West Bengal: कोलकाता अग्निकांड में मृतकों की संख्या हुई 11, अब भी 17 मजदूर लापता; एक गोदाम मालिक गिरफ्तार

कोलकाता अग्निकांड: 11 की मौत, 17 लापता। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी।

सोमवार तड़के लगभग 2:30 बजे नजीराबाद रोड पर लगी भीषण आग में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। एक गोदाम के मालिक गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बुधवार को 17 लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने की आशंका है।

आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। ऐसा दावा पास-पसारे गोदामों से आग से बचाव के जरूरी साधन मौजूद नहीं होने पर आया है। फेस्ट-फूड कंपनी ने आग लगने की जांच में सहयोग करने की बात कही है, लेकिन उसका आरोप यह है कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई।

गोदामों में नहीं थी फायर सेफ्टी। फाइबर शीट के कारण आग तेजी से एक से दूसरे गोदाम में फैल गई। जिसका मतलब है कि वहां नहीं थी आग से बचाव की प्रणाली। ऐसा यहां कहा गया है।

दोनों गोदामों को अवैध तरीके से बनाए गए थे, जो पहले वेटलैंड्स का हिस्सा था। जहां सैकड़ों गोदाम मौजूद हैं। पूरी जमीन डेकोरेटर एजेंसी की थी, उसका एक हिस्सा फास्ट-फूड कंपनी को किराए पर दिया गया था, वहीं करीब 12,000 वर्ग फीट के गोदाम में पैकेजिंग सामग्री, पेय पदार्थ और अन्य सामान रखा था।
 
क्या कुछ नहीं होता जब किसी भाई को लाख रुपये का कर्ज देना पड़ता? आग लगने से पहले फायर सेफ्टी तो नहीं थी, ऐसा समझ में आता कि कोई और तो जिम्मेदार होगा। यह तो पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को दुखी कर रहा है। तेजी से आग लगने वाली जगहों पर फायर सेफ्टी तुरंत लागू करनी चाहिए, नहीं तो कुछ ऐसा होने की संभावना ही नहीं।
 
😱🚒🔥 आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। 😤 11 की मौत, 17 लापता... 🙏👮‍♂️ पास-पसारे गोदामों से आग से बचाव के जरूरी साधन मौजूद नहीं होने पर आया है! 🚫💥
 
😱 इस आग की घटना तो बहुत ही चोटपहचातील है... 11 की मौत, 17 लापता? यह तो बहुत ही दुखद और भयानक है। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह तो एक बड़ी गलती है। जैसे ही आग लगी, फाइबर शीट का कारण आग तेजी से एक से दूसरे गोदाम में फैल गई।

क्या हमारे पास ऐसी सुविधाएं नहीं हो सकती थीं? जिससे आग लगने पर पहले ही बाहर निकल जाते। यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण था। और फास्ट-फूड कंपनी ने कहा कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई, लेकिन मुझे लगता है कि इसके पीछे कुछ और भी हो सकता है।

कोलकाता की यह घटना तो हमें सबक सिखाती है कि आग से बचाव की प्रणाली बहुत जरूरी है, और इसका ध्यान रखना चाहिए। 😕
 
आसमान तो अच्छा है, लेकिन ये जंगल की तरह है। आग लगने के बाद मालिक गिरफ्तार, लेकिन आग से पहले ऐसी स्थिति कैसे बनी, यह नहीं समझा। फायर सेफ्टी तो हमेशा से बहुत जरूरी होती है, लेकिन ऐसी जगह पर कहाँ थोड़ा ध्यान? 🤔
 
