'हिंदू-बौद्ध-क्रिश्चियन काउंसिल हसीना के पालतू कुत्ते': यूनुस के एडवाइजर बोले- सेक्युलरिज्म हटेगा, शरिया नहीं आएगा; भारत हमें भूटान न समझे

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार ने कहा है कि शरिया कानून नहीं लागू होंगे, लेकिन इस बात से यह सवाल उठता है कि वे ऐसा कैसे करेंगे।
 
शरिया कानून की बात करते हैं तो फिर भी यह नहीं समझते कि हमारे देश में भी ऐसे ही कानून लागू होते हैं, लेकिन हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं वो कानून बदलने लगते हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तो कहा है कि शरिया कानून नहीं लागू होंगे, लेकिन फिर भी उनके देश में भी ऐसा ही स्थिति है। क्या वे सोच रहे थे कि हमारे देश में तो कुछ और नियम हैं जो शरिया कानून को टाल सकते हैं? 🤔

मुझे लगता है कि बांग्लादेश की सरकार तो बस बात करने से भरी हुई है, उनको समझने की जरूरत नहीं है। हमें अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरों की बात मानकर।
 
मैंने देखा था कि मुंबई में एक पार्क में खिड़की लगाई गई है, और अब वहां चढ़ाई करना आसान नहीं है 🤔। लेकिन बाकी तो बिल्कुल सही, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार को ऐसा कहने में कुछ तैयारी की ज़रूरत थी। शरिया कानून बहुत जटिल होते हैं, यह समझना मुश्किल है कि उन्हें कैसे लागू किया जाए। और फिर भी, अगर वे ऐसा कहना चाहते हैं तो उनकी सरकार को पहले से ही कुछ तैयारी करनी चाहिए थी।

मैंने मेरी बहन की बाल्टी देखी है, जिसमें कभी-कभी हम उसमें चावल का खाना लेते हैं, और फिर सीधे उसमें प्याज लगाते हैं। ऐसा तो शरिया कानून की बात करने वालों को भी करना पड़ सकता है 🤷‍♂️
 
शायद हमें समझना चाहिए कि बांग्लादेश में शरिया कानून लागू करना आसान नहीं है 🤔। उनकी सरकार तो कह रही है कि शरिया कानून नहीं लागू होंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई मुस्लिम देशों में शरिया कानून पहले से ही लागू हैं। तो फिर उन्हें ऐसा कैसे करेंगे?

मुझे लगता है कि बांग्लादेश की सरकार को अपने देश की विविधता और सामाजिक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। शरिया कानून लागू करने से पहले उन्हें अपने समाज में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर विचार करना चाहिए।
 
बड़े बड़े सोचो, शायद शरिया कानून लागू ना होने की बात में सबकुछ सही नहीं होगा, क्या हमारे देश में भी यही स्थिति पैदा हो सकती है?
शरिया कानून वाले देशों की तुलना में हमारे देश में खुले और समावेशी होने की बात अच्छी लगती है, लेकिन जब तक यह स्थिति पैदा नहीं होती, तब तक यह सवाल उठता है कि कैसे लागू होंगे।
बांग्लादेश में ऐसा होने का मतलब यह नहीं है कि हमारी सरकार भी निर्णय पर दुबारा सोचने के लिए मजबूर हो जाएगी, लेकिन शायद एक बात ध्यान रखें, ताकि देश में ऐसी भावनाएं पैदा ना हों।
कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की बात सुनना चाहिए, फिर ही यह निर्णय लिया जा सकता है।
 
🤔 मुझे लगता है कि यह बहुत ही जटिल समस्या है। अगर बांग्लादेश के अंतरिम सरकार ने शरिया कानून नहीं लागू करने की घोषणा की है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कहाँ से शुरुआत करेंगे? देश में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का सामना करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, शरिया कानूनों को लागू करने के लिए न्यायपालिका और अदालतें भी अपनी जगह हैं। मुझे लगता है कि यह सरकार पहले ही बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है की बांग्लादेश की सरकार बहुत मुश्किल स्थिति में है। शरिया कानून लागू करना आसान नहीं है, खासकर जब दूसरी तरफ बाकी दुनिया तो इसे नहीं मानती। लेकिन अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपने देश में से लोगों का समर्थन पाना होगा। और अगर वे इसका सामना नहीं कर सकते तो फिर उनकी सरकार कमजोर है।
 
मुझे लगता है की तो ये तो एक मजेदार बात है फिलहाल, लेकिन सोचते समय मैं एक पुरानी कहानी से जुड़ गया था, जिसमें एक गाँव के लोगों ने खुद से शहर आने वालों को जगह देने के लिए कुछ ऐसा बनाया था जिससे वह वहाँ बस सके। और तभी उन्होंने यह सोचा कि हमें किसी देश के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कोई विदेशी हमारा गाँव आता है तो फिर क्या करें।
 
बहुत दिलचस्प है 🤔, ये तो हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में शरिया कानून के बारे में है। अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी संविधान में बदलाव लाने होंगे, लेकिन ये बहुत आसान नहीं है 🙅‍♂️। हमारे देश में भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब हमने अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी।

अब बात करते हैं शरिया कानून, यह तो एक बहुत ही जटिल विषय है। लेकिन अगर हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो इससे हमारे साथ भी उनके संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है 💔
 
शरिया कानून की बात हो रही है, यह तो बहुत दिलचस्प है। मेरा तो मन कहीं और गुम हो गया। बांग्लादेश की सरकार ने तो कह दिया है कि शरिया कानून नहीं लागू होंगे, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बड़ा सवाल है। अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें पहले अपनी सरकार में से ज्यादातर लोगों को शरिया कानूनों के खिलाफ होना चाहिए। नहीं, तो यह एक बहुत बड़ा झगड़ा होगा। और अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपनी सरकार में से ज्यादातर लोगों को शरिया कानूनों के खिलाफ होना चाहिए। 🤔
 
