहुत जल्दी लग रही है ⏱️
 
मुझे यह बात बहुत दुखद लगी कि अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान एसआईटी ने उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, खासकर जब उनकी बेटी की जिंदगी को खतरे में डाला गया था। मुझे लगता है कि पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया है। वो कह रहे हैं कि रिसॉर्ट को पहले ही गिरा दिया गया था, लेकिन यह सच है? 🤔

मुझे लगता है कि पुलिस ने अपना मामला ठीक से नहीं बनाया है। वो कह रहे हैं कि धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान को दोषी ठहराया गया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह भी ठीक से नहीं हुआ होगा। कोई भी सबूत नष्ट नहीं किए गए? 🤷‍♂️
 
बस यही सवाल है कि साक्ष्य कितने महत्वपूर्ण हैं और पुलिस को सुनने की आवश्यकता कहाँ है? अंकिता के पिता ने बिल्कुल सही कहा है कि उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए गए। लेकिन साथ ही, यह भी सच है कि जांच में एक रिश्तेदार या गवाह को अपने बयान देने का मौका देना जरूरी है। शायद हमें यह तय करने की जरूरत नहीं है कि पुलिस सही है या गलत, बस सुनना चाहिए और सबूतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
 
ਆਪਣੀ ਲੜਾਈ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਅੰਕਿਤਾ ਬੰਦਰੀ ਦੇ ਪਿਤਾ ਵੀਰੇਂਦਰ ਭੰਡਾਰੀ ਆਪਣੇ ਸ਼ਬਦ ਨੂੰ ਮਾਫ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਬਹੁਤ ਗੁੱਸੇ ਵਿੱਚ ਆ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਹ ਆਪਣੀ ਲੜਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਯੋਜਨਾ ਤੋਂ ਪਿੱਛੋਂ ਬਿਨਾਂ ਖ਼ਾਲੀ ਹੁੰਦੇ ਉਸ ਕੈਦੀ, ਦੇ ਵਿਰੋਧ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਮੰਨਣ-ਪ੍ਰਮਾਣ ਕਰਨ ਲੱਗ ਪਏ।
 
यार तुमने देखा होगा कि पुलिस भी खेलने लगती है 🤣। पहले तो अंकिता के पिता ने कहा था कि एसआईटी ने उनके संज्ञान में साक्ष्य नहीं लिए, फिर सिटी पुलिस ने ही धर्मेंद्र कुमार को दोषी ठहराया है। लगता है कि यह खेल कौन बनाता है - पुलिस या अपराधी? 😂
 
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