हरियाणा ग्रीवांस कमेटी का फीडबैक-अफसर लापरवाह: CM के गृह और विज के बिजली विभाग की ज्यादा शिकायतें; फाइल लटका रहे, काम में देरी - Haryana News

हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी को पेश किए गए फीडबैक में कई समस्याएं सामने आई हैं। इनमें से सबसे ज्यादा शिकायतें सीएम नायब सैनी के होम डिपार्टमेंट के अंतर्गत आने वाले पुलिस विभाग की आई है।

इस फीडबैक में बताया गया है कि इन विभागों के अफसर लोगों की समस्या की सुनवाई करते हैं या नहीं, या फिर उन्हें अपने काम के लिए कितना इंतजार करवा रहे हैं। यही नहीं, किसी अधिकारी या कर्मचारी की वजह से उनके कार्य में देरी हो रही है, या उनके कार्य को बेवजह लटकाया जा रहा है। इन सभी समस्याओं पर कमेटी मेंबर नजर रख रहे हैं।

पुलिस डिपार्टमेंट में 33 ऐसे अफसर हैं, जिनका नाम रिपोर्ट में दिया गया है। भाजपा सरकार के तीसरे टर्म में ये महकमा मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद देख रहे हैं, इससे पहले मनोहर लाल की सरकार में अनिल विज के पास ये विभाग था।

विपुल गोयल के रेवेन्यू डिपार्टमेंट में 32 अफसरों की लापरवाही सामने आई है। इसमें श्याम सिंह राणा के कृषि विभाग में 29, अनिल विज के ऊर्जा विभाग में 27 और आरती राव के स्वास्थ्य विभाग में 17 ऐसे अफसर-कर्मचारियों के नाम हैं, जो लोगों के काम करने में देरी कर रहे हैं और फाइलों को अटका रहे हैं।
 
अरे, यह तो सरकार से अच्छा नहीं लग रहा। पुलिस विभाग के अधिकारियों की लापरवाही देखकर मुझे थोड़ा परेशानी हुई। श्याम सिंह राणा कृषि विभाग में 29 अफसर-कर्मचारी ऐसा कर रहे हैं जैसे उनके काम में निश्चित समय नहीं लगता। पुलिस विभाग की ग्रीवांस कमेटी में भी इन अधिकारियों के बारे में लापरवाही दिखाई दे रही है।
 
मुझे लगा कि ये बहुत बड़ी समस्या है 🤔 इन विभागों के अफसर तो लोगों की समस्या सुनने में भी असमर्थ हैं और उनके काम में देरी कर रहे हैं। यह न सिर्फ मुश्किल बनाता है, बल्कि लोगों को परेशान करने वाला भी बन जाता है।

मुझे लगता है कि इन अफसरों को अपने काम में पूरी दिनता से निपटने का एक अच्छा उदाहरण ढूंढना चाहिए। उनको यह समझना चाहिए कि अगर वे लोगों की समस्याओं का ध्यान नहीं रखते हैं, तो जनता उनके खिलाफ खड़ी हो जाएगी।

इसके अलावा, यह जरूरी है कि ये अफसर अपने काम में सटीकता और समयबद्धता बनाए रखें। अगर वे लोगों के कार्य में देरी करते हैं, तो इससे न केवल उनके काम पर असर पड़ता है, बल्कि जनता को भी परेशानी होती है।
 
मैंने तो पढ़ा है कि यह ग्रीवांस कमेटी तो वास्तव में सरकार को ऐसी समस्याओं पर नजर रखने में मदद करेगी, लेकिन मुझे लगा है कि कुछ अफसर-कर्मचारी अपने-अपने कामों को ठीक से नहीं कर रहे हैं। पुलिस विभाग में 33 ऐसे अफसर, जो लोगों की समस्याओं पर ध्यान न देते हैं, या फिर उनके कार्य को बेवजह अटकाते हैं... मुझे लगता है कि यह कमेटी तो वास्तव में उन्हें जवाबदेह ठहराएगी, जिससे उनकी लापरवाही खत्म होगी।
 