भारत और पाकिस्तान की जंग के बाद बांग्लादेश ने अपने देश में अलग अलग राजनीतिक दलों से मिलकर सरकार बनाई है 🤔। अगर वो शरिया कानून लागू नहीं करना चाहते तो फिर क्यों इस बात पर चर्चा कर रहे हैं? 🤷‍♂️

मुझे लगता है कि अगर बांग्लादेश की सरकार वास्तव में शरिया कानून लागू नहीं करना चाहती है तो फिर उन्हें अपने देश के सभी न्यायालयों में इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और सुनवाई बंद कर देनी चाहिए। लेकिन अगर वो यही नहीं करते तो तो शायद वे शरिया कानून को अपने देश में लागू करने के इरादे से पीछे हैं।

मुझे लगता है कि बांग्लादेश की सरकार ने यह दावा सिर्फ एक राजनीतिक उपक्रम के रूप में किया हो जिसमें उन्होंने अपने देश के लोगों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर ऐसा कुछ कहा है जिससे वह अपने लिए एक निजी बिंदु बना सकें।
 
बांग्लादेश की और भी बड़ी समस्याएं हैं जो उन्हें हल करनी होंगी। शरिया कानून बहुत बड़ा मुद्दा है लेकिन वे ऐसा कैसे करेंगे कि शरिया कानून नहीं लागू होंगे, यार यह सवाल है जो उन्हें हल करना होगा। मुझे लगता है कि वे कुछ और कर सकते थे। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि वे अपने देश को बेहतर बनाने का प्रयास करें। 🤔

मैं समझता हूँ कि शरिया कानून एक जटिल मुद्दा है लेकिन इस तरह से उन्हें हल करने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। वे अपने देश को मजबूत बनाने का प्रयास करें, ताकि वहां शांति और सुरक्षा का माहौल हो।
 
मुझे लगता है 🤔 कि बांग्लादेश में शरिया कानूनों को लागू करना मुश्किल होगा, लेकिन फिर भी सरकार ने अपना दावा किया है। मेरे विचार में यह बहुत ही अजीब लग रहा है 🤷‍♀️। अगर वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, तो इसका मतलब ये होगा कि उन्होंने अपने नियमों को बदल दिया है। लेकिन अगर वे पहले से ही उनका अनुपालन कर रहे थे, तो फिर क्या शरिया कानूनों को लागू करने की बात स्वाभाविक नहीं लग रही है? 🤔 मुझे लगता है कि सरकार ने अपने दावे पर सोच-विचार नहीं किया है।
 
बंग्लादेश में शरिया कानून नahi लागू होने की बात तो देखकर अच्छी लगती है, लेकिन यह सवाल उठता है कि वे ऐसा कैसे करेंगे। पूरा देश एक ही समय में कई दिशाओं में बढ़ रहा है, तो फिर शरिया कानून इतनी आसानी से निकलने देंगे? मुझे लगता है कि बंग्लादेश की सरकार तो अपने खुद के कामों पर ध्यान देनी चाहिए, न कि दूसरों की बात सुननी।
 
मुझे लगता है की ये बात तो बहुत जटिल है। अगर शरिया कानून नहीं लागू होंगे, तो इससे निकलने वाली स्थिति में कौन सा सरकार बनेगा, और कैसे? भारत में हमारे देश के नियमों और कानूनों को बनाने में बहुत से लोगों की राय होती है, लेकिन बांग्लादेश में तो यह अलग ही मामला है। अगर वे शरिया कानून नहीं लागू करना चाहते हैं, तो फिर उनके देश की क्या राजनीति होगी? मुझे लगता है की हमारे देश को इस तरह से बांग्लादेश की समस्याओं में नहीं डालना चाहिए।
 
बाकी तो ये देश में ऐसा होना चाहिए, जिधर भी नज़र डालो वो सही हो। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार की बात सुनकर खुश हूँ। शरिया कानूनों को लागू करने का प्रयास तो एक अलग मामला है, जिसमें हमें और चिंतित रहना चाहिए।

लेकिन अगर बांग्लादेश ऐसा कर सकती है तो फिर ये भी संभव है। हमारे देश में कुछ लोग तो बाकी दुनिया की बातों पर सुनने को तैयार रहते हैं। अगर वे सही तरीके से समझ सकते हैं और ऐसा कर सकते हैं तो फिर यह अच्छा है।

पर मुझे लगता है कि शरिया कानूनों को लागू करना एक जटिल मुद्दा है। हमें इस पर बहुत सोचकर विचार करना चाहिए।
 
बिल्कुल सही कहा गया है, भारत में हमारे देश में शरिया कानूनों पर बहुत बड़ा मतभेद है। बांग्लादेश की तुलना में हमारे पास खुले और आधुनिक समाज में शरिया कानूनों को लागू करना थोड़ा मुश्किल होगा। अगर वे ऐसा करेंगे, तो यह उनके पूर्ववर्ती शासन की नीति को चुनौती देगा और भारत में एक अलग पहचान बनाएगी। इसके अलावा, शरिया कानूनों को लागू करने से हमारे देश में विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे समाज में अस्थिरता आ सकती है।
 
🤔 शरिया कानून लागू नहीं होगा, तो फिर वे देश में क्या नियम बनाएंगे? 🚫 केवल पुरुषों की सुरक्षा के लिए या महिलाओं के लिए भी कोई कानून नहीं होगा। यह बांग्लादेश के लिए बहुत बड़ा खतरा है! 😱
 
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