हर दिन 7 लाख होगी सुनवाई, ECI ने पश्चिम बंगाल में 7 फरवरी तक SIR पूरा करने का रखा टारगेट

वसीमा सुनवाई: पश्चिम बंगाल में 7 फरवरी तक सिर पूरा, 7 लाख वोटरों के लिए हर दिन सुनवाई करने का टारगेट

पश्चिम बंगाल में वसीमा सुनवाई के दौरान, प्राधिकरण ने कहा है कि इस संदर्भ में 7 फरवरी तक सिर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका अर्थ है कि हर दिन 7 लाख वोटरों को सुनवाई करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

कमीशन ने यह भी घोषणा की है कि आयोग द्वारा बुलाए गए वोटरों को सहायक पहचान दस्तावेजों को दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन करना पड़ेगा। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) इस प्रक्रिया के पहले चरण को हस्तांतरित करेंगे, जबकि जिला मजिस्ट्रेट दूसरे चरण को संभालेंगे।

प्राधिकरण ने यह भी स्पष्टीकरण दिया है कि राज्य सरकार द्वारा जारी डोमिसाइल सर्टिफिकेट और वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन द्वारा आयोजित माध्यमिक परीक्षा के एडमिट कार्ड सहायक पहचान पत्र नहीं माने जाएंगे।
 
अरे, यह तो बहुत ही जरूरी है कि हमें अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने का समय सार्थक बनाएं। लेकिन, 7 लाख वोटरों को एक दिन में सुनवाई करने का यह लक्ष्य, तो थोड़ा चुनौतीपूर्ण लग रहा है। मुझे लगता है कि हमें सभी मतदाताओं की पहचान पत्रों को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि हमारी जानकारी सुरक्षित रहे।
 
वसीमा सुनवाई तो बहुत ही जटिल बात है 🤯, अगर 7 फरवरी तक सब पूरा हो जाए तो वोटरों को जल्द से जल्द पता चल जाएगा कि उनका मत गिनाया गया या नहीं... और सहायक पहचान दस्तावेजों को वेरिफिकेशन करना भी बहुत समय लेगा, तो देखें क्या सब ठीक होता है 😬
 
😊 भाई, यह वसीमा सुनवाई का विषय बिल्कुल हैंडल करने लायक है। मुझे लगता है कि 7 फरवरी तक हर दिन सिर पूरा करने का लक्ष्य बहुत बड़ा है, भाई। यह तो केवल 5 लाख वोटरों की जानकारी देने पर ध्यान देने का मौका नहीं है। मुझे लगता है कि राज्य सरकार ने अच्छी तरह से योजना बनाई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि वास्तविकता और योजना कैसे मिलती हैं। 🤔
 
अरे, ये वसीमा सुनवाई तो वास्तव में बहुत ही रोचक लग रही है 🤩। मुझे लगता है कि 7 फरवरी तक सिर पूरा करने का लक्ष्य कितना मुश्किल होगा, खासकर जब दिन-दिन 7 लाख वोटरों को सुनवाई करनी पड़ती है। इससे तो हमारे देश की डेमोक्रेसी की भावना और मजबूत होने का मौका मिलेगा।

पर, मुझे लगता है कि राज्य सरकार ने सही समय पर यह सुनवाई शुरू कर देनी चाहिए। इससे वोटरों को अपनी आवाज़ सुनने और उनकी समस्याओं को समझने का मौका मिलेगा।

अरे, एक सवाल है - क्या यह सब वसीमा की जांच में मदद करेगा या नहीं? मुझे लगता है कि हमें इससे सिर्फ वोटरों को सही जानकारी देनी चाहिए और उनकी आवाज़ सुननी चाहिए।
 
अरे, यह सुनवाई में वोटरों को बहुत कम समय देने की बात है तो चिंतित हूँ। 7 लाख वोटर को हर रोज़ सुनना थोड़ा असंभव है। क्या प्राधिकरण यह सोच रहा है कि सबको एक-एक करके सुनाना होगा, तो फिर में 15 दिनों में सभी वोटरों को सुनाया जा सकेगा।
 
