'हजारों कुत्तों, बंदरों की हत्या' पर दिल्ली में तेलंगाना भवन के सामने हंगामा, कार्यकर्ताओं ने स

दिल्ली में तेलंगाना भवन के सामने हजारों कुत्तों, बंदरों की कथित हत्या पर तवजो देते हुए जंतु अधिकार कार्यकर्ताओं ने बड़ा हंगामा किया। उनका आक्रोश राज्य में जानवरों पर अत्याचारों के आरोपों से भर गया, जहां हजारों आवारा कुत्तों और सौ से अधिक बंदरों की कथित नृशंस हत्याओं को लेकर है।

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन मानव-जंतु संघर्ष को कम करने के नाम पर जानवरों को खत्म करने की नीति अपना रहा है, जो अमानवीय है और कानून की भी अवहेलना है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के आदेश हैं कि आवारा जानवरों को मारना अवैध है।

दिल्ली में तेलंगाना भवन के सामने बड़ा हंगामा
इस संदर्भ में, प्रदर्शनकारियों ने सरकार को याद दिलाया कि समस्या का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि विज्ञान में छिपा है। उन्होंने कहा कि हत्या कोई समाधान नहीं है, उनकी मांग है कि सरकार 'पशु जन्म नियंत्रण' नीतियों का सख्ती से पालन करे।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 'स्टेरिलाइजेशन', 'वैक्सीनेशन' और 'हैबिटेट प्रोटेक्शन' को ही इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान बताया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि मारकर आबादी कम करने का तरीका अस्थायी और क्रूर है, जबकि जन्म नियंत्रण से दीर्घकालिक रूप से आवारा जानवरों की संख्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
 
ब्राउज़र में तो देखो कैसा काम करता है... तेलंगाना भवन के सामने ऐसे हुए बड़े-बड़े विरोध, लेकिन ब्राउज़र में टिप्पणी करने का मौका नहीं मिलता। पहले तो क्या खेद है, फिर क्यों ऐसा होता है? और इतनी जानकारी देने के लिए भी ब्राउज़र पर ध्यान देने की जरूरत नहीं... 🤦‍♂️😡
 
तो यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है… आजादी के बाद भी हमारे देश में जानवरों के साथ कैसी तरह से व्यवहार किया जाता है? हमें सिर्फ खिलौनों के रूप में देखना नहीं चाहिए, लेकिन उनके साथ भी सम्मान का हिस्सा बन सकते हैं। प्रदर्शनकारियों की बात समझते हैं कि तेलंगाना भवन के सामने जो कथित हत्याएं हुईं, वह बहुत ही अमानवीय और अवहेलना है।
 
तो ये तेलंगाना भवन की बात है... मैंने देखा है कि वहाँ कुत्तों और बंदरों की कहीं भी नहीं दिखाई देते, लेकिन आवारा जानवरों की संख्या वाला हंगामा चल रहा है। लगता है उनके दिमाग में यहां तक कि तेलंगाना भवन के सामने भी कुत्तों और बंदर नहीं पड़ते। लेकिन जैसे ही वे सोचते हैं कि आवारा जानवरों को खत्म करके समाधान मिल जाएगा, तो फिर उन्हें यकीन नहीं होता कि इससे कुछ हद तक परिणाम निकलेगा या नहीं।
 
बिल्कुल सही है यह सोचा। हमें अपने जानवरों को बहुत प्यार और देखभाल करनी चाहिए। अगर हम उनकी देखभाल नहीं करेंगे, तो वे ऐसा बुरा होने की स्थिति में आ जाएंगे।

मुझे लगता है कि हमें अपने आसपास के पर्यावरण को भी अच्छी तरह से सोच-समझकर देखना चाहिए। अगर हमारे आसपास के वातावरण में परिवर्तन आ गया है, तो हमारे जानवरों की भी ऐसी ही समस्याएं हो सकती हैं।

हमें अपने जानवरों की देखभाल करनी चाहिए और उन्हें स्वस्थ रखना चाहिए। अगर हम उनकी देखभाल नहीं करेंगे, तो वे हमारे लिए खतरनाक हो सकते हैं।
 
अरे देखो, इस मामले में तो सरकार द्वारा लागू किए गए नियम तो सही हैं, लेकिन इसका लाभ कैसे उठाया जाए। यह बात सोचते समय तो लगता है कि हमारे पास इस समस्या का समाधान है। अगर हम 'पशु जन्म नियंत्रण' नीतियों को सही ढंग से लागू करें, तो आवारा जानवरों की संख्या जरूर कम हो सकती है। लेकिन इसके लिए हमें स्टेरिलाइजेशन, वैक्सीनेशन और हैबिटेट प्रोटेक्शन जैसी चीजों को ध्यान में रखना होगा। तो फिर भी, यह एक अच्छा विचार है, ना? हम देखें, कि इस समस्या का समाधान कैसे पाया जा सकता है।
 
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