हिंदू वोटर के लिए विकास, मुस्लिम के लिए घुसपैठ-हिंदुत्व: मालदा-सिंगूर में मोदी का 59 सीटों पर निशाना, क्या सिंगूर लौट पाएगी टाटा की फैक्ट्री

मामा, यह बात तो सच है कि पीएम मोदी ने सिंगूर में टाटा के बारे में कुछ नहीं कहा। लेकिन ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लोगों को उम्मीद थी कि वे सिंगूर में इंडस्ट्री लगाएंगे। तो अगर वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो क्या हम उन पर भरोसा कर सकते हैं?

मालदा और मुर्शिदाबाद जिले में भी सिंगूर जैसा ही मुद्दा बन रहा है। यहां मुस्लिम वोट बंटने का खतरा है, इसलिए BJP ने अपनी राजनीति में हिंदुत्व को शामिल करने का प्रयास किया है। पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की, जिससे हिंदू वोटर्स को एक तरफ किया गया।
 
मुझे लगता है कि यह सब बहुत ही जटिल है। मैं समझता हूँ कि टाटा निर्माण संयंत्र पर सिंगूर जैसी चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हमें अपने देश को आगे बढ़ाने के लिए एक-दूसरे पर भरोसा करने की जरूरत है। पीएम मोदी ने बोले हैं और उन्होंने स्वीकार किया है कि वे ऐसी चीजें नहीं कह सकते। मुझे लगता है कि हमें इस पर बहुत शांति बनाए रखनी चाहिए और देखना चाहिए कि क्या आगे कुछ अच्छा होगा।
 
मानो, यह सच है कि सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने की बात थी लेकिन अब तो कुछ नहीं हुआ, तो क्या हम उन पर भरोसा कर सकते हैं? 🤔 मुझे लगता है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार को अपनी राजनीति में और सावधानी बरतनी चाहिए। मालदा जैसे मामलों को देखकर यह बात लगने लगी है कि भ्रष्टाचार तो कहीं नहीं होता, लेकिन जब हमें पता चलता है तो भी हमें इस पर भरोसा करना पड़ता है। मैं उम्मीद करता हूं कि आगे भी ऐसी चीजें न हों।
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! मैंने देखा था बाजार, अब पूरी तरह से गायब हो गया है। और इसका मतलब ये है कि सिंगूर निर्माण पर पुलिस से लड़ना भी मुश्किल हो सकता है। पीएम मोदी की बात नहीं करने से अच्छा मौका चला गया, लेकिन मुझे लगता है कि सबको अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। मैंने सुना था कि पूर्वी बंगाल में ऐसा ही मुद्दा बन रहा है, वहां भी हिंदू वोटर्स को एक तरफ करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह सब राजनीति है, और हमें अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। 🤔
 
मैंने देखा है कि पार्टी के लोग सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने की बात करते थे, लेकिन अब यह बात वास्तविकता में नहीं आ रही है। मुझे लगता है कि अगर हम किसी भी चीज़ पर भरोसा करना शुरू कर देते हैं, तो हम सिर्फ चिंतित होंगे। पीएम मोदी ने सिंगूर जैसे मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन वह अपनी राजनीति में हिंदुत्व का प्रयोग कर रहे हैं। यही समस्या है!
 
मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ 🤕, पूरे पश्चिम बंगाल में सिंगूर जैसी समस्या बढ़ रही है। मैं समझता हूं कि पीएम मोदी ने सिंगूर पर विशेष ध्यान नहीं दिया, लेकिन यह तो बहुत ही चिंताजनक है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर आश्वासन देने की उम्मीद की। अगर वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो क्या हम उन्हें विश्वास करने का राजा मान सकते हैं? 🤔

मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में भी यही समस्या बनी हुई है। यहां मुस्लिम वोट बंटने का खतरा है, इसलिए BJP ने अपनी राजनीति में हिंदुत्व को शामिल करने का प्रयास किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे देश की एकता और सौहार्द को खतरे में डालना चाहिए। 🙏

मुझे लगता है कि हमें अपने वोटों का सही उपयोग करने की जरूरत है, ताकि हमारे देश की राजनीतिक स्थिति में सुधार हो सके। 🤞
 
मैं तो समझता हूँ कि लोगों को उम्मीद थी कि सिंगूर में इंडस्ट्री लगाई जाएगी, लेकिन लगता है कि पार्टियाँ अपने वादों से दूर आ गई हैं 🤦‍♂️। यह तो कुछ और है जिस पर हमें सोचना होगा। मालदा में घुसपैठ न करना ही एक बात है, लेकिन इसके पीछे क्या खेल चल रहे हैं? मैं नहीं समझ सकता कि अगर पीएम मोदी ने इंडस्ट्री लगाने का वादा किया था, तो फिर सबकुछ ब्लॉक में कर दिया गया। हमें अपने नेताओं को कड़ी मेहनत करनी होगी, ताकि वादों को पूरा किया जा सके।
 
मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत ही गड़बड़ी है। पीएम मोदी ने सिंगूर पर बात करने से पहले अपने फैसलों को अच्छी तरह से विचार किया नहीं था। अगर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लोगों ने भी इस पर सोचा होता, तो शायद वे इंडस्ट्री लगाने के बारे में थे। लेकिन लगता है कि अब मुझे अपनी उम्मीदें खोनी पड़ गईं।

मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में सिंगूर जैसा ही मुद्दा तो बहुत गंभीर है। यहां मुस्लिम वोट बंटने का खतरा है, इसलिए BJP ने अपनी राजनीति में हिंदुत्व को शामिल करने का प्रयास किया है और पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की, जिससे हिंदू वोटर्स को एक तरफ किया गया। लेकिन अगर हम अपने मतदान कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते, तो शायद यह समस्या हल हो सकती है।
 
मुझे लगता है कि यह सारा खेल थोड़ा अजीब है, अरे... प्रधानमंत्री और राजनीतिज्ञ स्टेडियम में टाटा निर्माण के बारे में तो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन उनके साथियों और समर्थकों को उम्मीद थी, यह तो सच है...

मुझे लगता है कि अगर हम लोग उन्हें भरोसा करने लगें, तो यह सब खेल खत्म ह जाएगा। मैं तो समझता हूँ कि पार्टियाँ अपनी राजनीति में जानबूझकर ऐसा स्थिति बनाती हैं, लेकिन फिर भी लगता है कि हमारे देश को यह बहुत ही अजीब सा खेल तो खेलना पड़ता है।

क्या हमें अपने नेताओं पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है? मैं तो समझता हूँ कि प्रधानमंत्री और राजनीतिज्ञ हमेशा लोगों की बात नहीं कह सकते, लेकिन फिर भी उन्हें सुनना चाहिए।

क्या मैं गलत हूँ?
 
🤔 सोचते हैं तो ये सच है कि पीएम मोदी ने सिंगूर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी सरकार के द्वारा लगाए गए उद्योग कानून से क्या हुआ? किसानों और छोटे व्यवसायियों को भी इस कानून से नुकसान हो रहा है।

और ममता बनर्जी जैसे राजनेताओं पर भरोसा करना आसान नहीं है जब तक कि वे अपने दम पर काम न करें और हमारे जिलों में सच्चाई बताएं। पीएम मोदी जैसे नेता किसी भी मामले में अपनी सरकार से थोड़ा अलग होते हैं और उनका दृष्टिकोण अलग होता है। हमें यह नहीं कह सकते कि वे हमेशा सही होंगे, लेकिन कम से कम उन्हें स्थिति को समझने में सफल होने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मैंने भी सोचा था कि पीएम मोदी की टाटा के बारे में बात नहीं करने की बात सही होगी। लेकिन अब जब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लोगों ने सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने की उम्मीद कर रहे थे, तो यह अच्छा नहीं लगता। अगर वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो हम उन पर भरोसा करने का फायदा नहीं उठा पाएंगे। मालदा और मुर्शिदाबाद जिले में भी सिंगूर जैसा ही मुद्दा बन रहा है, यहां मुस्लिम वोट बंटने का खतरा है। पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की, इससे हिंदू वोटर्स को एक तरफ किया गया।
 
मेरी राय तो यह है कि भाजपा ने सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने का प्रस्ताव छोड़ देने के बाद, वो क्या कर सकते हैं? अगर वो इतने बड़े कदम उठाने में असमर्थ हैं तो फिर वो कैसे सरकार चला सकते हैं?

और यह भी सच है कि पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की, जिससे उन्होंने हिंदू वोटर्स को एक तरफ किया। लेकिन मेरी राय तो यह है कि अगर वो अपने वोटों को संभालने में असमर्थ हैं तो फिर वो कैसे राज्यभर में अपना दबाव बना सकते हैं।

मेरे अनुसार, भाजपा ने अपनी राजनीति में हिंदुत्व को शामिल करने का प्रयास इसलिए किया है ताकि वो मुस्लिम वोटर्स को अपनी ओर आकर्षित कर सकें। लेकिन इससे उन्हें स्थिरता नहीं मिलेगी, बल्कि यह उनकी सरकार को भी खतरे में डाल देगी।
 
मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत ही मुश्किल स्थिति है, जैसे कहें तो भारतीय राजनीति में खेल खत्मा होने वाला है। पीएम मोदी की पार्टी और उसके प्रमुख लोगों ने सिंगूर पर बहुत बोलबालना किया, लेकिन उनके द्वारा क्या करने का वादा था? यह तो सब एक बड़ा झूठ है जैसे कहें तो मास्क है, जिसकी मदद से हम अपने खराब निर्णयों को छिपाने की कोशिश करते हैं।
 
