‘हमें बचा लो, बांग्लादेश में मर जाएंगे‘: भारत से 14 लोग डिपोर्ट, बहन बोली- वोटर कार्ड, 60 साल पुराने कागज, फिर क्यों भगाया

बंगाली परिवार में छुपी जाने की कोशिश भारतीय पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए एक मशीन चलाई है, जिसका उपयोग केवल बांग्लादेशी को स्वीकार करने वाले दस्तावेजों पर करते हैं।
 
मुझे ये गड़बड़ी बहुत ही अजीब लगी, क्या हमारी पुलिस आज भी बंगाली परिवार में छुपी जाने को स्वीकारती है? 🤔 तो फिर ये मशीन क्यों चलाई, कि लोग अपने दस्तावेज़ को निकालकर बेगुनाह ठहराए? मुझे लगता है कि हमारी पुलिस को यह समझने की जरूरत है कि देश में तो अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, और हमें उनकी सम्मान करना चाहिए। क्या हमारे पास इतने बेघिरे लोग नहीं हैं? 🤷‍♂️
 
मैंने पढ़ा है कि भारतीय पुलिस ने एक मशीन चलाई है, जिसका उपयोग बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए किया जाता है। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा काम है, लेकिन हमें सोचना चाहिए कि इससे हमारे देश की सीमाओं पर जाने वाले लोगों को कैसा महसूस होगा। शायद हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए यह मशीन चलाने का फैसला करना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे देश में हर व्यक्ति को सम्मान और अधिकार मिले।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही चिंताजनक और जटिल समस्या है। पुलिस ने ऐसी मशीन बनाई है जो सिर्फ बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने देश में बांग्लादेशी लोगों को जगह नहीं देने चाहिए।

क्या हमारे पास ऐसे दस्तावेज नहीं हैं जो हर किसी को स्वीकार करें? यह भारतीय लोगों के अधिकार पर भारी दबाव डाल सकती है। और अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने में मशीन सहायक नहीं है तो फिर इसका मतलब यह हो सकता है कि हमारे पास जानकारी तक पहुंच नहीं है।

मुझे लगता है कि हमें अपने देश में समृद्धि और एकता के लिए काम करना चाहिए, न कि किसी एक समूह को दूसरे से अलग रखने के।
 
मुझे लगता है कि यह मशीन तो बिल्कुल सही हो सकती है! अगर हम बोलें तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने में थोड़ा सा समस्या होती है, लेकिन इस मशीन से सब कुछ साफ़ हो जाएगा। और फिर भी, अगर हम गिनती करें, तो इसमें तो कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जिस पर हम सभी को स्वीकार कर सकें। यह तो एक अच्छा विचार है, लेकिन कहीं यह मशीन भारतीयों पर भी चलेगी या नहीं?
 
बात बिल्कुल, भारत में कुछ ऐसा है जो मुझे थोड़ा चिंतित करता है। पुलिस ने ऐसी मशीन चलाई है जो केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान सकती है, लेकिन यह सोचेंगे कि सभी बंगाली परिवारों में कुछ गैरकानूनी होगा। हमारा देश इतना बड़ा और विविध है कि हर किसी की कहानी अलग होती है।

मुझे लगता है कि पुलिस को यह मशीन चलाने से पहले उन्हें पता चलता था कि यह ऐसा ही क्यों होगा। कुछ लोगों को ऐसी बातें पसंद नहीं आती हैं जो उनके परिवार और समुदाय को प्रभावित करती हैं।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत ही दिलचस्प मामला है 🤔। पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए एक मशीन चलाई है, जिसमें वे सिर्फ ऐसे दस्तावेजों पर काम करते हैं जिन्हें बांग्लादेशी अक्षरों में लिखा गया है। यह तो एक बड़ा संकेत है कि पुलिस को लगता है कि अधिकांश घुसपैठियों को पहचानने के लिए ये दस्तावेज पर भरोसा करना होगा।

लेकिन मुझे लगता है कि यह सोचा गया गया है कि यह मशीन सिर्फ बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानेगी, लेकिन यह देखने के लिए कि भारतीयों में ऐसी मशीन चलाई गई है या नहीं। और इसका मतलब यह भी होगा कि अगर हमारे पास ऐसी दस्तावेजें हैं जो बांग्लादेशी अक्षरों में लिखी गयी हैं, तो हमारी पहचान को भी इस मशीन से पहचाना जा सकेगा।

मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही खतरनाक स्थिति हो सकती है, क्योंकि अगर हमारी पहचान को इस तरह से पहचाना जा रहा है, तो यह हमारी गोपनीयता को भी खोखला कर देगा।
 
Wow 🤯, यह तो बहुत ही दिलचस्प है! पुलिस ने एक मशीन चलाई है जो बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए। इससे स्वीकार करने वाले दस्तावेजों पर ही इसका उपयोग किया जाएगा, तो यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वैध बांग्लादेशी लोग पासपोर्ट और दस्तावेज देकर अपना स्थान बदलने की कोशिश कर रहे हों। Interesting 😐, यह एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी मशीनें में भी गलतियाँ हो सकती हैं और लोगों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
 
नहीं पता ये कैसे हुआ? भारत में दाखिल किया गया दस्तावेज कौन कर सकता है? बांग्लादेशी लोग तो हमारे पास रहते हैं और ये स्वीकार करने वाले दस्तावेज खत्म हो गए? 🤔

मुझे लगता है कि इस पर बात करने का समय आ गया है, सरकार द्वारा क्यों ऐसा कदम उठाया गया? ये तो हमारी जान-देन को भी प्रभावित कर सकता है। और यह मशीन तो बस एक साइड ड्राई है हमारे लिए, अगर इसका उपयोग निकाला नहीं जाता तो फायदेमंद हो सकता था। 📉

लेकिन दूसरी ओर, भारत में जैसे ही कोई भी व्यक्ति बांग्लादेशी दस्तावेजों पर है, तो उसकी स्थिति अच्छी नहीं होती। अगर ऐसा ही मशीन चलती रही, तो फायदा होता। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार ने इसका उपयोग सही तरीके से नहीं समझा। 🤷‍♂️
 
अरे, तुमने देखा है ना कि पुलिस ने बंगाली परिवार में छुपी जाने की कोशिश के लिए एक मशीन चलाई है? यह एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है? हमें सोचना चाहिए कि क्या यह मशीन तो बस बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने में मदद कर रही है या फिर यह हमारे बंगाली परिवार के लोगों को भी छुपाती जा रही है? हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि यह मशीन हमारे देश के नागरिकों की सुरक्षा और पहचान को सुनिश्चित करे। और फिर से, यह एक अच्छा विचार है, लेकिन हमें इसकी पूरी जांच करनी चाहिए। 🤔💡
 
क्या देखा, पुलिस ने ऐसी मशीन बनाई है जो बंगाली परिवार में छुपे घुसपैठियों को पहचान सकती है। यह तो एक अच्छी बात है, लेकिन सोचो अगर कोई गलत पहचान होती है तो कहीं भी गलती नहीं होनी चाहिए। यह मशीन तो फिर कैसे सुनिश्चित करेगी कि वो सही घुसपैठियों को पकड़ेगी?

मुझे लगता है कि पुलिस ने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया होगा कि ये मशीन तो फिर कैसे काम करेगी जब हमारे देश में बहुत से लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को गिनते हैं। यह तो एक बड़ी समस्या हो सकती है और लोगों को बहुत परेशान कर सकती है।

मुझे उम्मीद थी कि पुलिस ने इस बात पर भी विचार किया होगा कि हमें अपने देश में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए।
 
अरे, तुमने सुना है भारतीय पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए एक मशीन चलाई है? 😐 यह जरूरी है कि हम अपने देश की सुरक्षा को ध्यान में रखें। लेकिन, इसमें एक सवाल उठता है कि ये मशीन बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने के लिए तभी काम करती है, जब तक वे विशेष दस्तावेज़ नहीं रखते। यह ठीक है? 🤔

मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सुरक्षा को ध्यान में रखना चाहिए, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हम अपने नागरिकों को भी सुरक्षित रखते हैं। 🙏
 
