18 हजार रु से ज्यादा किराया नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस: 500 किमी तक का किराया ₹7,500; इंडिगो संकट के बीच केंद्र ने किराए तए किए

भारतीय विमानन नियमों में एक बड़ा बदलाव हो गया है, जिसमें सरकार ने एयरलाइन्स को किराए पर उड़ान भरने की सीमा बढ़ा दी है। अब 500 किमी तक की दूरी पर 7500 रुपये से अधिक किराया नहीं लिया जा सकता, जबकि 1000-1500 किमी तक की दूरी पर 12 हजार रुपये से अधिक किराए में उड़ान भरना बंद हो गया है। इसी तरह, अधिकतम किराया 18 हजार रुपये तय किया गया है, लेकिन यह व्यवस्था बिजनेस क्लास के लिए नहीं लागू होगी।

इस बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य एयरफेयर में अनियमितता रोकना, बाजार में प्राइसिंग डिसिप्लिन बनाए रखना और संकट में फंसे यात्रियों का शोषण रोकना है। सरकार ने कहा कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते।

इंडिगो की एयरलाइन्स की बड़ी अस्थिरता के बाद सरकार ने इस बदलाव का announcements किया है। इंडिगो के पास सबसे ज्यादा 434 विमान हैं, और एक दिन में 2300 से ज्यादा उड़ानें हैं। देश की 60% से अधिक घरेलू उड़ानें भी इस एयरलाइन के पास हैं।

इस बदलाव से यात्रियों को फायदा होगा, लेकिन एयरलाइन्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने कहा है कि अगर कोई एयरलाइन इस नियमों को नहीं मानती, तो वह तुरंत एक्शन लिया जाएगा।
 
बिल्कुल बिल्कुल, यह बहुत अच्छी खबर है 🙌। अब यात्री अपने पैसे का सही मूल्य पर उड़ान भर सकेंगे, ना कि एयरलाइन्स द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए छूट भी देना। और अगर कोई एयरलाइन इस बदलाव को नहीं मानती, तो सरकार तुरंत एक्शन लेगी तो अच्छा है 🙏
 
नए नियम से यात्रा करने वाले लोगों को शाद मिलेगी। अब उड़ान भरते समय किराया इतना कम नहीं होगा, इसलिए यात्री पैसे बचाएंगे। पर एयरलाइन्स के दफ्तर से पास आते ही तो समझ में नहीं आ रहा है कि वे इससे कैसे लाभान्वित होंगे। देखिए, अगर आप एक दिन में 2000 उड़ानें भरते हैं और हर उड़ान पर 7500 रुपये से अधिक किराया लगाते हैं तो आपकी आमदनी बिल्कुल नहीं रहेगी।
 
मेरी पत्नी ने कल अपने परिवार से मिलने की योजना बनाई है, और उसने मुझे बताया है कि उसका भाई 500 किमी तक की दूरी पर 6000 रुपये से अधिक किराए में उड़ान भरता है। मैंने उसे बताया कि अब यह बिल्कुल नहीं चलेगा, और वह अपने काम से जुड़े लोगों को साथ लेकर उड़ने की तैयारी कर रहा था। इसके अलावा, मेरा दोस्त ने अपने भाई को अपने विमान किराए पर देने के बारे में बताया, और अब वह नहीं कर सकते। यह बदलाव एयरलाइन्स के लिए एक बड़ा नुकसान होगा, लेकिन यात्रियों के लिए यह एक अच्छी बात होगी। मैं अपने परिवार से मिलने जा रहा हूं, और मुझे उम्मीद है कि मेरी पत्नी का भाई इसके पीछे कुछ समझ नहीं कर सकता।
 
आज से बात करते हैं एयरलाइन्स की किराए पर उड़ान भरने की। सरकार ने यह बदलाव क्यों किया? नहीं पता, लगातार बढ़ते विमान किराये को देखते हुए उन्हें संतुलन बनाना पड़ा। अब 500 किमी तक में उड़ान भरने के लिए 7500 रुपये से अधिक नहीं लिया जा सकता, यह अच्छा विचार है। लेकिन एयरलाइन्स को बेहद परेशानी, उनकी आय को धीमा कर दिया गया।
 
मुझे लगता है कि ये बदलाव सच्मुच हमें फायदा होगा, लेकिन क्या सरकार के पास एयरलाइन्स की दूरी और किराये को नियंत्रित करने के लिए इतनी जिम्मेदारी है? मुझे लगता है कि हमें पहले तय करना चाहिए कि यह बदलाव कहाँ तक लागू होगा, फिर आपसी समझौते पर पहुँच जाएंगे। मैंने हाल ही में, मेरे दोस्त ने मुंबई से पुणे जाने के लिए किराए पर उड़ान भरी, और वह बहुत भाग्यशाली था।
 
