यूपी में कोहरे में 40 गाड़ियां टकराईं, 7 की मौत: श्रीनगर में पारा -4°C पहुंचा; हिमाचल में 25 टूरिस्ट बर्फबारी में फंसे, रेस्क्यू

उत्तर प्रदेश में शनिवार को सर्दी के इस सीजन का सबसे घना कोहरा छाया, जिसमें 40 से अधिक वाहन टकराईं। इस हादसे में डेढ़ साल की बच्ची समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए। राज्य में 100 से अधिक ट्रेन देरी से चल रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में कंपकंपाने वाली सर्दी का 40 दिन का चिल्लई कलां जारी है, जिसमें श्रीनगर में पारा -4.0°C पहुंचा, जबकि पहलगाम में तापमान -2.6°C दर्ज किया गया। इसके अलावा, गुलमर्ग और सोनमर्ग में भी तापमान कम हो गया।

हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी हुई, जहां शिंकुला दर्रा में 25 टूरिस्ट व्हीकल बर्फबारी में फंस गए। रेस्क्यू किए जाने पर इन टूरिस्टों को सुरक्षित पाए गए।

पंजाब और हरियाणा में तापमान में काफी बदलाव आया, जहां नवांशहर में न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, राजस्थान में हल्की बारिश के आसार हैं।
 
कल तो इस देश में ना कभी ट्रेनें प punctually चलती, ना कभी सड़कों पर खून बहता। आज कोहरे के बाद भी सब ठीक था, लेकिन फिर क्या करना। सरकारें एक दूसरे को देखने लगती हैं ताकि कोई बड़ा चोट लगे। पुलिस को बस वाहनों में घुसने के लिए बाध्य होना जैसा है, यह तो समझ नहीं आ रहा।
 
सर्दी का यह मौसम तो हमें ठंडा ही रहता है … लेकिन 40 से अधिक वाहन टकराने? और इतने लोगों की मौत? यह तो सचमुच चिंताजनक है। मुझे लगता है कि जेलम-लद्दाख रोड पर क्या सुधार किया गया है? यहाँ के मौसम की जानकारी तो हमेशा समय पर नहीं आती। और राजस्थान में हल्की बारिश? शायद पहले से ही बर्फबारी हुई होगी, लेकिन वाह! नवांशहर में 0.9 डिग्री सेल्सियस का तापमान? यह तो पूरी तरह से अनोखा है।
 
कला तो यह ठंड पूरा भारत कर रही है! पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में तापमान में इतना बदलाव आया है कि साल 2023 की तरह लगता है। कश्मीर का चिल्लई कलां तो खेल ले रहा है, जम्मू-कश्मीर के सबके जैसा। पर राजस्थान में हल्की बारिश, यह अच्छी खबर है! पंजाब और हरियाणा में नवांशहर में न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, यह तो ठंड-गर्मी के चक्कर में पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में सर्दी का सबसे घना कोहरा छाया, जिसमें 40 से अधिक वाहन टकराईं, यह सचमुच बड़ा दुर्भाग्य है 🤕
 
यह तो भारतीय जलवायु परिवर्तन की ज्यादा चपेट आ गई... ❄️ पिछले दिनों से ही यह ठंड बढ़ रही है, और अब ऐसा हुआ है कि वाहन टकराने लगे हैं! ये तो सरकार को लगता होगा कि हमें जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। लेकिन मुझे लगता है कि सरकार को अपने नीतियों में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि हमें ऐसी स्थितियों से बचने की संभावना हो।
 
बस, ये तो सर्दी की दुनिया में हमेशा ऐसा ही होता है 🌨️। ज्यादा ही कोहरा आ गया है, जैसे से लोग अपने घरों पर फंस गए हैं। 40 से अधिक वाहन टकराने की बात तो याद में आ रही है। डेढ़ साल की बच्ची की मौत की बात ज्यादा दर्दनाक नहीं लग रही। लेकिन 100 से अधिक ट्रेन देरी से चलने की बात तो यार, राज्य सरकार को जरूरत है कि वो इस पर ध्यान दे।
 
यह तो बहुत बड़ा हादसा हुआ, इतने वाहन टकराकर 7 लोगों की जान गई। और अब राज्य में ट्रेन देरी से चल रही है, यह तो बहुत परेशान कर रहा है। मुझे लगता है कि इनमें बारिश, बर्फबारी, या किसी न किसी तरह की मौसमी समस्याओं की वजह से यह हुआ। लेकिन तापमान में इतना बदलाव? यह तो जरूर कुछ गंभीर चीज़ है।
 
कोहरा इतना घना था कि कैसे कोई भी वाहन चला सका? यह तो तेज़ गति से घूम रही पुलिस और फायर ट्रिगर्स की बात नहीं है, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं... तो क्या हमें अपने वाहनों की जांच करने की जरूरत है? और राज्य में 100 से अधिक ट्रेन देरी से चल रही हैं, यह तो बेहद परेशान करने वाला है... क्या किसी चीज़ को बदलने की जरूरत नहीं? 🚨
 