मुझे लगता है कि आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी बहुत जरूरी होती। लेकिन, फिर ये गोदाम वास्तव में कैसे बनाए गए थे, इसका मतलब नहीं है कि उनमें आग से बचाव की प्रणाली ना होनी चाहिए। जी हां, फाइबर शीट का कारण बिल्कुल सही कहा गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें आग लगने से पहले सब कुछ ठीक से तैयार नहीं करना चाहिए। दोनों गोदामों में अवैध तरीके से बनाए गए थे, इसलिए इसका मतलब है कि हमें इनमें फायर सेफ्टी भी न होने की जगह मिली। लेकिन, अगर यहाँ कहा गया है तो मुझे लगता है कि इसमें कुछ गलत है।

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अगर पहले ही तय नहीं किया गया था कि यहां आग लगने पर ऐसा हुआ, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में लापता होने कैसे? गोदामों को एक्सटेंशन करने वालों ने कहीं सोचा था कि आग लगने पर वहां सारा सामान जल जाएगा, तो फिर उन्हें क्या नहीं पता था? 🤔

कुछ लोग कहते हैं कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए कहा जाता है ताकि कोई चीज़ छुपी न रहे। अगर आग वास्तव में पास के गोदाम से शुरू हुई, तो फिर उस समय जब वहां लोग थे, तो उन्हें भी आग लगने की जानकारी थी, और वो कहीं नहीं चले गए।
 
बड़ा चिंताजनक आग लगने की बात है तो यह। लेकिन अगर आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, तो क्या हुआ? आपने सोचा होगा कि आग लगने से पहले खत्म होनी चाहिए। लेकिन ऐसा न हो पाया। और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इसका मतलब यह है कि गोदामों में आग से बचाव की प्रणाली नहीं थी। जिससे आग फैल गयी, और अब 11 लोगों की मौत हो गई। 🤕

और सरकार ने क्या किया? कोई जवाब नहीं दिया। यह तो बहुत बुरा है। पूरी जमीन अवैध तरीके से बनाई गई थी, और फास्ट-फूड कंपनी ने भी कुछ नहीं किया। इससे सरकार को बहुत शर्म आनी चाहिए। लेकिन अभी तक तो कोई जवाब नहीं दिया गया। 🤔
 
आग लगने की जांच में तो देखें, लेकिन यह सवाल उठता है कि आग कैसे इतनी जल्दी फैल गई। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह बात साफ़ है। लेकिन फायर सेफ्टी के बिना तो क्या उम्मीद की जा सकती है? यह सवाल हमारे देश में लगातार उठ रहा है, खासकर बड़े शहरों में।

आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह तो एक बड़ा आरोप है। लेकिन आग लगने के बाद क्या किया गया? आंधवाले पुलिस ने धमकाने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह एक बड़ा जोखिम था, जो हुआ।

मुझे लगता है कि आग लगने की जांच में तेजी और ईमानदारी जरूरी है। लेकिन इसके अलावा हमें अपने देश में फायर सेफ्टी की समस्या को हल करना भी जरूरी है। यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हमें खोजना होगा।
 
जिंदगी तो कभी-कभी आग लग जाती है, और हमें यहीं से सीखना पड़ता है कि आग कैसे नियंत्रित की जाए। कल कोलकाता में ऐसी आग लग गई जिसमें कई लोगों की जान गई। यह तो बहुत दुखद है, लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि आग कैसे रोकनी थी, अगर तो पहले से ही फायर सेफ्टी नहीं थी।

आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह तो बहुत बड़ी गंभीरता की बात है। और फिर भी आग लग गई, जिससे कई लोगों की जान गई। यह हमें यह सिखाता है कि हमें अपने आसपास की चीजों में ध्यान रखना चाहिए ताकि ऐसे हालात न हों।

आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, और इसके परिणामस्वरूप कई लोगों की जान गई। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारी दुनिया में आग लगने के बाद क्या करना चाहिए।
 
😔 यह तो बहुत ही दुखद बात है ... आग लगने से पहले उन गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, जिससे लोगों की जान गई। मुझे लगता है कि हमारी सरकार और निजी सector को एक साथ मिलकर गोदामों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं कभी नहीं हो सकतीं।