तो एयरलाइन्स को अब अपने दरों पर अधिक काबू करनी पड़ेगी, लेकिन यात्रियों को न केवल कम महंगी उड़ानें मिलेंगी, बल्कि उन्हें सुरक्षित और आरामदायक वायफलाइट्स भी मिलेंगी। तो अब इंडिगो के बाद दूसरी एयरलाइन्स का टाइम आ गया, लेकिन सरकार ने जोर दिया है कि अगर कोई विमान उड़ान भरता है, तो उसे पहले अपना सर्टिफिकेट चुकाना पड़ेगा। 🤔
 
क्या ऐसा सोच रहे थे! अब यात्रियों की कुलम्बन कर दी जाएगी 🙄 500 किमी तक की दूरी पर भी इतना पैसा नहीं मिलेगा, तो कहां फंसेंगे वे लोग? और यह तय क्यों हुआ कि बिजनेस क्लास से इस बदलाव का छुटकारा नहीं मिलेगा?
 
मुझे लगता है कि यह बदलाव बड़ी बुराई नहीं होगा, खासकर जब हमारे देश की अर्थव्यवस्था इतनी ज्यादा पर निर्भर करती है। सरकार ने एयरलाइन्स को सीमित करने का इस्तेमाल जरूरी नियमों को लागू करने के लिए कर रही है, ताकि व्यवसायिक और अनियमितताओं को रोका जा सके। भारत में हमेशा से यात्रियों के लिए सुरक्षा और आराम की चिंता रहती है, इसीलिए सरकार ने ऐसी सीमाएँ तय की हैं जिससे वास्तविक बाजार की कीमतें सामने आ सकें।
 
मुझे लगता है कि यह बदलाव बहुत ही अच्छा है, क्योंकि अब यात्री किराए पर उड़ान भरने की सीमा में सुरक्षित महसूस कर पाएंगे। पिछले दिनों इंडिगो जैसी एयरलाइन्स ने बहुत बड़ी अस्थिरता दिखाई थी, और अब सरकार ने इस तरह की समस्याओं को रोकने के लिए यह बदलाव किया है। 🚫✈️

अब यात्री किसी भी उड़ान भरने से पहले एयरलाइन्स को अपनी किराए पर उड़ान की सीमा जानने में सक्षम होंगे, और यह बदलाव न केवल यात्रियों की रक्षा करेगा, बल्कि एयरलाइन्स के लिए भी यह एक अच्छा तरीका होगा। सरकार ने सही निर्णय लिया है, और मुझे लगता है कि इससे देश की हवाई यातायात सेवाओं में सुधार आएगा। 👍
 
यह बदलाव बहुत ही अच्छी बात है, परन्तु मुझे लगता है कि यह भी थोड़ी बहुत अधिक नियमितता का साबित हो सकता है। प्राइवेट एयरलाइन्स जैसे इंडिगो की बड़ी अस्थिरता के बाद इसे लागू करने में तो सरकार की जिद भी तेज़ थी, लेकिन अब एक समय पर 200 उड़ानें भरने और साथ ही 1000-1500 किमी तक की दूरी पर 12 हजार रुपये से अधिक किराए में उड़ान भरना बंद होना भी बहुत ही शर्मिंदगी लग रही है। और फिर भी यह बदलाव एक्सेसिबल टिकट के लिए 18,000 रुपये तक किराया नहीं देने से यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेगा, लेकिन एयरलाइन्स को इससे बहुत बड़ा नुकसान होगा।
 
मैंने देखा है कि इंडिगो की उड़ानें बढ़ रही हैं, लेकिन इनका देयता भी बढ़ गई है। 500 किमी तक की दूरी पर किराया बढ़ाकर 7500 रुपये से अधिक न होना एक अच्छा फैसला हो सकता है, लेकिन 1000-1500 किमी तक की दूरी पर किराए में 12 हजार रुपये से अधिक उड़ान भरना बंद करना भी एक अच्छी बात है।

मैंने देखा है कि 2022 के अंत में, एयरलाइन्स ने औसत ग्रोथ रेट 10.5% से कम कर लिया था, और इस समय भी ऐसा ही हो सकता है। तो सरकार के फैसले से पहले ही यात्रियों को फायदा होना शुरू हो गया है।

मैंने देखा है कि एयरलाइन्स की राजस्व वृद्धि 2025 तक कम कर लेने पर सरकार ने अपना फैसला किया है। तो इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी।

मैंने देखा है कि यात्रियों को उड़ान भरने में अधिक समय लगने वाली उड़ानों की संख्या कम करने से फायदा होने की उम्मीद है। लेकिन यह बात देखना होगा कि कितनी जल्दी यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा।