मैंने ये पढ़ा कि हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी को सबकुछ बताया गया है लेकिन मुझे लगता है कि यह कमेटी सिर्फ सिर्फ पेश किए गए फीडबैक पर नजर रख रही है, वाकई तो इसे काम करना होगा।

मुझे लगा कि अगर ऐसे कई अफसरों को उनके काम में देरी करवाने का श्रेय दिया जा रहा है तो ये कमेटी में कुछ नहीं सुधार सकती। मैंने पुलिस विभाग में 33 ऐसे अफसरों का नाम पढ़ा है, लेकिन इन सबके बीच शायद कुछ भी अलग नहीं होगा।

विपुल गोयल के रेवेन्यू डिपार्टमेंट में भी लापरवाही सामने आई है और ये कमेटी मुझे लगता है कि इस पर ध्यान नहीं दे रही।

मैंने अनिल विज, श्याम सिंह राणा, आरती राव जैसे अफसरों का नाम पढ़ा है, लेकिन ये सबकुछ भी मुझे लगता है कि कमेटी पर ध्यान नहीं दिया गया।
 
मुझे लगता है कि हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी के इस फीडबैक में सामने आने वाली समस्याएं बहुत गंभीर हैं। यह समझना जरूरी है कि इन अफसरों और कर्मचारियों को कितना दिलचस्पी है, उनके पास स्पष्ट निर्देश नहीं हैं ताकि लोगों की समस्याओं को सुना जा सके।

किसी भी सामान्य नागरिक की तरह, मुझे लगता है कि यह फीडबैक हरियाणा सरकार के लिए एक बड़ा चेतावनी बेल है।
 
जैसे जैसे ये कहानी विकसित होती जा रही है तो लगता है कि हरियाणा सरकार में कुछ ऐसा चल रहा है जहां अफसरों की भूमिका स्पष्ट नहीं है।

पुलिस डिपार्टमेंट के इस तरह से देखे जाने पर बहुत चिंताजनक लगता है, खासकर जब यह लोग कैसे लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हैं या नहीं।

जिस प्रकार से अनिल विज और रेवेन्यू डिपार्टमेंट की लापरवाही दिखाई दे रही है, वह भी निराशाजनक है। यह जानने की जरूरत है कि कैसे इन अफसरों पर मॉनिटरिंग की जा रही है और उनके खिलाफ क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

दृश्य बदलने के लिए, पुलिस विभाग को न्यूनतम सुधार की जरूरत है। यहाँ तक कि शिकायतों का भी जवाब देने की प्रक्रिया तेज कर देनी चाहिए।
 
ये तो बहुत ही गंभीर समस्याएं है जो सरकारी स्तर पर है। अगर अफसर लोगों की समस्या सुनते हुए नहीं तो फिर किस तरह की मदद कर सकते हैं? और ऐसे अफसर भी कौन हैं जो लोगों के काम में देरी कर रहे हैं? यही नहीं, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी बेवजह फाइलों को अटका रहा है तो इससे हमारे समाज का हानि होती है।

मुझे लगता है कि ये समस्याएं हल करने के लिए सरकारें अपने विभागों में थोड़ी सी बदलाव कर सकती हैं। जैसे की इन अफसरों को उनके काम पर नज़र रखने के लिए दूसरा एक्जीक्यूटिव नियुक्त किया जा सकता है। इससे लोगों को अपनी समस्या बताने में मदद मिलेगी। और अगर ये अफसर लोगों की समस्या सुनते हुए नहीं तो फिर किस तरह की मदद कर सकते हैं? 🤔
 
बात करते है तो हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी की बात है। ये कमेटी तो लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए बनाई गई है, लेकिन यह सुनने के लिए नहीं देखने के लिए भी। पुलिस विभाग में 33 अफसरों की लापरवाही तो बिल्कुल चिंताजनक है। ये लोग जैसे ही फीडबैक पढ़ें, बस स्विच कर देते। कार्य में देरी कर रहे हैं, फाइलों को अटका रहे हैं... यह तो गंभीर समस्या है।

लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि कौन से लोग इन अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद देख रहे हैं तो शायद उनकी पार्टी को फायदा हो। अनिल विज, श्याम सिंह राणा, विपुल गोयल... ये लोग कैसे जिम्मेदार ठहराए गए हैं?
 