आग लगने से पहले उन गोदामों में आग से बचाव के जरूरी साधन नहीं थे, जिससे आग तेजी से फैल गई। ऐसा दिख रहा है कि लोगों ने अपनी जान और संपत्ति को खतरे में डाल दिया।

मुझे लगता है कि हमें गोदामों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित करने वाले उपकरण और तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। इससे आग लगने पर पहले से ही आग बुझाने में मदद मिलेगी।
 
ਅੱਜ ਤਕ ਦੀ ਹੋਈ ਆਗ ਬਾਰੇ ਸੋਚਣ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ। ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਜਿਹੇ ਸਥਾਨ 'ਤੇ ਫायर सेफਟੀ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਘਰ-ਮਹਿਲ ਆਦਿ ਨੂੰ ਬਿਹਤਰ ਸਾਬਤ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ।

ਅੱਜ ਅੱਗ ਲਈ 11 ਮਾਣਵਜ਼ ਦੀ ਜਾਨ ਖਰਚ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਪਿਛੋਂ ਗ਼ਦਮੋਂ ਵਿੱਚ ਫायर ਸेफਟੀ ਨਾਲ ਜੁੜੀ ਘਾਟ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ।
 
😒 आग लगने की जांच करने वालों को तो पता होना चाहिए कि गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं होना एक बड़ी समस्या है। लेकिन जैसे ही आग लगने लगी, तो सब अचानक ही बोलते आ गए। पहले तो यह दावा था कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई, फिर यह कहा गया कि फाइबर शीट के कारण आग एक से दूसरे गोदाम में फैल गई। इसका मतलब है कि सब झूठे बोल रहे हैं और पुलिस को अभी भी 17 लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने की जरूरत है। यह तो एक बड़ा मामला है, लेकिन मुझे लगता है कि सबकुछ सही तरीके से नहीं चलेगा।
 
🚨 यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। आग लगने से पहले फायर सेफ्टी नहीं थी, जैसा कि पास-पसारे गोदामों में भी नहीं थी। यहां पर इतनी बड़ी आग लगने की वजह से 11 लोगों की मौत हो गई है, और अभी तक 17 लोग गुमशुदगी में हैं।

आग लगने के बाद फेस्ट-फूड कंपनी ने कहा है कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई, लेकिन यहां पर नहीं थी आग से बचाव की प्रणाली। फाइबर शीट के कारण आग तेजी से एक से दूसरे गोदाम में फैल गई।

मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हमें गोदामों में फायर सेफ्टी सुनिश्चित करनी चाहिए, और आग लगने से पहले उसकी जांच भी करानी चाहिए। इसके अलावा, अवैध तरीके से बनाए गए गोदामों को देखना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। 🚧
 
बहुत बड़ा दुःख है कि आग लगने की वजह से इतने लोगों की जान गई। इसका मतलब है कि गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं होनी चाहिए थी। यह एक बहुत बड़ी अनियमितता है। और फिर भी, आग लगने से पहले देखने को तो मौजूद था, लेकिन उस पर कुछ नहीं किया गया।

आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। यह एक बहुत बड़ा अनियमितता है। और आग लगने से पहले देखने को तो मौजूद था, लेकिन उस पर कुछ नहीं किया गया।

मुझे लगता है कि फेस्ट-फूड कंपनी ने आग लगने की जांच में सहयोग करने की बात कही, लेकिन इसका मतलब यह है कि उनके पास तो आग लगने से पहले देखने को मौजूद था, लेकिन उन्होंने नहीं किया।

दोनों गोदामों को अवैध तरीके से बनाए गए थे, जो पहले वेटलैंड्स का हिस्सा था। यह एक बहुत बड़ी चिंता है। और फिर भी, गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं होनी चाहिए थी।
 
🔥 यह तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आग लगने से पहले फायर सेफ्टी नहीं थी। नजीराबाद रोड पर लगी आग से जिंदगी गंवाने वाले लोगों की भावना में दर्द है। अगर ऐसा दावा सच है कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई, तो यह बहुत खतरनाक है।

