बड़े बड़े सोचो, शायद शरिया कानून लागू ना होने की बात में सबकुछ सही नहीं होगा, क्या हमारे देश में भी यही स्थिति पैदा हो सकती है?
शरिया कानून वाले देशों की तुलना में हमारे देश में खुले और समावेशी होने की बात अच्छी लगती है, लेकिन जब तक यह स्थिति पैदा नहीं होती, तब तक यह सवाल उठता है कि कैसे लागू होंगे।
बांग्लादेश में ऐसा होने का मतलब यह नहीं है कि हमारी सरकार भी निर्णय पर दुबारा सोचने के लिए मजबूर हो जाएगी, लेकिन शायद एक बात ध्यान रखें, ताकि देश में ऐसी भावनाएं पैदा ना हों।
कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की बात सुनना चाहिए, फिर ही यह निर्णय लिया जा सकता है।