मुझे लगता है कि ये सभी समस्याएं बहुत ही सामान्य बातें हैं, जो हर सरकार में आ जाती हैं। पुलिस विभाग में भी ऐसा ही हुआ होगा, जब तक वहां कोई अच्छा नेतृत्व न हो।

मुझे लगता है कि ये सभी अफसर-कर्मचारी अच्छे से नहीं काम कर रहे थे, इसलिए कमेटी में उनकी रिपोर्ट करना जरूरी था। सरकार को भी अपने विभागों को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए। ये सभी समस्याएं फिर से होने न डालने के लिए, कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ना और ठीक करना जरूरी है।

नायब सैनी जी को भी माफ कर देना चाहिए। उन्हें अपने विभागों को ठीक करने का मौका देना चाहिए।
 
🤔 यह कमेटी बहुत थोड़ी ज्यादा तेज़ है! पहले से ही उनकी चर्चाएं पुलिस विभाग में अफसरों के बीच की खपट चालू हो गई है। कमेटी मेंबर्स देख रहे हैं कि क्या ये अफसर लोगों की समस्याओं को सुनते हैं या फिर नेतृत्व करने के लिए अपनी विशिष्ट इच्छा का पालन करते हैं।

पुलिस डिपार्टमेंट में 33 अफसर, जिन्हें उनके इस तरह से काम करने पर कमेटी देख रही है, और भाजपा सरकार के तीसरे टर्म में इन सभी विभागों को मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद देख रहे हैं। इससे पहले, अनिल विज के पास ये विभाग थे।

मुझे लगता है कि इस तरह से कमेटी काम नहीं कर रही है। उनको यह जरूरी होगा कि वह वास्तविक समस्याओं को देखें और उन्हें हल करने के लिए कुछ भी नहीं करेंगे। 🤷‍♂️
 
बिल्कुल सही कहा, पुलिस विभाग के अफसर लोगों की समस्या सुनने का मौका नहीं देते तो हमारा समाज जान-माल की सुरक्षा कैसे करेगा? यहां तक कि फीडबैक में भी उन्हें अपने काम पर ध्यान देने के लिए कहा गया है, तो फिर क्यों नहीं? 🤔

कमेटी मेंबर्स ने रिपोर्ट बनाकर इन अफसरों की लापरवाही सामने करने की बहुत अच्छी बात की है। अब तो कमेटी में 33 ऐसे अफसरों का नाम दिखाया गया है, जिन्हें अपने काम पर ध्यान देने की जरूरत है और लोगों की समस्याएं सुनने का मौका देना चाहिए। 🚨

कमेटी में इस तरह की रिपोर्ट्स बनाकर हम समाज को बेहतर बनाने का मौका देते हैं। यह कमेटी ने बहुत अच्छा काम किया है और हमारा समाज शायद अब सुधरने लगेगा। 👍
 
अरे, यह तो बहुत बुरा है! हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी ने भी ऐसी बातें सामने कर दीं हैं? पुलिस विभाग में 33 अफसर, रेवेन्यू डिपार्टमेंट में 32... ये तो लापरवाही का एक उदाहरण है! 🤯

कमेटी मेंबरों ने बात की जा रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इन अफसरों को अपने काम में दिलचस्पी नहीं है। वे लोग तो अपने पद पर बने रहते हैं और लोगों को निकाल देते हैं। यह तो एक बड़ा दोष है! 🚫

इस तरह की बातें हमेशा सामने आती रहती हैं, लेकिन कोई काम नहीं होता। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और इन अफसरों को जवाबदेह ठहराना चाहिए। 📝
 
मुझे तो ये बहुत ही दुखद बात सुनाई दे रही है कि हरियाणा सरकार की ग्रीवांस कमेटी में ऐसी कई समस्याएं सामने आई हैं । पुलिस विभाग और अन्य विभागों के अफसर लोगों की समस्याओं पर नजर नहीं रख रहे हैं , इसका मतलब यह है कि वे लोग उनकी जिंदगी में खुशी लाने में कुछ भी बाधा नहीं डाल रहे हैं।
 
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