1857 क्रांति के समय ब्रिटिश सरकार ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों को अजनाला में एक कुएं में जिंदा दफना दिया था।
अजनाला में एक गुरुद्वारा है, जिसके पास 'शहीदों का कुआं' या कलियांवाला खोह कहलाता है। यहीं एक लोहे का बक्सा है, जिसमें 282 सैनिकों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं।
इन सैनिकों को अंग्रेजों ने मारने के बाद उनकी पहचान नहीं हो सकी। लेकिन अब भारतीय इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने इन शहीदों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
पंजाब के अजनाला में एक कुआं है, जिसमें 282 सैनिकों के कंकाल निकले। ये कंकाल अब भी कुएं के पास एक लोहे के बक्से में बंद पड़े हैं। ये 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले शहीदों के हैं।
जांच से पता चला है कि इन सैनिकों को अंग्रेजों ने जिंदा दफनाया था। उनकी पहचान नहीं हुई थी, लेकिन अब भारतीय इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने उनकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में भारत सरकार, पंजाब सरकार और अन्य संगठन सहयोग कर रहे हैं। 282 शहीदों की पहचान किए जाने पर उनके परिवारों को सम्मान दिया जाएगा।
इन शहीदों के परिवार में से कोई भी नहीं था, लेकिन अब कई लोग इस मामले में रुचि रखते हैं।
अजनाला में एक गुरुद्वारा है, जिसके पास 'शहीदों का कुआं' या कलियांवाला खोह कहलाता है। यहीं एक लोहे का बक्सा है, जिसमें 282 सैनिकों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं।
इन सैनिकों को अंग्रेजों ने मारने के बाद उनकी पहचान नहीं हो सकी। लेकिन अब भारतीय इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने इन शहीदों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
पंजाब के अजनाला में एक कुआं है, जिसमें 282 सैनिकों के कंकाल निकले। ये कंकाल अब भी कुएं के पास एक लोहे के बक्से में बंद पड़े हैं। ये 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले शहीदों के हैं।
जांच से पता चला है कि इन सैनिकों को अंग्रेजों ने जिंदा दफनाया था। उनकी पहचान नहीं हुई थी, लेकिन अब भारतीय इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने उनकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में भारत सरकार, पंजाब सरकार और अन्य संगठन सहयोग कर रहे हैं। 282 शहीदों की पहचान किए जाने पर उनके परिवारों को सम्मान दिया जाएगा।
इन शहीदों के परिवार में से कोई भी नहीं था, लेकिन अब कई लोग इस मामले में रुचि रखते हैं।