अरे, यह तो मच्छर की गंडासी है! क्या बॉयकॉट करने वालों ने सोचा था कि भारतीय पैसे से खेल नहीं चलेगा? अब टी-20 मैचों की बात करें, मुझे लगता है कि मैंने भी ऐसा ही किया होगा, अगर मेरे दोस्त मुझसे कह देते कि 'नहीं, नहीं, नहीं!', तो मैं उनके साथ खेलता था। लेकिन बाकी मैचों में तो हमें फिर से बैठकर बोलना पड़ेगा, जैसे कि 'ठीक है, ठीक है! अब चलो, टी-20 वाले बॉयकॉट कर दें!'