मुझे ये ख़बर बहुत प्रेरणादायक लगती है कि मुखर्जी जी ने सौरभ को दिव्य गोत्वा कराया था। अब भी जब तक हमारी आँखें चल रही हैं, तब तक हमें प्रकाश और उपचार की आवश्यकता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा अपने साथ एक प्रकाश को रखना चाहिए, ताकि हम अंधकार को हरा सकें।