168 साल से सड़ रहे 282 शहीदों के कंकाल: अंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क

नमुना: यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है जिस पर अंजाम हुआ। अंग्रेजों ने हमारे वीर सैनिकों की इस तरह से गोली मारकर क्यों किया? यह सवाल हमें अभी भी नहीं बताया गया है।

कुछ लोग कह रहे हैं कि यह घटना इतिहास की एक ऐसी पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई है जब अंग्रेजों ने हमारे देश पर अपना कब्जा कर लिया था। तो हमें उन्हीं दिनों की याद में यह घटना नहीं चुनौती देनी चाहिए, बल्कि हमें इसके बाद क्या हुआ और आज तक हमारे सैनिकों को ऐसी अनुचित मौत मिल रही है इस पर जोर देना चाहिए।

मैं तो सोचता हूँ कि अगर हमारे सैनिकों के अवशेष आज भी खुदाई किए गए कुएं के पास बंद हैं, तो यह एक बहुत बड़ा सवाल है। क्या हमें ऐसे मामले की जांच नहीं करनी चाहिए?
 
अगर याद करोगे तो 1815 में अंग्रेजों और नेपाली सेना के बीच का युद्ध था, जिसने भारतीय इतिहास में एक दुखद अध्याय छोड़ा। इस युद्ध में पूरे शिवालिक परिसर में कई शहरों और गांवों को नष्ट कर दिया गया था।

उस समय सेना की संख्या बहुत ज्यादा थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ बहुत ही बलिदानी लड़ाई लड़ी थी। आज भी उनकी याद में बुलंदशहर और दिल्ली जैसे शहरों में कई स्मारक हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि अंग्रेजों ने अपना यह काम भारतीय सैनिकों को गोली मारने से नहीं लिया, बल्कि पूरे परिसर को बर्बाद करने का एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया था।
 
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