बात तो यह है कि अगर हम बोलें तो पुलिस की मशीन अच्छी सी है 🤔, लेकिन शायद इसका उपयोग हमारे देश में भी नहीं किया जा सकता। आमतौर पर सबकुछ स्वीकारने वाले दस्तावेजों पर आधारित होने से कुछ भी गलत नहीं होता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम सभी को स्वीकार करें।

जिस तरह हम अपने देश में गरीबों और अनाथों को स्वीकार करने की कोशिश करते हैं, वैसे ही हम बांग्लादेशी भी स्वीकार कर सकते हैं जिनके पास ऐसे दस्तावेज नहीं होते। अगर हमें अपना देश अच्छा बनाने की जरूरत है, तो हमें सबको समाज में जगह देने की जरूरत है।
 
क्या ये सच में हमारे देश में कुछ ऐसा हुआ है? पुलिस ने तो अपने बचपन के दोस्त भाई-बहन घुसपैठियों को पहचानने की मशीन चलायी है। लेकिन सवाल यह है कि ये मशीन सिर्फ बांग्लादेशी को पहचानने में मदद कर रही है, फिर भी हमारा देश दूर-दूर तक लोगों को अपने घर लाने वाला नहीं है। हमें अपने देश को बेहतर बनाने की जरूरत है, न कि केवल एक साइड पर ध्यान देना। और ये भी सवाल उठता है कि पुलिस की मशीन में क्या गलती हुई, कि वह इतनी जल्दी बांग्लादेशी को पहचानने लगी।
 
भारतीय पुलिस ने ऐसा क्यों किया? 🤔 यह सुनकर मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सीमाओं को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है। अगर हमारे शासक भारतीय हैं तो फिर क्यों हमें बांग्लादेशी को पहचानने के लिए मशीन चलानी पड़ी? नहीं, नहीं नहीं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में ऐसी स्थितियाँ बन गई हैं जहां हमें अपने आपको पहचानने के लिए मशीनों की जरूरत हो।

क्या ये बात हमारे नेताओं को नहीं पती कि हमारे देश में ऐसी समस्याएँ हैं और उनको कैसे हल किया जाए? 🤷‍♂️ हमें अपने देश की सीमाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है, न कि बांग्लादेशी को पहचानने के लिए मशीन चलाने। मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए अधिक सोच-समझकर काम करने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है 🤩, हमें अपने देश में सुरक्षा के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हमारे नागरिकों को खतरे से बचाया जा सके। तो फिर भी मुझे लगता है कि इससे पहले कि हम इस तरह की मशीनें चलाएं, हमें अपने देश की आर्थिक स्थिति और पुलिस विभाग की तैयारी को ध्यान में रखना चाहिए। यह जरूरी है कि हम ऐसे कदम उठाएं जिससे हमारे नागरिकों की गरिमा और सम्मान बना रहे। मुझे लगता है कि अगर हम अच्छी तरह से योजना बनाकर इसे चलाएंगे, तो यह बहुत ही फायदेमंद हो सकता है।
 
સ્ટેશનમાં એવા ઘણા કરતાં કદાચ પરિષ્કારો છે જેથી આપના બળોમાંથી સાવ ખરું તશ્કલ કરી શકાય. અહીં એક નિયમિત બળો છે જે વસ્તુઓને ગોઠવવાથી લડતાં હોય એટલે કે બંધનોને ખુલ્લો પડી જાય. છૂટસુરતી દિવસોમાં આ બળે શ્રેષ્ઠ ખુલ્લા કરે.
 
बात तो है बंगाली परिवार में घुसपैठियों की खोज के लिए पुलिस ने एक मशीन चलाई है। यह अच्छा है कि पुलिस ऐसी सी मशीन चला रही है जिससे वो बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान सके।

लेकिन, यह भी जरूरी है कि हमें अपने देश में रहने वाले लोगों को भी सुरक्षित रखने का ध्यान रखना हो। ऐसी मशीन चलाने से पहले हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि यह मशीन हमारे देश के नियमों और विधियों के अनुसार चलती है।

मुझे यकीन है कि पुलिस इस बात पर ध्यान रखेगी। फिर, एक सवाल है कि इससे हमारा देश कैसे आगे बढ़ेगा। हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि हमारी मशीनें और विधियां हमारे देश को बढ़ावा देने में मदद करें।
 
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