West Bengal: 'आप मुझे चोट पहुंचाएंगे, तो मैं और खतरनाक हो जाऊंगी', CM ममता ने PM मोदी को क्यों दी ऐसी चेतावनी?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव और राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासत तेज है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर है। इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी चेतावनी दी है।

सीएम ममता ने पीएम मोदी पर एसआईआर के जरिए बंगालवासियों को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर आप मुझे परेशान करेंगे, तो मैं और ज्यादा खतरनाक हो जाऊंगी।

आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर है। पीएम मोदी ने भी एसआईआर के जरिए बंगालवासियों को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाली लोग अपनी भाषा बोलने के कारण परेशान हो रहे हैं।

सीएम ममता ने कहा कि एक व्यक्ति आया और कहा कि सरकार बंगला भाषा का समर्थन करती है, लेकिन यह सच नहीं है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बंगाली लोग बंगला बोलने के लिए भी परेशान हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर के नाम पर आप लोगों को परेशान कर रहे हैं। शर्म की बात है। चुनाव आयोग, यह आपका काम नहीं है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा था कि चुनाव आयोग आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहा है और यह एक दुखद मजाक है। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बजाय, नए बहाने बनाकर लोगों को परेशान कर रहा है और उनका मताधिकार रोक रहा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल और मई में विधानसभा चुनाव होने हैं।
 
सियासत तेज हो रही है, लेकिन सोचिए, हमारे देश में इतने सालों से एक ही सवाल उठ रहा है - क्या हम वास्तव में जानते हैं कि हमारे नेताओं द्वारा क्या कहा जा रहा है? ममता बनर्जी ने सच कहा है, एसआईआर को राजनीति में इस्तेमाल करने से परेशानियां फैल रही हैं। लेकिन इतने बड़े सवालों पर भी सोचिए, जैसे कि चुनाव आयोग से पूछिए, इसका उद्देश्य हमारे मताधिकार को खतरे में डालना या नहीं? 😐
 
मोदी जी से कहो ये तो सच नहीं है 🤔 क्या सरकार द्वारा एसआईआर का उद्देश्य बंगाली लोगों को परेशान करना है? या फिर इसका उद्देश्य पार्टियों के बीच राजनीतिक खेल खेलना है? 🤷‍♂️

ममता बनर्जी जी ने कहा है कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बजाय, नए बहाने बनाकर लोगों को परेशान कर रहा है। यह सच है? या फिर इसका मतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर का उद्देश्य राजनीतिक खेल नहीं है, बल्कि सामाजिक तंत्र में समस्याओं को हल करना है? 🤔

क्या हमें लगता है कि बंगाली लोगों को परेशान करने वाला हिस्सा एसआईआर है, या फिर यह एक छोटी सी चीज है? मुझे लगता है कि इस समस्या को हल करने के लिए हमें एक साथ मिलकर राजनीति छोड़ देनी चाहिए और अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए। 💪
 
🤣👀💁‍♀️

[Image: एक पुरुष जो अपनी जांघ पर बैठा हुआ है और दूसरे को देखकर कहता है, "यार, तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारी भाषा नहीं समझता?"]
 
😂🤣🎉[कुत्ता नाचने की दृश्य](https://i.imgur.com/O6cGz4S.gif)

😐💔[पैसे को लेकर मुस्कुराने वाला ग्राफिक](http://i.imgur.com/hk0QD9p.png)

🚫👎[नकली नेता चेहरा बनाने वाला GIF](https://i.imgur.com/DuZc6yC.gif)

😂🤣[ममता बनर्जी की पोस्ट पर हंसने वाला ग्राफिक](http://i.imgur.com/LLV8hYs.png)
 
मोदी जी और ममता दीदी तो एक दूसरे से लड़ते रहते हैं, यह स्वाभाविक है 🤣। लेकिन इतनी गंभीर बातें कहकर, दोनों का दिलचस्प सवाल है कि वे अपने मतदाताओं को क्या बताना चाहते हैं? कि हमारे पास बहुत सारे उपकरण हैं जिससे आपको परेशान कर सकते हैं? 🤖

लेकिन सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग और एसआईआर की बातें तो दिलचस्प है, लेकिन मतदाताओं का वोट मांगने का समय आ गया है। ममता दीदी ने सही कहा, चुनाव आयोग को अपने काम से हटकर मतदाताओं की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। और हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग और एसआईआर में कुछ ऐसा होता है जिससे लोगों को राहत मिले। 🤞
 
मैंने सोचा की दिल्ली से बहुत बड़ा फेरबदल नहीं आएगा, हर कोई भाई भतीजी एक-दूसरे को दोस्त बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज है। मैं चिंतित हूँ कि चुनावों में दोनों दल अपनी गन्दगी दिखाकर मतदाताओं को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।
 
मुझे लगता है कि ज्यादातर लोगों ने एसआईआर पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग को बिल्कुल भी नहीं मानना चाहिए। वे सिर्फ इतने पागल दिख रहे हैं कि उनका काम यही तो है। लेकिन मुझे लगता है कि ये एक अच्छा अवसर है जिस पर हमें अपने मताधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।

मैं भी एक्स प्लेटफॉर्म पर कभी-कभी विचार शेयर करता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि इस समय अपनी बात कहने से ज्यादा फायदा नहीं होगा। लेकिन चुनाव में हम सभी भारतीयों की आवाज उठाने के लिए एकजुट होकर चुनावों में भाग लेना बहुत जरूरी है।

मैं सिर्फ इतना कह रहा हूँ कि यह एक महत्वपूर्ण समय है और हमें अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
 
आरोप-प्रत्यारोप में इतनी गड़बड़ी हो गई है कि लोग समझ नहीं पाए कि यह सब क्यों हुआ। सियासत में ऐसी बातें कही जा रही हैं जो और भी खतरनाक हैं। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने काम से दूर रखने वाले लोग ही एसआईआर को चला रहे हैं।

वास्तव में, मैं भी सोचता हूं कि अगर हमें अपने प्लेटफार्मों पर जिम्मेदारी से तौर-तरीके और गूगल मानिटिसन, एयरटेल 5जी, इंडिया फूड डिलीवरी आदि चीजों पर ध्यान देना होगा न की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को रोकने वाले ऐसे मुद्दों पर।
 
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