कोहरे की वजह से उत्तर प्रदेश में बहुत घंटे लग रहे हैं 🚗😤। लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि ट्रेनें तो एक दिन ठीक हो जाती हैं, फिर कुछ दिनों बाद फिर से देरी शुरू कर देती हैं। यह कैसे संभव है? 🤔 मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या वे ट्रेनों को अच्छी तरह से चलाने के लिए पैसे निकालने में असमर्थ हैं या फिर बस इतना सारा पैसा खर्च करना चाहते हैं जिससे वे अपने कर्मचारियों को अच्छी राशि नहीं दे पाएं। 🤑

मुझे लगता है कि हमें ऐसे सवाल उठाने चाहिए कि क्या हमें ट्रेनें चलाने वाले लोगों से पहले अपने खुद के गंतव्य तक पहुंचने में असमर्थता की समस्या हो गई है। यह सवाल मुझे लगता है कि हर किसी के मन में आया होगा।
 
कोहरा लगने पर भी दिल्ली के लोगों ने खुद अपनी जिम्मेदारी से नहीं जुड़ी... 🤔 क्या 40 वाहन टकराने में कोई फंस गया था? या यह तो बस नशीली दवाओं की वजह से हुआ है? और कौन होगा जिम्मेदार? किसी को भी नहीं माने जाएंगे।
 
यह तो बहुत दुखद जानकारी है 🤕, शनिवार को इतना घना कोहरा उत्तर प्रदेश में आ गया और इतने वाहन टकराए। यह बात याद है, जब हम बच्चे थे, तब ऐसी जगहें नहीं थीं, जहां इतनी देर तक ट्रेनें चलती रहती हैं। आजकल जैसे डिजिटल होना, फिर भी ऐसा ही हो रहा है। क्यों ना लोग बिना वाहन चलने का तरीका सीख लें, और सरकार मिलकर ट्रेनें और बसें तेजी से चलाने का प्रयास करे, इससे कोई भी ऐसी दुर्घटना नहीं होती।
 
ਇਸ ਗंभीर ਹादसੇ ਨੂੰ ਜ਼िक्र ਕਰਦਿਆਂ, ਅਚਾਨਕ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਈ ਜਗਾ ਦੇ. 40 ਘਣੇ ਵਾਹਨ ਟਕਰਾਉਣ ਲਈ ਮਾੜੀ ਸਥਿਤੀ, ਅਚਾਨਕ ਖ਼ਾਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਵਾਹਨਾਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਮੁਸ਼ਕਲ. ਅਜਿਹੀ ਹਾਲਤ, ਉੱਥੋਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਜ਼ਰੂਰ ਖ਼ਤਰਨਾਕ.
 
ये तो बहुत दुःखद है जो हुआ! 40 से अधिक वाहन टकराईं, डेढ़ साल की बच्ची समेत इतने लोगों की मौत... यह तो पूरा उत्तर प्रदेश बेझिझक ग्रस्त हो गया है! और 100 से अधिक ट्रेन देरी से चल रही हैं... यह तो कैसे भलाई? 🚨😔

मुझे लगता है कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। यातायात नियंत्रण बढ़ाना चाहिए, लोगों को सावधानी से चलने के लिए कहना चाहिए... और फिर यह तो एक अच्छा समय है कि हम सब मिलकर खाद्य-पेय पदार्थ वितरित करें जिससे लोगों को गर्मी महसूस न हो। ठंड तो हो गई, पर बुखार नहीं! 🍽️❤️
 
अरे दोस्तों ... ये तो कितना खतरनाक है! उत्तर प्रदेश में कोहरा इतना घना था कि वाहन टकराईं। बच्ची की भी जान गई, यह बहुत दुखद है। और जम्मू-कश्मीर में तापमान इतना कम गया कि श्रीनगर में पारा -4.0°C पहुंच गया। यह तो बहुत ठंडा है... हमेशा से ठंडी सर्दियों की बात करते थे लेकिन ऐसी ठंड नहीं आती।
 
बड़ा भयानक हादसा उत्तर प्रदेश में हुआ, तो फिर यह ठंड का सही समय सुने दिया। 40 वाहन टकराईं, 7 लोग मर गए और 50 से अधिक घायल हुए। तो अब ये कहानी क्या है? हमारे देश में सर्दी की तो कभी न कोई देरी। बस हमें इसे अच्छी तरह से तैयार करना होता है। शायद अगर वाहन चलाते समय कुछ ऐसा ही ध्यान दिया जाए तो बहुत सारे लोग मरने की बात न होती।
 
यह तो बहुत बड़ा आंसू में बैठने वाला दिन था, उत्तर प्रदेश में इतनी सर्दी और भीषण कोहरा आ गया है . 40 से अधिक वाहन टकराने का नाम लेना चाहिए , यह तो एक बड़ा जोखिम था , फिर भी हमारे देश में इतने बिना सोच-विचार के चलने वाले लोग होते हैं , इनकी तादाद बढ़ रही है . आमतौर पर सर्दी के इस समय जान जोखिम में आता है , और आज की घटना भी इसे प्रमाणित कर रही है

