बात यह है कि बांग्लादेश जैसे देशों पर खेलों की प्रतिस्पर्धा में अपना दिमाग छोड़ना और बुरे मूड में फंसना कैसे अच्छा लगता है? वो कहीं घुसपैठ करने के लिए अपना समय व्यर्थ कर रहे हैं।
बहुत से भारतीय खिलाड़ियों ने उनकी तरह खेल की दुनिया में अपना खास स्थान बनाया था, जैसे सचिन, विवेक, और गौतम बुद्धू। अगर बांग्लादेश ने उन्हें नहीं माना होता, तो शायद आज उनकी कहानी तो दूसरा लोग नहीं सुनता।
यह खेल हमारे जीवन का एक छोटा-सा हिस्सा है, और अगर हम इसे इतना गंभीर बना रहेंगे कि कोई भी देश इसके लिए अपने जीवन को बलिदान करे, तो यह सिर्फ व्यर्थ है। बीसीसीआई और उनके खिलाड़ियों को खेल में रोज़मर्रा की चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरे देश की आलोचना।