फेस्ट-फूड कंपनी की बात समझ में आती है, लेकिन आग लगने की जांच में सहयोग करने पर रुककर उन्हें आग से बचाव की प्रणाली नहीं लगाने देना चाहिए था। गोदामों में फाइबर शीट के कारण आग तेजी से एक से दूसरे गोदाम में फैल गई। ऐसा तो कभी भी होने की जगह नहीं थी।

क्या यह घटना हमें ध्यान दिलाती है कि आग लगने से पहले फायर सेफ्टी और आग से बचाव की प्रणाली कितनी जरूरी है? 🤔
 
agar us ghar ke baare mein soch rahe ho toh fir bhi kya kiwo? yahaan par fire safety ke bare mein sabse pahle sochna chahiye. kabhi-kabhi hum har cheez ko zyada jaroorat deta hai, lekin yehi zarurat fire safety ke liye nahi hai. fir bhi kya kuch kiya gaya tha? agar woh ghar ek avaidh cheez banakar bana diya gaya toh kaisa koi thoda sa maqsad rahegi? phir bhi humein yah batana chahiye ki fire safety kit nahi hai, fir fire engine aane mein kaise paaya jaayega? aur agar fir bhi uske baad kuch ho raha hai toh fir bhi humein pata chahiye.
 
अगर तुमने कभी नजीराबाद रोड पर चढ़ाई की है तो वैसी भीषण आग देखी होगी। ये तो बहुत बड़ी घटना है। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह एक बड़ा कमजोरी है। फाइबर शीट के कारण आग तेजी से फैल गई, ऐसा लगता है कि आग से बचाव की प्रणाली नहीं थी। दोनों गोदाम अवैध तरीके से बनाए गए थे, यह जानना भी मुश्किल लग रहा है।
 
यह तो बहुत बड़ा दुर्घटना हुआ। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। मैंने अभी कोलकाता जाकर गोदाम देखना चाहूंगा। फिर यह पूछताछ, क्यों ने ऐसा नहीं किया। यहां पर हमारे पास फाइबर शीट बहुत आम है, लेकिन इसके बाद भी आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी। तो क्या हमें अपने शहर की दीवारों पर गोली चलाने पड़ेंगे? क्या यहां पर कोई समझदारी नहीं है? और पूरा बाजार डेकोरेटर एजेंसी की थी, फास्ट-फूड कंपनी को किराए पर दिया गया था। तो इसका मतलब यह निकलता है कि सबकुछ ठीक से नहीं चल रहा था। 🚒
 
ये तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है 🤕। आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह एक बहुत बड़ी गलती थी। और क्या हुआ, आग तेजी से एक से दूसरे गोदाम में फैल गई, जिससे लोगों की जान गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि गोदामों को अवैध तरीके से बनाया गया था। और इसके अलावा, आग लगने से पहले वहां आग से बचाव की प्रणाली नहीं थी, जिसका मतलब है कि वहां फायर एक्सटिंग्यूशन डिवाइस भी नहीं थे।

मुझे लगता है कि फेस्ट-फूड कंपनी ने आग लगने की जांच में सहयोग करने की बात कही, लेकिन उसका आरोप यह है कि आग पास के गोदाम से शुरू हुई। लेकिन यह तो एक बड़ी गलतफहमी है। अगर आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, तो इसका मतलब है कि आग वास्तव में कहां से शुरू हुई, यह पता नहीं चलता।

आज मुझे यह दृश्य न जाने पसन्ता हुआ। अगर हमारे गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, तो क्या होगा, इसकी कल्पना भी नहीं आती। लेकिन आग लगने से पहले गोदामों में फायर सेफ्टी नहीं थी, यह एक बहुत बड़ी गलती है। और हमें इस तरह की घटनाओं से सीखना होगा।
 
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