सेना के रणनीतिक योजनाओं में बदलाव करना एक बड़ा कदम है... लेकिन क्या यह हमारे देश की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित करता है? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सेना की ताकत न केवल उसके हथियारों और उपकरणों में निहित है, बल्कि उसकी जवानों की शौर्य और बलिदान क्षमता में भी।
क्या 200 से अधिक बम से हम अपने दुश्मनों को पकड़ सकते हैं? या यह एक बड़ा झंडा है कि हम अपने शक्ति की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ हमने अपने नागरिकों की जान और सुरक्षा पर विचार नहीं किया है?
सेना को हमेशा अपने देश की रक्षा करने का नाम रखना चाहिए, लेकिन इसके लिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी रणनीतिक योजनाएं न केवल सैन्य बल को बढ़ाती हैं, बल्कि हमारे देश के सभी नागरिकों की जिंदगी में स्थिरता और सुरक्षा की बात करती हैं।