मैंने देखा है कि एयरलाइन्स ने 2022-23 में औसत यात्रियों की संख्या बढ़ाई थी, और इस समय भी ऐसा ही हो सकता है। तो सरकार के फैसले से पहले ही यात्रियों को फायदा होना शुरू हो गया है।
 
मुझे लगता है कि यह बदलाव देश भर में उड़ानों की कीमतों पर प्रभाव डालेगा, खासकर छोटे शहरों में। अब अधिकांश एयरलाइन्स 500 किमी तक की दूरी पर भी आर्थिक रूप से चुनिंदा हो जाएंगी। लेकिन यात्रियों के लिए यह अच्छा रहेगा, क्योंकि अब वे अपने पैसे में सुरक्षित उड़ानें ले सकेंगे। इंडिगो की अस्थिरता ने शायद इस बदलाव की जरूरत को स्पष्ट कर दिया है। लेकिन एयरलाइन्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती रहेगी, क्योंकि अब उन्हें अपने व्यवसाय को फिर से संरचित करना होगा। 📈
 
कुछ दिनों की बाद की चीज़ से कोई नहीं थकता, सरकार की नई योजना से प्रत्येक व्यक्ति को नफ़ा होगा। 😊

जिस तरह की राजनीति के माध्यम से लोगों को फ़ायदा होता है, वही देश की अर्थव्यवस्था में भी शामिल है।
 
तो यह बदलाव सोच-विचार करेंगे, अब यात्रियों पर अधिक दबाव होगा, लेकिन फिर भी एयरलाइन्स के पास बहुत सारे विकल्प रहेंगे। मुझे लगता है कि सरकार ने सही कदम उठाए हैं, ताकि अनियमितताओं को रोका जा सके और यात्रियों को अच्छा मौखिक मिले। लेकिन अब एयरलाइन्स को अपने बिस्तर को फिर से आरामदायक बनाना होगा।
 
क्या तय किया गया है, 500 किमी से 7500 रुपये, 1000-1500 किमी से 12000, और 2000 किमी से 18000! ये नियम्स बहुत भारी होंगे। लेकिन फिर भी, एयरलाइन्स को 18 हजार तक का नुकसान नहीं होगा। जैसे तय किया गया है कि बिजनेस क्लास में ये नियम्स न लागू हों। यह तो एक अच्छा निर्णय है, पर एयरलाइन्स से उम्मीदें क्यों नहीं?
 
सब से पहले यह पढ़ने के बाद मुझे एहसास हुआ कि भारतीय विमानन नियमों में बड़ा बदलाव आ गया है और इससे यात्रियों को बहुत फायदा होगा। लेकिन दूसरी तरफ, यह बदलाव एयरलाइन्स के लिए एक बड़ी चुनौती है। मुझे लगता है कि सरकार ने सही कदम उठाए हैं क्योंकि इस बदलाव से अनियमितता और मालिसियाँ रोकी जाएगी। यह बदलाव बाजार में प्राइसिंग डिसिप्लिन बनाए रखने में मदद करेगा।

मुझे लगता है कि एयरलाइन्स को अपने फares को थोड़ा कम करना चाहिए और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने सेवाओं को बेहतर बनाना चाहिए। इससे सरकार की नीति को सफल बनाया जा सकता है और यात्रियों को अच्छा अनुभव मिलेगा।
 
मुझे लगता है कि यह बदलाव अच्छा थोड़ा होगा, लेकिन कुछ बातें भी उनके पीछे बैठी होंगी। पहले, यह सीमा 500 किमी तक कितनी उचित है? मुझे लगता है कि यह एक निश्चित दूरी के आधार पर किराए को लागू करने से उड़ान भरने वाली कम्पनियों को अच्छे फायदे होंगे।

लेकिन, यह तय नहीं है कि 7500 रुपये से अधिक कितना उचित है। कुछ एयरलाइन्स में टिकट की दरें बहुत भी कम होती हैं और यात्रियों को अच्छा मिलेगा। इसके अलावा, 1000-1500 किमी तक की दूरी पर 12 हजार रुपये से अधिक किराए में उड़ान भरना बंद करने से कुछ ऐसी यात्राएं पर भी असर पड़ेगी जो अब आसान होंगी।
 
ये बदलाव तो अच्छा है, लेकिन क्या यात्रियों की आर्थिक स्थिति इस पर ध्यान दी गई? 500 किमी तक की दूरी पर किराए में उड़ान भरना इतना महंगा हो गया है कि आम आदमी कैसे करेगा? और 1000-1500 किमी तक की दूरी पर लोगों को ऐसे खर्च से निकलना ही मुश्किल है।
 
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