शुभकामनाएं! 🙏 7 फरवरी तक सिर पूरा करने का लक्ष्य रखना एक अच्छा निर्णय है । इससे लोगों को अपने मतपत्र डालने में आसानी होगी। दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन करना भी एक अच्छा विचार है, इससे गलत मतदाताओं को रोका जा सकेगा। 🙌 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट्स को इस प्रक्रिया में सहायता करनी चाहिए। 7 लाख वोटरों के साथ उपस्थित रहना एक बड़ी परीक्षा है, मुझे उम्मीद है कि सबकुछ सफल होगा। 🤞 #वसीमासुनवाई #चुनाव_पर्यावरण #जीतेगदिल #सफलचुनाव
 
यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि 7 लाख वोटरों को सुनवाई करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ये वोटर तो बहुत बड़े शहरों में रहते हैं और उनकी आवाज़ सुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है 🤔। शायद हमें यह भी सोचते हुए इन सभी प्रक्रियाओं को लेकर यह तय करना चाहिए कि इनको कितनी जल्दी और कितनी सावधानीपूर्वक सुनवाई की जाए।
 
वसीमा सुनवाई को लेकर और भी ज्यादा दिनों तक सिर पूरा करने का लक्ष्य, 7 लाख वोटरों को हर दिन सुनने का नियम क्या है? यह तो बहुत ही जटिल प्रक्रिया होनी वाली है।
 
अरे भाई, यह वसीमा सुनवाई तो बिल्कुल हुआ, लेकिन सरकार ने सोचा था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सुनना आसान है? 7 लाख वोटर हर दिन सुनने का लक्ष्य तो बिल्कुल ही असंभव, यह तो एक बड़ा मनोरंजन था। और सहायक पहचान दस्तावेजों को दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन करना तो एक जादू है, ईआरओ और जिला मजिस्ट्रेट दोनों ही इस काम के लिए तैयार हैं। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार ने अपना समय बोहोत बर्बाद कर दिया, यह सुनवाई शायद 10 साल तक चल सकती है, और यह सवाल भी उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सुनने के लिए सरकार ने कितने पैसे खर्च किए?
 
मुझे लगता है कि यह वसीमा सुनवाई की प्रक्रिया बहुत ही आधुनिक और कुशल हो रही है। 7 लाख वोटरों को हर दिन सुनने पर ध्यान केंद्रित करना तो एक बड़ी चुनौती है, लेकिन मुझे लगता है कि ईआरओ और जिला मजिस्ट्रेट दोनों के पास इस काम को सुलझाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन होंगे। 🤖
 
सुनवाई की तैयारी करने का प्रयास अच्छा है, लेकिन सिर्फ राजनीति को बढ़ावा देने के लिए क्या 7 फरवरी तक सुनवाई कर रहे हैं? यह तो और भी बड़ी समस्या बन सकती है। वोटरों की पहचान सत्यापित करने में दो चरणों की प्रक्रिया समझ में नहीं आती है, लेकिन फिर भी ऐसा करने का निर्णय सही है। डोमिसाइल सर्टिफिकेट और एडमिट कार्ड के बारे में स्पष्टीकरण देने से यह तो कम समस्याएं आ सकती हैं।
 
इस वसीमा सुनवाई में मुझे लगता है कि बहुत से लोगों को उम्मीद थी कि यह प्रक्रिया तेजी से चलेगी और सभी वोटरों को समय पर सुनवाई मिल जाएगी। लेकिन अगर 7 फरवरी तक सिर पूरा करने का लक्ष्य रखना है, तो यह एक बड़ा चुनौती है। मुझे लगता है कि हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है और अधिक स्थानीय समाधानों पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
🙄 ये तो बहुत ही अच्छी बात है कि 7 लाख वोटरों को सुनवाई करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन यह सवाल उठता है कि उनकी आवाजें सुनने में इतनी आसान है? 🤔

मैंने देखा है कि पूर्वी बंगाल में चुनावों में बहुत ही ज्यादा सुर्खियां आ जाती हैं, लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारी राजनीति में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

अगर यह 7 लाख वोटरों को सुनवाई करने का लक्ष्य सचमुच पूरा हो जाए, तो इसका अर्थ है कि हमारे चुनाव प्रणाली में कुछ बदलाव जरूर होने चाहिए।
 
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