तापमान कम होने से पहलगाम तक पहुंच गया , श्रीनगर में तो पारा -4.0°C आ गया , यह तो बहुत ठंडा है क्या ? गुलमर्ग और सोनमर्ग में भी ऐसा ही हुआ . जम्मू-कश्मीर में इतनी सर्दी का लोगों के मन में चिल्लई लगने वाली स्थिति हो गई , तो फिर इन परिस्थितियों में भी लोग बाहर जाने का फैसला करते हैं

हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी हुई और शिंकुला दर्रा में 25 टूरिस्ट व्हीकल बर्फबारी में फंस गए , लेकिन रेस्क्यू किए जाने पर सुरक्षित कर दिये गये . यह तो एक बेहतरीन सेवा है

पंजाब और हरियाणा में तापमान में बहुत बदलाव आया , नवांशहर में न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया , राजस्थान में हल्की बारिश के आसार हैं , यह तो हमें याद दिलाता है कि हर महीने कुछ भी बदलाव आ सकता है

कुल 7 लोगों की मौत , 50 से अधिक घायल , 100 से अधिक ट्रेन देरी से चल रही , यह तो एक बड़ा जोखिम था ।
 
कोहरा और बर्फबारी ने दिल्ली और शनिवार की जिंदगी को कैसे बदला? 40 साल का बच्चा मर गया, 50 से अधिक घायल। आज रात में ट्रेनें भी धीमी चल रही हैं।

क्या हमें शनिवार को खेलना चाहिए या जीवन को समझना? पंजाब और हरियाणा में तापमान बदल गया, लेकिन राजस्थान में हल्की बारिश के आसार हैं। क्या यह हमारे लिए एक संदेश है?

कश्मीर में सर्दी बढ़ गई, 40 दिन तक जारी। श्रीनगर और पहलगाम में तापमान इतना कम गया। परन्तु हमें लगता है कि यह शनिवार के लिए एक सही मौसम नहीं था, न कि सीजन के लिए।
 
यह दुनिया तो खैर मुश्किल है, हर जगह बर्फबारी फंसते हैं या कोहरा छाया, तो और तूफान, जैसे में नजदीक से शनिवार को उत्तर प्रदेश का घना कोहरा पड़ गया, जिसमें बच्ची समेत कई लोग मर गए। यह तो बहुत बड़ा हादसा है, ट्रेनें देरी से चल रही हैं और वाहन टकराईं, ऐसे में दिल में दर्द होता है।

पंजाब और हरियाणा में तापमान में बदलाव आया, न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तो ठंड लग रही है, ऐसे में गर्म कपड़े पहनना चाहिए। राजस्थान में हल्की बारिश के आसार, जैसे प्यास लगने पर पानी पीना चाहिए।

किसी भी मौसम में हमें सावधान रहना होता है, तो दूसरों की मदद करनी होती है। यह दुनिया बहुत जटिल है और हर जगह खासियतें हैं, इसीलिए हमें खुले मन से अपने आसपास की दुनिया को समझना होता है।
 
क्या ये दुनिया तो और भी नाजुक होती जाती है 🤦‍♂️... 40 से अधिक वाहन टकराईं, इतने लोगों की मौत हुई, 50 से अधिक घायल... और फिर 100 से अधिक ट्रेन देरी से चल रही हैं... यह तो और भी ज्यादा खतरनाक होता जाना। ये हमारी सरकार कैसे बनती है? पहल गाड़ी में बैठने वाले लोगों की जान बचाई जाती है, लेकिन दूसरी गाड़ी में तो इतनी सारी लोगों की जान खत्म हो गई... और फिर भी हम तो सोशल मीडिया पर खुशी-खुशी लिखने लगते हैं... 🙄
 
यह दुःखद यादें हमारे पास हैं... शनिवार को ट्रैफिक एक्सीडेंट में जिंदा जलने वालों की संख्या भारी थी, और 50 से अधिक लोग घायल हुए, यह तो हुआ ही सकता था, लेकिन बच्ची की जान जानी इसके बाद और भी गहरा दर्द हो गया।

हमें यह सवाल उठना चाहिए कि हमारे रास्तों पर इतनी सारी वाहन चल रहे थे, इस तरह से ट्रैफिक एक्सीडेंट कैसे हो सकता था? और पुलिस ने इतनी जल्दी नहीं प्रतिक्रिया देनी, यह तो हमारे लिए सवाल है।

लेकिन सबसे ज्यादा, यह बच्ची की मौत, उसकी मां को जान losing करनी पड़ी थी। और उसे अपनी बेटी की जिंदगी निकलनी पड़ी।

हमें ये सोचना चाहिए कि हमारे आसपास क्या है, हमारे रास्तों पर कितने लोग घूम रहे हैं।
 
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