भारत के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में 4 कैदियों की उम्रकैद की सजा को रद्द करने का बड़ा फैसला किया है। यह फैसला तब लगाया गया जब अदालत ने पाया कि विशेषज्ञता से जुटाई गई सरकारी सबूतों में गहरी कमियां दिखीं।
अदालत ने यह भी पाया कि कई महत्वपूर्ण गवाह, जिन्हें अभियोजन का समर्थन करने वाले थे, अब दुश्मन हो गए। इसके अलावा, 'लास्ट सीन थ्योरी' (अंतिम दृश्य सिद्धांत) भी पूरी तरह साबित नहीं हुई। एकमात्र ठोस सबूत घटना की तारीख से लगभग 20 बकरियों की बरामदगी करने वाले आरोपी के घर से था, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना।
अदालत ने कहा, "चोरी की बकरियों को महीनों तक रखना अविश्वसनीय है, क्योंकि चोर उन्हें जल्दी बेच देते।" यह बात अदालत के लिए स्पष्ट थी कि ऐसी गवाहदारी और सबूतों को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
इस फैसले ने कई सवाल उठाए हैं और यह प्रश्न भी ताज़ा किया है कि उम्रकैद की सजा कैसे रद्द की जाती है? अदालतों को इस तरह के मामलों में सख्त नियमों का पालन करना होगा, ताकि न्याय की दिशा में बाधाएं नहीं उत्पन्न हों।
अदालत ने यह भी पाया कि कई महत्वपूर्ण गवाह, जिन्हें अभियोजन का समर्थन करने वाले थे, अब दुश्मन हो गए। इसके अलावा, 'लास्ट सीन थ्योरी' (अंतिम दृश्य सिद्धांत) भी पूरी तरह साबित नहीं हुई। एकमात्र ठोस सबूत घटना की तारीख से लगभग 20 बकरियों की बरामदगी करने वाले आरोपी के घर से था, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना।
अदालत ने कहा, "चोरी की बकरियों को महीनों तक रखना अविश्वसनीय है, क्योंकि चोर उन्हें जल्दी बेच देते।" यह बात अदालत के लिए स्पष्ट थी कि ऐसी गवाहदारी और सबूतों को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
इस फैसले ने कई सवाल उठाए हैं और यह प्रश्न भी ताज़ा किया है कि उम्रकैद की सजा कैसे रद्द की जाती है? अदालतों को इस तरह के मामलों में सख्त नियमों का पालन करना होगा, ताकि न्याय की दिशा में बाधाएं नहीं उत्पन्न हों।