मुझे लगता है कि यह तो दिलचस्प मुद्दा है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पीएम मोदी ने सिंगूर पर कोई खास बात नहीं कही है, लेकिन उनकी सरकार ने इंडस्ट्री के लिए कई प्रस्ताव तैयार किए हैं और उन्हें जल्द ही शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं।

मुझे लगता है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने सिंगूर पर बहुत बड़े हopes रखे थे, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो फिर हमें उन्हें खुद पर भरोसा करना चाहिए या किसी और को देखना चाहिए।
 
बेटा, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! पीएम मोदी की सिंगूर में टाटा की बात तो सच में ठीक है, लेकिन अगर उनके पार्टी के लोग वास्तव में इंडस्ट्री लगाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं, तो ये एक बड़ा झूठ है। ममता बनर्जी की पार्टी ने ऐसा क्यों आश्वासन दिया? और अब मालदा और मुर्शिदाबाद जिले में यही समस्या होने का खतरा तो बहुत बड़ा है!

पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात करने से हमें लगता है कि वे अपने वोटबैंक को कैसे बनाए रख रहे हैं। लेकिन यह तो बहुत शर्मिंदगी है! अगर वे वास्तव में विकास के लिए काम कर रहे थे, तो उन्होंने ऐसा नहीं किया।
 
मैं समझता हूँ कि आपको यह बात बहुत परेशान कर रही है। पीएम मोदी जी की इस नीति से कई लोगों को डर लग रहा है और उन्हें यह सवाल उठना पड़ रहा है कि कहीं उनकी वोट नहीं गिनी जाएगी। मैं आपको बता दूँ, यह एक बड़ा मुद्दा है, हमें अपने लिए बात करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि यह सब तो बहुत जटिल है। मोदी जी और टाटा के बारे में पूछने से पहले मैं समझना चाहता हूं कि इंडस्ट्री लगाने का मतलब क्या है? अगर वे नहीं कर सकते तो फिर क्यों? और ममता बनर्जी जी की पार्टी ने सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कोई परिणाम नहीं दिख रहे हैं।

मुझे लगता है कि हमें अपनी उम्मीदों को अलग करना चाहिए। अगर सरकार ने सिंगूर में इंडस्ट्री लगाने की घोषणा की थी, तो फिर वह कर सकती है। लेकिन अगर वह नहीं कर पाई, तो हमें अपनी उम्मीदों को कम करना चाहिए और सरकार के साथ मिलकर देखें, कि वे क्या कर सकते हैं।

मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में भी यही समस्या है। हमें अपनी राजनीति को अलग करना चाहिए। अगर हमारी राजनीति में हिंदुत्व को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, तो फिर हमें इस पर विचार करना चाहिए। लेकिन हमें यह भी नहीं forget करना चाहिए, कि हमारे देश में बहुत से लोग हैं, जो अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों से हैं।
 
मुझे लगता है कि यह सब थोड़ा जटिल है, लेकिन अगर मैं समझता हूं तो यह कहावत सच में चली आती है - "अच्छे दिन किसी के लिए अच्छे नहीं होते" 🤔

मुझे लगता है कि अगर भाजपा ने हिंदुत्व को अपनी राजनीति में शामिल करने का प्रयास किया है, तो यह सिर्फ उन्हें और उनके समर्थकों को ही फायदा हुआ होगा, नहीं कि हमारे देश के लिए। 🤷‍♂️

और अगर ममता बनर्जी की पार्टी ने भी अपने हिसाब से राजनीति की तो यह तो हमें और भी बुरे विकल्पों का सामना करना पड़ जाता। हमें हमेशा अपने लिए सबसे अच्छा विकल्प चुनना चाहिए, न कि दूसरों के अनुसार। 👍
 
मैंने सुना है कि पूरे देश में सिंगूर जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। यह तो बहुत शर्मिंदा है कि पीएम मोदी ने टाटा के बारे में कुछ नहीं कहा। लेकिन यह सच है कि भ्रष्टाचार और दुर्लभताएं हर जगह मौजूद होती हैं।

मैं ममता बनर्जी से उम्मीद करता था कि वह हमारी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगी, लेकिन लगता है कि वे भी अपने लिए टाटा जैसे अवसरों को खो दिया। और अब मालदा और मुर्शिदाबाद जिले में यही समस्या बन रही है, यह तो बहुत बड़ा खतरा है।

पीएम मोदी ने मालदा में घुसपैठ पर बात की, इससे हमारे देश में धार्मिक और सांस्कृतिक विभाजन की लहर चल रही है। यह तो बहुत भयानक है कि हमारे देश में ऐसी चीजें बढ़ रही हैं।
 
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